बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार के खिलाफ सड़कों पर उतरा जनआक्रोश

बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ हिंदूवादी संगठनों का जोरदार प्रदर्शन। राजा कॉलेज फील्ड से लालबाग चौराहे तक पुतला दहन, भारत माता की जय के नारे और बांग्लादेश को दी जा रही सुविधाएं बंद करने की मांग।

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📝 रितेश गुप्ता की रिपोर्ट

दिनांक 24 दिसंबर 2025 को बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर हो रहे कथित अत्याचारों के विरोध में शहर में जबरदस्त जनआक्रोश देखने को मिला। हिंदूवादी संगठन के आह्वान पर हजारों की संख्या में कार्यकर्ता और आम नागरिक सड़कों पर उतरे और बांग्लादेश सरकार के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया।

राजा कॉलेज फील्ड से शुरू हुआ आक्रोश मार्च

यह विरोध प्रदर्शन राजा कॉलेज फील्ड से प्रारंभ हुआ, जहां सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग एकत्र होने लगे थे। प्रदर्शन का नेतृत्व समाजसेवी अनूप खेतान एवं धर्मगुरु आशीष शास्त्री जी ने किया। हाथों में तख्तियां, बैनर और भगवा झंडे लिए प्रदर्शनकारी “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम्” के नारों के साथ आगे बढ़े।

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लालबाग चौराहे पर फूंका गया बांग्लादेश के प्रधानमंत्री का पुतला

जुलूस जब लालबाग चौराहे पर पहुंचा तो वहां बांग्लादेश के प्रधानमंत्री का प्रतीकात्मक पुतला फूंका गया। इस दौरान माहौल पूरी तरह राष्ट्रवादी नारों से गूंज उठा। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं को लगातार निशाना बनाया जा रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस विषय को गंभीरता से नहीं उठाया जा रहा।

“हिंदुओं पर अत्याचार अब बर्दाश्त नहीं”

सभा को संबोधित करते हुए समाजसेवी अनूप खेतान ने कहा कि बांग्लादेश में मंदिरों पर हमले, जबरन धर्मांतरण और हिंदू महिलाओं के साथ हो रही घटनाएं मानवाधिकारों पर सीधा प्रहार हैं। उन्होंने कहा कि यदि यह अत्याचार नहीं रुके तो आंदोलन और व्यापक रूप लेगा।

धर्मगुरु आशीष शास्त्री का भावुक संबोधन

धर्मगुरु आशीष शास्त्री जी ने अपने संबोधन में कहा कि हिंदू समाज अब मौन नहीं रहेगा। उन्होंने भारत सरकार से मांग की कि बांग्लादेश पर कूटनीतिक दबाव बनाया जाए और वहां रह रहे हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। उन्होंने इसे केवल एक देश का मामला नहीं, बल्कि मानवता से जुड़ा प्रश्न बताया।

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बांग्लादेश को दी जा रही सुविधाएं बंद करने की मांग

प्रदर्शनकारियों ने एक स्वर में मांग की कि जब तक बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार बंद नहीं होते, तब तक भारत सरकार द्वारा दी जा रही व्यापारिक, कूटनीतिक और अन्य सुविधाओं पर पुनर्विचार किया जाए। वक्ताओं ने कहा कि मित्रता का आधार केवल समझौते नहीं, बल्कि मानवाधिकारों का सम्मान होना चाहिए।

शांतिपूर्ण लेकिन सख्त चेतावनी भरा प्रदर्शन

हालांकि प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा, लेकिन नारों और भाषणों में सख्त चेतावनी साफ झलक रही थी। सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा, जिससे किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।

स्थानीय नागरिकों और युवाओं की बड़ी भागीदारी

इस विरोध प्रदर्शन में युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों की भी उल्लेखनीय भागीदारी रही। कई युवाओं ने कहा कि वे सोशल मीडिया के माध्यम से भी बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उजागर करेंगे।

प्रदर्शन का समापन राष्ट्रगान और भारत माता की जय के नारों के साथ हुआ। आयोजकों ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन केवल एक दिन का नहीं है, बल्कि जरूरत पड़ी तो इसे देशव्यापी स्तर तक ले जाया जाएगा।

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❓ महत्वपूर्ण सवाल–जवाब

यह विरोध प्रदर्शन क्यों किया गया?

बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर हो रहे कथित अत्याचारों के विरोध में यह प्रदर्शन किया गया।

प्रदर्शन कहां से कहां तक हुआ?

प्रदर्शन राजा कॉलेज फील्ड से शुरू होकर लालबाग चौराहे तक गया।

प्रदर्शन का नेतृत्व किसने किया?

समाजसेवी अनूप खेतान और धर्मगुरु आशीष शास्त्री जी ने प्रदर्शन का नेतृत्व किया।

प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग क्या रही?

बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार रोकने और उसे दी जा रही सुविधाएं बंद करने की मांग की गई।

क्या प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा?

हां, प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा और पुलिस प्रशासन की निगरानी में संपन्न हुआ।

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