आकांक्षी जिले में शुमार चित्रकूट जनपद इन दिनों पंचायत व्यवस्था से जुड़े एक गंभीर भ्रष्टाचार प्रकरण को लेकर चर्चाओं में है। आरोप है कि जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) और खंड विकास अधिकारियों (बीडीओ) की मिलीभगत से पंचायत सचिवों के स्थानांतरण और गांव आवंटन में खुलेआम सरकारी नियमों की अनदेखी की जा रही है। सचिवों से मोटी रकम वसूलने के बाद उन्हें मनचाहे और आर्थिक रूप से “फायदेमंद” गांव आवंटित किए जा रहे हैं।
स्थानांतरण नीति की खुलेआम अनदेखी
सरकारी स्थानांतरण नीति का उद्देश्य पारदर्शिता और संतुलन बनाए रखना होता है, लेकिन चित्रकूट में यह नीति कथित तौर पर “सौदेबाज़ी” का माध्यम बन चुकी है। सचिवों की तैनाती अब वरिष्ठता या योग्यता से नहीं, बल्कि दी गई रकम के अनुपात से तय हो रही है।
डीपीआरओ रमेश चन्द्र गुप्ता पर गंभीर आरोप
इस पूरे प्रकरण में सबसे पहला नाम डीपीआरओ रमेश चन्द्र गुप्ता का सामने आता है। आरोप है कि सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) रहते हुए कर्वी ब्लॉक में स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण में भारी फर्जीवाड़ा किया गया। काग़ज़ों में शौचालय दिखाकर भुगतान निकाल लिया गया, जबकि ज़मीनी स्तर पर लाभार्थियों को आज तक शौचालय नहीं मिले।
शिवरामपुर और बराछ बने उदाहरण
सदर ब्लॉक कर्वी की ग्राम पंचायत शिवरामपुर और बराछ में शौचालयों के नाम पर लाखों रुपये के कथित बंदरबांट की चर्चा आज भी ग्रामीणों के बीच है। लाभार्थी बार-बार शिकायत कर रहे हैं, लेकिन भुगतान पहले ही निकल चुका होने के कारण उन्हें शौचालय नहीं मिल पा रहा।
नरैनी ब्लॉक में फर्जी भुगतान का मामला
कर्वी के बाद नरैनी ब्लॉक में प्रशासक रहते हुए भी रमेश चन्द्र गुप्ता पर लाखों रुपये के फर्जी भुगतान कराने के आरोप लगे। इसके बावजूद उन्हें पदोन्नति मिली और पुनः चित्रकूट में ही जिला पंचायत राज अधिकारी के पद पर तैनाती दे दी गई।
रसिन गांव आवंटन में ठेकेदार-सचिव गठजोड़
सूत्रों के अनुसार सदर ब्लॉक कर्वी की ग्राम पंचायत रसिन में एक सचिव की तैनाती के लिए एक ठेकेदार द्वारा डीपीआरओ को मोटी रकम दी गई। बताया जा रहा है कि यही ठेकेदार-सचिव जोड़ी पहले भी पहाड़ी ब्लॉक में विकास कार्यों के नाम पर बड़े फर्जीवाड़े कर चुकी है।
मानिकपुर ब्लॉक में बीडीओ पवन कुमार पर आरोप
मानिकपुर ब्लॉक में पदस्थ खंड विकास अधिकारी पवन कुमार पर सचिवों और ग्राम प्रधानों से दबाव बनाकर अवैध वसूली के आरोप हैं। शिकायतों को हथियार बनाकर सचिवों से रकम ऐंठी जा रही है, जिससे गांवों की समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।
भौंरी गांव आवंटन और निजी सुविधाएं
सूत्र बताते हैं कि भौंरी गांव आवंटन के नाम पर एक सचिव से मोटी रकम वसूली गई। यहां तक कि एक सचिव के आवास पर एसी लगवाने की चर्चा भी सामने आई है, जो पूरे प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
नवागंतुक सीडीओ की भूमिका पर निगाहें
बताया जाता है कि पूर्व में सचिवों के स्थानांतरण की फाइल तैयार थी, लेकिन नवागंतुक मुख्य विकास अधिकारी के आने के बाद प्रक्रिया रुक गई। अब देखना यह है कि क्या वे इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराएंगे या फिर दबाव में व्यवस्था यूँ ही चलती रहेगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सचिवों के गांव आवंटन में मुख्य आरोप क्या है?
आरोप है कि मोटी रकम लेकर मनचाहे गांव आवंटित किए जा रहे हैं।
शौचालय घोटाले में क्या गड़बड़ी हुई?
काग़ज़ों में निर्माण दिखाकर भुगतान निकाल लिया गया, जबकि शौचालय बने ही नहीं।
रसिन और भौंरी पंचायत क्यों चर्चा में हैं?
इन पंचायतों में तैनाती के नाम पर अवैध वसूली के आरोप लगे हैं।
अब आगे क्या कार्रवाई होनी चाहिए?
निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई।
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