भाई ने लूटी इज्जत तो पुलिस ने किया सौदा;
अनाथ बच्ची जब मुख्यमंत्री से मिली, तब सुरखुरु हुआ सिस्टम

कानपुर में अनाथ दुष्कर्म पीड़िता को पुलिस से न्याय न मिलने का मामला जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंचा, तो पूरे सिस्टम में हड़कंप मच गया। पढ़िए पूरी विश्लेषणात्मक रिपोर्ट।


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✍️चुन्नीलाल प्रधान की रिपोर्ट

भाई ने लूटी इज्जत तो पुलिस ने किया सौदा;
अनाथ बच्ची जब मुख्यमंत्री से मिली, तब सुरखुरु हुआ सिस्टम

उत्तर प्रदेश के कानपुर से सामने आया यह मामला न सिर्फ पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है, बल्कि उस सामाजिक और प्रशासनिक संवेदनहीनता को भी उजागर करता है, जहाँ एक अनाथ पीड़िता को न्याय पाने के लिए थाने-दर-थाने भटकना पड़ा। अंततः जब स्थानीय सिस्टम ने उसे निराश किया, तब उसने सीधे योगी आदित्यनाथ के जनता दरबार का दरवाज़ा खटखटाया। मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद ही प्रशासन हरकत में आया, जिससे एक बार फिर यह सवाल उठ खड़ा हुआ कि क्या आम नागरिक को न्याय तभी मिलेगा, जब मामला सत्ता के शीर्ष तक पहुँचे?

भरोसे का कत्ल और रिश्तों की दरिंदगी

कल्याणपुर थाना क्षेत्र के बारा सिरोही की रहने वाली वंदना सिंह (बदला हुआ नाम) की कहानी बेहद पीड़ादायक है। माता-पिता के निधन के बाद वह अपने नाबालिग भाई के साथ अकेली रह गई थी। ऐसे कठिन समय में उसने अपने फुफेरे भाई अनिरुद्ध सिंह उर्फ अतुल पर भरोसा किया। आरोप है कि इसी भरोसे का फायदा उठाते हुए आरोपी ने पहले पीड़िता का पुश्तैनी मकान बिकवाया और लगभग 10 लाख रुपये अपने पास रख लिए।

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आरोप यहीं तक सीमित नहीं रहे। पीड़िता के अनुसार, एक रात आरोपी ने शराब के नशे में उसके नाबालिग भाई को जान से मारने की धमकी देकर उसके साथ दुष्कर्म किया। यह घटना केवल एक अपराध नहीं, बल्कि रिश्तों की आड़ में की गई घिनौनी दरिंदगी का उदाहरण है।

थाने में टूटी उम्मीद, न्याय के बदले सौदे का आरोप

दुष्कर्म के बाद पीड़िता ने हिम्मत जुटाकर पुलिस का दरवाज़ा खटखटाया, लेकिन वहाँ जो अनुभव हुआ, उसने उसकी बची-खुची उम्मीद भी तोड़ दी। मामला कल्याणपुर थाने के एक दरोगा को सौंपा गया। पीड़िता का आरोप है कि दरोगा ने निष्पक्ष जांच करने के बजाय आरोपी से सांठगांठ कर ली।

पीड़िता के मुताबिक, आरोपी को चौकी बुलाकर कथित रूप से ‘समझौते’ की पेशकश की गई और इसके एवज में पैसे लिए गए। जब पीड़िता ने अपने बचे हुए पैसों की मांग की, तो आरोपी ने खुलेआम कहा कि वह दरोगा को एक लाख रुपये दे चुका है और अब उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। यह बयान अपने आप में पुलिस व्यवस्था पर एक गहरा धब्बा है।

जब सिस्टम से हारकर मुख्यमंत्री दरबार पहुँची पीड़िता

स्थानीय पुलिस और कमिश्नरेट से निराश होकर पीड़िता सोमवार को लखनऊ स्थित मुख्यमंत्री आवास पहुँची। जनता दरबार में रोते हुए उसने अपनी पूरी आपबीती सुनाई—न सिर्फ दुष्कर्म की, बल्कि पुलिस द्वारा किए गए कथित सौदे की भी। मामला सुनते ही मुख्यमंत्री ने कड़ा रुख अपनाया और तत्काल रिपोर्ट तलब की।

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मुख्यमंत्री कार्यालय ने कानपुर पुलिस कमिश्नर से पूरे प्रकरण की विस्तृत जानकारी, अब तक की गई कार्रवाई और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर जवाब मांगा। इसके बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और वर्षों से दबे मामलों की तरह इस केस को भी दबाने की कोशिशें बेनकाब हो गईं।

संवेदनशील निर्णय: शिक्षा, आवास और आजीविका का आश्वासन

मुख्यमंत्री ने केवल जांच के आदेश ही नहीं दिए, बल्कि मानवीय संवेदनशीलता का परिचय भी दिया। उन्होंने पीड़िता को आश्वस्त किया कि उसके नाबालिग भाई की मुफ्त शिक्षा, रहने के लिए सुरक्षित आवास और आय का स्थायी साधन सरकार द्वारा उपलब्ध कराया जाएगा। यह निर्णय उस सामाजिक जिम्मेदारी की याद दिलाता है, जो राज्य को अपने सबसे कमजोर नागरिकों के प्रति निभानी चाहिए।

पुलिस की सफाई और आगे की कार्रवाई

मामला शीर्ष स्तर तक पहुँचने के बाद कानपुर पुलिस सक्रिय हुई। जॉइंट पुलिस कमिश्नर अशुतोष कुमार ने बयान जारी कर बताया कि पीड़िता की शिकायत पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और दरोगा पर लगे आरोपों समेत सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई होगी।

हालाँकि, सवाल यह है कि क्या यह कार्रवाई स्वतः होती, अगर पीड़िता मुख्यमंत्री दरबार तक न पहुँचती? यही प्रश्न इस पूरे मामले को एक सामान्य अपराध से कहीं आगे ले जाता है।

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यह मामला क्या सिखाता है?

कानपुर का यह प्रकरण केवल एक दुष्कर्म की कहानी नहीं है। यह उस सिस्टम की कहानी है, जहाँ पीड़ित को बार-बार अपनी पीड़ा साबित करनी पड़ती है। यह पुलिस सुधार, जवाबदेही और संवेदनशीलता की आवश्यकता को रेखांकित करता है। साथ ही, यह भी दिखाता है कि सत्ता के हस्तक्षेप से सिस्टम कैसे अचानक सक्रिय हो जाता है।

यदि इस मामले में दोषी पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई होती है, तो यह नजीर बन सकती है। अन्यथा, यह भी उन अनगिनत मामलों में शामिल हो जाएगा, जहाँ न्याय केवल फाइलों में सिमट कर रह जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

यह मामला कहां का है?

यह मामला उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के कल्याणपुर थाना क्षेत्र से जुड़ा है।

पीड़िता ने मुख्यमंत्री से क्यों संपर्क किया?

स्थानीय पुलिस और कमिश्नरेट से न्याय न मिलने के कारण पीड़िता को मुख्यमंत्री जनता दरबार जाना पड़ा।

पुलिस पर क्या आरोप लगे हैं?

आरोप है कि जांच अधिकारी ने आरोपी से सांठगांठ कर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की।

मुख्यमंत्री ने क्या कार्रवाई की?

मुख्यमंत्री ने रिपोर्ट तलब की, जांच के आदेश दिए और पीड़िता के भाई की शिक्षा व आवास की व्यवस्था का आश्वासन दिया।

आगे क्या उम्मीद की जा रही है?

उम्मीद है कि आरोपी और लापरवाह पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई होगी और पीड़िता को न्याय मिलेगा।

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