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अतर्राकरतलबांदा

श्रद्धापूर्वक गाजे बाजे के साथ नम आँखों से हुई “माँ भवानी” की अँन्तिम “बिदाई”

संतोष कुमार सोनी की रिपोर्ट

कस्बा करतल, बांदा ।   कस्बे मे नवयुवकों द्वारा सँचालित “नव दुर्गा उत्सव समिति”करतल द्वारा माँ दुर्गा की प्रतिमा रखवाने का सिलसिला आज कई वर्षों से चला आ रहा है जिसमें प्रतिवर्ष आपसी सहयोग से श्रद्धालुओं को माँ भवानी की अनुपम छटा दिखाने के उद्देश्य से नवरात्रि प्रारम्भ होने के प्रथम दिन से ही प्रत्येक दिन माँ आदिशक्ति केअनेकों रूपों को साज सज्जा के माध्यम से प्रस्तुत कर दर्शनार्थियों में भक्तिभाव भरने का भरसक प्रयास किया गया।

सँन्ध्याकालीन से ही बालकलाकारों द्वारा अद्भुत सज्जाकारी से सजी माँ भवानी की झाँकी को देखने के लिये प्रतिदिन हजारों की सँख्या में भीड़ नजर आती रही किन्तु हरवर्ष की तरह कस्बे में बिजयादशमी को लगने वाले “रावण दहन” मेला के उपरान्त ही एकादशी को मूर्ति बिसर्जन की परम्परा चली आने के कारण आज गाजे बाजे के साथ डी.जे. की धुनों में थिरकते भक्तों के साथ समूचे कस्बे में माँ की झाँकी निकालकर ग्रामवासियों को माँ “आदिशक्ति” केअँतिम दर्शन कराते हुये “बिसर्जन”हेतु बागे नदी(रेहुँची ) की ओर प्रस्थान किया। जहाँ पर रास्ते में जगह जगह श्रद्धालुओं ने माँ के अँन्तिम दर्शनों के साथ माँ की बिधिवत पूजा अर्चना कर गद् गद् होकर माँ की भक्ति में लीन हो माँ के जयकारे लगाते नजर आये।

इस समूचे कार्यक्रम में शाँन्ति ब्यवस्था बनाये रखने में स्थानीय पुलिस का बिशेष योगदान रहा जिससे माँ की बिदाई का यह कार्यक्रम बड़े ही शान्तिपूर्ण ढँग से सम्पन्न हुआ तथा मौजूद सभी भक्तों ने माँ के जयकारों के साथ अँन्तिम दर्शन कर माँ को श्रद्धापूर्वक जल समाधि दी।

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"ज़िद है दुनिया जीतने की" "हटो व्योम के मेघ पंथ से स्वर्ग लूटने हम आते हैं"

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