यूपी में कोडीन कफ सिरप घोटाला: बयानबाज़ी से जातीय नैरेटिव तक—अखिलेश, धनंजय और बृजभूषण आमने-सामने

दुर्गा प्रसाद शुक्ला की रिपोर्ट
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उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर उबाल पर है। इस बार केंद्र में है कोडीन कफ सिरप घोटाला, जिसने न केवल कानून-व्यवस्था और स्वास्थ्य तंत्र पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि जातीय राजनीति और चुनावी रणनीति के नए संकेत भी दे दिए हैं। मामला तब और पेचीदा हो गया जब इस प्रकरण में पूर्व सांसद धनंजय सिंह का नाम उछला और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के बयान सामने आए। जवाब में धनंजय सिंह ने तीखा पलटवार करते हुए अखिलेश यादव पर ‘क्षत्रिय विरोधी’ होने का आरोप लगाया। इसी आरोप-प्रत्यारोप के बीच अखिलेश यादव ने खुद को क्षत्रिय बताते हुए राजनीतिक बहस को एक नए मोड़ पर ला खड़ा किया।

कोडीन कफ सिरप घोटाला: सियासत की धुरी

कोडीन युक्त कफ सिरप के अवैध कारोबार को लेकर उत्तर प्रदेश में पहले भी कई बार प्रशासनिक कार्रवाइयाँ हुई हैं, लेकिन इस बार मामला इसलिए बड़ा बन गया क्योंकि इसमें राजनीतिक हस्तियों के नाम सामने आए। विपक्ष का आरोप है कि यह अवैध नेटवर्क वर्षों से फल-फूल रहा है और संरक्षण के बिना संभव नहीं। वहीं सत्ता पक्ष का कहना है कि कानून अपना काम कर रहा है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। इस खींचतान के बीच राजनीतिक बयानबाज़ी ने मामले को चुनावी रंग दे दिया है।
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अखिलेश यादव का बयान: “मैं भी तो क्षत्रिय ही हूं”

धनंजय सिंह के ‘एंटी-ठाकुर’ आरोप के जवाब में अखिलेश यादव ने सार्वजनिक रूप से कहा—“मैं भी तो क्षत्रिय ही हूं, आखिर क्षत्रिय कौन है, यह कौन तय करेगा?” यह बयान महज़ एक जवाब भर नहीं था; राजनीतिक जानकारों के मुताबिक यह एक सुनियोजित संदेश था। बीते कुछ वर्षों से अखिलेश यादव पर ठाकुर समुदाय से दूरी का आरोप लगता रहा है। ऐसे में खुद को क्षत्रिय बताकर उन्होंने उस छवि को तोड़ने की कोशिश की, जो विपक्ष उनके खिलाफ गढ़ता रहा है।

धनंजय सिंह का पलटवार और कानूनी चेतावनी

धनंजय सिंह ने अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं के बयानों को मानहानिकारक बताते हुए अदालत का रुख करने की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि वे इस मामले में माफी मंगवाएंगे। यह संकेत देता है कि सियासी जंग अब केवल मंचों और मीडिया तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि कानूनी मोर्चे पर भी लड़ी जाएगी। इससे यह भी स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने वाला है।

बृजभूषण शरण सिंह का समर्थन: जातीय बहस को और धार

अखिलेश यादव के क्षत्रिय बयान पर भाजपा के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह का समर्थन सामने आना सियासी तापमान को और बढ़ाने वाला साबित हुआ। बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि वे जन्म से यदुवंशी क्षत्रिय हैं और भगवान कृष्ण के वंशज होने के कारण क्षत्रिय कहलाते हैं। उनके इस बयान ने जातीय पहचान की बहस को वैचारिक से भावनात्मक धरातल पर ला दिया है।
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दो क्षत्रिय नेता, एक राजनीति

धनंजय सिंह और बृजभूषण शरण सिंह—दोनों ही क्षत्रिय समुदाय के प्रभावशाली नेता माने जाते हैं और उनके बीच दोस्ती के किस्से भी सियासी गलियारों में चर्चित हैं। लेकिन अखिलेश यादव के समर्थन में बृजभूषण के बयान ने समीकरण बदल दिए हैं। इससे संकेत मिलता है कि व्यक्तिगत संबंधों से ऊपर राजनीतिक रणनीति को तरजीह दी जा रही है।

2027 विधानसभा चुनाव और नया नैरेटिव

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अखिलेश यादव का यह बयान सीधे तौर पर 2027 के विधानसभा चुनाव से जुड़ा है। उत्तर प्रदेश में जातीय संतुलन किसी भी दल के लिए निर्णायक भूमिका निभाता है। खुद को क्षत्रिय बताकर अखिलेश यादव ने यह संकेत देने की कोशिश की है कि समाजवादी पार्टी किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं, बल्कि व्यापक सामाजिक आधार के साथ आगे बढ़ना चाहती है। यह रणनीति पार्टी के परंपरागत वोट बैंक के साथ नए वर्गों को जोड़ने की कवायद के रूप में देखी जा रही है।

सियासत, कानून और समाज: आगे क्या?

कोडीन कफ सिरप घोटाला अब केवल एक आपराधिक या प्रशासनिक मामला नहीं रह गया है। यह उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातीय पहचान, नेतृत्व की छवि और चुनावी रणनीति का प्रतीक बनता जा रहा है। एक ओर जांच एजेंसियों की भूमिका पर नजरें टिकी हैं, तो दूसरी ओर राजनीतिक दल इस मुद्दे को अपने-अपने पक्ष में भुनाने की कोशिश कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह विवाद किस दिशा में जाता है—कानूनी कार्रवाई के निष्कर्ष की ओर या चुनावी भाषणों की गर्मी में और भड़कता हुआ।
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पाठकों के सवाल

कोडीन कफ सिरप घोटाला क्या है?

यह मामला कोडीन युक्त कफ सिरप के अवैध निर्माण, तस्करी और बिक्री से जुड़ा है, जिसे नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

अखिलेश यादव ने खुद को क्षत्रिय क्यों कहा?

धनंजय सिंह के ‘क्षत्रिय विरोधी’ आरोप के जवाब में अखिलेश यादव ने अपनी जातीय पहचान स्पष्ट करते हुए यह बयान दिया।

बृजभूषण शरण सिंह का बयान क्यों अहम है?

उनका समर्थन इस विवाद को और व्यापक बना देता है, क्योंकि वे स्वयं एक प्रभावशाली क्षत्रिय नेता माने जाते हैं।

क्या यह विवाद 2027 चुनाव को प्रभावित करेगा?

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, यह विवाद नए जातीय और राजनीतिक नैरेटिव गढ़ने में भूमिका निभा सकता है।

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