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और मरने के बाद भी किसान का दिल धड़कने लगा पांच साल की बच्ची के जिस्म में

टिक्कू आपचे की रिपोर्ट

मुंबई। साइंस की दुनिया इतनी चौंकाने वाली होती है कि इससे संबंधित कई सुखद आश्चर्य वाले मामले भी सामने आते रहते हैं। हाल ही में एक ऐसा ही मामला सामने आया है जहां इंदौर के 41 वर्षीय एक किसान के द्वारा किए गए मरणोपरांत अंगदान से मिले दिल को पांच साल की बच्ची के शरीर में प्रतिरोपित किया गया है और यह ऑपरेशन सफल रहा। जैसे ही यह ऑपरेशन किया गया, बच्ची के शरीर में किसान का दिल धड़कने लगा।

दरअसल, मुंबई के एक अस्पताल में भर्ती पांच साल की बच्ची दिल की एक गंभीर बीमारी से जूझ रही थी।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य प्रदेश के इंदौर के एक 41 वर्षीय किसान ने मरणोपरांत अंगदान किया हुआ था। किसान की मौत के बाद अंगदान से मिले हृदय को बच्ची के शरीर में प्रतिरोपित करने के लिए इंदौर से मंगलवार शाम हवाई मार्ग से मुंबई रवाना किया गया था। 

इंदौर के शासकीय महात्मा गांधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डॉ. संजय दीक्षित ने बताया कि मुंबई के अस्पताल में गंभीर हालत में भर्ती पांच साल की बच्ची ऐसे विकार की शिकार थी जिसमें उसका हृदय और इसके आस-पास की जगह असामान्य रूप से बड़ी हो गई थी, जबकि किसान के हृदय का आकार सामान्य के मुकाबले छोटा था। अंगों के इस अजब-गजब संयोग के चलते ही बच्ची के शरीर में एक वयस्क व्यक्ति का हृदय प्रतिरोपित किया जा सका। फिलहाल हृदय प्रतिरोपण के बाद बच्ची की हालत स्थिर बनी हुई है और मुंबई के अस्पताल के डॉक्टर उसकी हालत पर नजर रख रहे हैं। 

रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य प्रदेश के देवास जिले के पिपलिया गांव के किसान सोलंकी 28 नवंबर को सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए थे और उन्हें इंदौर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अधिकारियों ने बताया कि इलाज के बावजूद सोलंकी की सेहत बिगड़ती चली गई और डॉक्टरों ने मंगलवार को उन्हें दिमागी रूप से मृत घोषित कर दिया। सोलंकी का परिवार शोक में डूबा होने के बावजूद उनके दिवंगत परिजन के अंगदान के लिए राजी हो गया।

किसान की मौत के बाद उनके हृदय के साथ ही उनका जिगर, दोनों गुर्दे और दोनों फेफड़े निकाल लिए। इसके बाद जिगर और दोनों गुर्दे इंदौर के तीन जरूरतमंद मरीजों को प्रतिरोपित किए गए, जबकि उनके दोनों फेफड़े हैदराबाद के एक अस्पताल में भर्ती 38 वर्षीय मरीज को प्रतिरोपित किए गए। अधिकारियों ने बताया कि किसान के दोनों फेफड़ों को हवाई मार्ग से मंगलवार शाम हैदराबाद भेजा गया था। 

रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि इंदौर में पिछले छह साल के दौरान दिमागी रूप से मृत 42 मरीजों का अंगदान हो चुका है। इससे मिले हृदय, जिगर, गुर्दे, आंखों और त्वचा के प्रतिरोपण से मध्यप्रदेश के साथ ही दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र और तेलंगाना में जरूरतमंद मरीजों को नए जीवन की सौगात मिली है।

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