उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले से एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है, जो प्रदेश में विकास कार्यों की सच्चाई को कटघरे में खड़ा कर रही है। 34 करोड़ की लागत से बनी करीब 9 किलोमीटर लंबी दोस्तीनगर बायपास सड़क महज़ डेढ़ महीने भी नहीं टिक पाई। हालत यह है कि सड़क कई स्थानों पर बुरी तरह धंस गई है, गिट्टियां बाहर निकल आई हैं और बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं। वही सड़क, जिसे क्षेत्र के लिए विकास की नई पहचान बताया गया था, अब स्थानीय लोगों के लिए परेशानी का कारण बन चुकी है।
यह सड़क PWD विभाग द्वारा निर्मित की गई थी। 2024 में काम शुरू होने के बाद इसे इसी वर्ष पूरा कर लिया गया। 7 अक्टूबर को ट्रायल के तौर पर अनौपचारिक शुभारंभ भी किया गया और हरदोई की ओर से आने वाले वाहनों को अग्निशमन प्रशिक्षण केंद्र से दही चौकी की ओर डायवर्ट किया गया। लेकिन भारी वाहनों का दबाव इतना अधिक था कि सिर्फ सात दिनों के अंदर ही सड़क जवाब दे गई। जगह-जगह दरारें, गड्ढे और धंसान बनने लगे, जिससे सड़क की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे।
25 अक्टूबर को हुई मरम्मत — लेकिन स्थिति फिर बदतर
पहली बार खराब होने के बाद 25 अक्टूबर के आसपास PWD ने सड़क की मरम्मत कराई। इसके बाद 19 नवंबर से शहर में हाईटगेज लगाकर शहर में भारी वाहनों का आवागमन प्रतिबंधित कर दिया गया और भारी वाहनों को दोस्तीनगर बायपास से ही निकाला जाने लगा। लेकिन महज़ 45 दिन बाद एक बार फिर वही हाल— सड़क धंसने लगी, डामर उखड़ गया और गिट्टियां ऊपर आ गईं। इससे साफ है कि सड़क की मजबूती और निर्माण गुणवत्ता दोनों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
PWD की सफाई — ओवरलोड वाहन जिम्मेदार
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए एक्सईएन हरदयाल अहिरवार ने कहा कि शहर में हाईटगेज लगाए जाने के बाद से सभी भारी वाहन दोस्तीनगर बायपास से गुजर रहे हैं। सड़क का निर्माण 30 से 40 टन भार के वाहनों के आधार पर किया गया था, लेकिन कई वाहन 50 टन से अधिक भार लेकर गुजर रहे हैं, जिससे सड़क क्षतिग्रस्त हो रही है। उन्होंने यह भी बताया कि जहां-जहां सड़क खराब हुई है, वहां पैच वर्क एवं मरम्मत का कार्य फिर से कराया जा रहा है।
गुणवत्ता पर सवाल — 34 करोड़ की लागत, फिर भी डेढ़ महीने की उम्र?
स्थानीय लोगों और सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ओवरलोडिंग एक कारण हो सकता है, लेकिन यदि सड़क की गुणवत्ता मानकों के अनुसार होती, तो इतनी जल्दी नहीं टूटती। 34 करोड़ की लागत में बनी सड़क का डेढ़ महीने में बार-बार क्षतिग्रस्त होना न केवल आर्थिक हानि है, बल्कि सरकारी निर्माण कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाता है। क्षेत्र में यह चर्चा तेज है कि क्या निर्माण मानकों का पालन किया गया या काम में लापरवाही हुई?
लोकल ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों का यह भी कहना है कि सड़क पर गिट्टी उभरने और धंसान का मतलब है कि सबग्रेड और बिटुमिनस लेयर की मोटाई मानकों के अनुसार नहीं रखी गई। कई ग्रामीणों ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें पोस्ट करते हुए कहा कि निर्माण शुरू होने से लेकर समाप्ति तक किसी भी स्तर पर पारदर्शिता देखने को नहीं मिली।
फिलहाल क्या स्थिति है?
PWD विभाग फिलहाल फिर से मरम्मत कार्य करा रहा है। लेकिन लोगों का कहना है कि मरम्मत समाधान नहीं, बल्कि असल समस्या से बचने का तरीका है। इस सड़क के भविष्य को लेकर लोगों के मन में संदेह बना हुआ है कि क्या यह बायपास लंबे समय तक वाहनों का भार झेल पाएगा या हर कुछ महीनों में करोड़ों की लागत वाली मरम्मत होती रहेगी।
💬 क्लिकेबल सवाल–जवाब (FAQ)
सवाल 1: दोस्तीनगर बायपास सड़क की लंबाई कितनी है?
यह सड़क लगभग 9 किलोमीटर लंबी है।
सवाल 2: सड़क की लागत कितनी आई?
सड़क का निर्माण लगभग 34 करोड़ रुपये की लागत से किया गया।
सवाल 3: सड़क इतनी जल्दी क्यों टूट गई?
PWD के अनुसार वजह ओवरलोड वाहन हैं, जबकि स्थानीय लोग निर्माण गुणवत्ता को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
सवाल 4: क्या सड़क की मरम्मत हो रही है?
हाँ, जहां-जहां सड़क खराब हुई है वहां पैच वर्क और मरम्मत का कार्य किया जा रहा है।
सवाल 5: क्या जांच की मांग उठ रही है?
स्थानीय लोग निर्माण गुणवत्ता की जांच की मांग कर रहे हैं, हालांकि अभी आधिकारिक जांच की घोषणा नहीं हुई है।
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उन्नाव में 34 करोड़ की लागत से बनी 9 किमी दोस्तीनगर बायपास सड़क डेढ़ महीने भी नहीं चली। जगह-जगह सड़क धंसने, गड्ढे बनने और गिट्टी बाहर आने से निर्माण गुणवत्ता पर सवाल। PWD ने ओवरलोड वाहनों को जिम्मेदार बताया।









