
विनीता साहू की रिपोर्ट
नई दिल्ली। दिल्ली धमाका मामले में गिरफ्तार डॉ. शाहीन हमदर्द की साजिश ने देशभर में सनसनी मचा दी है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, वह हमदर्द बनकर युवाओं को दहशतगर्द बनाने की गहरी साजिश रच रही थी। एटीएस को शुरुआती जांच में कई अहम सुराग मिले हैं जो इस बात की पुष्टि करते हैं कि शाहीन सिर्फ एक डॉक्टर नहीं बल्कि एक संगठित आतंकी मॉड्यूल का हिस्सा थी।
एटीएस की जांच में बड़ा खुलासा — मेडिकल के छात्रों को बनाती थी निशाना
सूत्रों के अनुसार, डॉ. शाहीन हमदर्द मेडिकल के छात्रों और खासतौर पर मुस्लिम मरीजों को ब्रेनवॉश कर आतंकी विचारधारा की ओर मोड़ने का काम करती थी। वह अपनी सहानुभूति और इलाज के बहाने उनसे संपर्क करती थी और फिर धीरे-धीरे उन्हें जमात उल मोमिनात जैसे कट्टरपंथी संगठनों से जोड़ने की कोशिश करती थी।
जांच में यह भी सामने आया है कि शाहीन ने कई बार जम्मू-कश्मीर का दौरा किया और वहां सक्रिय आतंकी नेटवर्क को लॉजिस्टिक सपोर्ट उपलब्ध कराया। यही नहीं, उसने विदेशों में पढ़ाई कर रही लड़कियों को ऑनलाइन ब्रेनवॉश कर अपने संगठन से जोड़ने की कोशिश की।
ऑनलाइन क्लास और “हमदर्दी” के बहाने रचती थी जाल
एटीएस जांच में यह खुलासा हुआ है कि शाहीन विदेशों में पढ़ने वाली छात्राओं से सोशल मीडिया और ऑनलाइन क्लास के जरिये जुड़ी रहती थी। वह ऑनलाइन गाइडेंस और करियर सलाह के बहाने संपर्क करती, फिर उनकी समस्याएं सुनकर “हमदर्दी” जताती और धीरे-धीरे उन्हें आतंकी मॉड्यूल की तरफ मोड़ देती थी।
सूत्रों का कहना है कि वह छात्राओं से धार्मिक विषयों पर लंबी चर्चाएँ करती थी और उन्हें धीरे-धीरे यह विश्वास दिलाने की कोशिश करती कि “उनका असली मिशन” समाज में बदलाव लाना है — लेकिन यह बदलाव दरअसल कट्टरपंथी एजेंडा था।
पहले भी जुड़ा है डॉक्टरों का नाम आतंकी मॉड्यूल से
यह पहला मौका नहीं है जब डॉक्टरों की आतंकी गतिविधियों में संलिप्तता सामने आई हो। अगस्त 2024 में दिल्ली पुलिस ने यूपी एटीएस, राजस्थान और झारखंड पुलिस के साथ मिलकर एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया था। उस समय रांची का डॉ. इश्तियाक अहमद गिरफ्तार हुआ था, जो अलकायदा इन इंडियन सब कांटिनेंट मॉड्यूल का सरगना बताया गया था।
तब भी नेटवर्क में कई शिक्षित युवा, डॉक्टर और छात्र शामिल थे। अब डॉ. शाहीन हमदर्द के मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या आतंकी संगठन अब “शिक्षित वर्ग” को निशाना बना रहे हैं?
भाई डॉ. परवेज और डॉ. मुजम्मिल से आमने-सामने पूछताछ
दिल्ली धमाका की जांच में एटीएस अब शाहीन के भाई डॉ. परवेज और गिरफ्तार डॉ. मुजम्मिल से भी आमने-सामने पूछताछ कर रही है। दोनों से पहले अलग-अलग पूछताछ हुई, अब दोनों को आमने-सामने बैठाकर कई सवाल पूछे जाएंगे ताकि नेटवर्क के तार जोड़े जा सकें।
सूत्रों का कहना है कि डॉ. परवेज सिर्फ कीपैड फोन का इस्तेमाल करता था और सोशल मीडिया पर बहुत सीमित दिखता था। उसके व्हाट्सएप डीपी में सिर्फ सीनरी की तस्वीर लगी थी। पड़ोसी बताते हैं कि वह पहले मोहल्ले में क्रिकेट खेलता था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से उसका आना-जाना कम हो गया था। अब उसका नाम आतंकी कनेक्शन में आने पर लोग हैरान हैं।
मुत्तकीपुर में छापेमारी के बाद सन्नाटा — लोगों में डर और हैरानी
मुत्तकीपुर की तकवा कॉलोनी में बुधवार सुबह से ही पुलिस और एटीएस की टीम तैनात रही। इलाके में डॉ. परवेज के घर के बाहर सन्नाटा पसरा रहा। कुछ लोग घर देखने पहुंचे लेकिन ज्यादातर ने घरों के दरवाजे बंद रखे।
स्थानीय बुजुर्ग इश्तियाक ने कहा — “यह दुखद है कि जो लोग इलाज का काम करते हैं, वे अगर किसी गलत रास्ते पर चल पड़ें तो पूरे गांव की बदनामी होती है।” मोहल्ले के एक युवक ने बताया कि डॉ. परवेज मस्जिद में मोबाइल पर कुरान पढ़ता था, जिस पर कुछ लोगों से विवाद भी हुआ था।
जांच में एटीएस ने क्या पाया?
एटीएस जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। शाहीन और परवेज दोनों के बीच “कोड वर्ड” में बातचीत होती थी। वे छात्रों से चैट करते समय धार्मिक संदर्भों का उपयोग करते थे ताकि संदेश सामान्य लगे, लेकिन उसके पीछे कट्टरपंथी संदेश छिपा होता था।
एटीएस यह भी जांच रही है कि क्या यह मॉड्यूल हाल ही में हुए दिल्ली धमाका से जुड़ा हुआ है। दोनों घटनाओं के बीच तकनीकी डेटा, कॉल रिकॉर्ड और सोशल मीडिया गतिविधियों की तुलना की जा रही है।
अलकायदा इन इंडियन सब कांटिनेंट मॉड्यूल की फिर से जांच
खुफिया एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि डॉ. शाहीन हमदर्द का नेटवर्क अलकायदा इन इंडियन सब कांटिनेंट से सीधे जुड़ा है या नहीं। एजेंसियों का मानना है कि यह वही पुराना नेटवर्क है जो 2024 में उजागर हुआ था। अब नई पीढ़ी के डॉक्टर और छात्र इसमें धीरे-धीरे शामिल हो रहे हैं।
सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह ट्रेंड बेहद खतरनाक है, क्योंकि इससे शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में छिपे कट्टर नेटवर्क का संकेत मिलता है।
दिल्ली धमाका और डॉ. शाहीन हमदर्द का केस यह दिखाता है कि अब आतंकवाद सिर्फ हथियारों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि “ब्रेनवॉश और हमदर्दी” का नया चेहरा बन चुका है। डॉक्टर जैसे सम्मानित पेशे का उपयोग अगर युवाओं को दहशतगर्द बनाने में किया जाए, तो यह न केवल कानून बल्कि समाज के लिए भी गंभीर चेतावनी है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले दिनों में ऐसे मॉड्यूल की जांच और गहरी होगी। देशभर में एजेंसियाँ इस बात की तफ्तीश कर रही हैं कि क्या अन्य शहरों में भी ऐसे “हमदर्द डॉक्टर” सक्रिय हैं।
🔍 सवाल-जवाब (क्लिक करें 👇)
1️⃣ डॉ. शाहीन हमदर्द कौन है और क्या आरोप हैं?
डॉ. शाहीन हमदर्द मेडिकल डॉक्टर हैं जिन पर युवाओं और छात्राओं को ब्रेनवॉश कर आतंकी संगठन से जोड़ने का आरोप है।
2️⃣ क्या डॉ. शाहीन का संबंध अलकायदा इन इंडियन सब कांटिनेंट से है?
एटीएस की जांच में यह संभावना जताई गई है कि शाहीन उसी नेटवर्क से जुड़ी हैं जिसका खुलासा 2024 में हुआ था।
3️⃣ उनके भाई डॉ. परवेज की भूमिका क्या है?
डॉ. परवेज से एटीएस ने अलग-अलग पूछताछ की है। अब उन्हें शाहीन और मुजम्मिल के साथ आमने-सामने बैठाकर सवाल किए जा रहे हैं।
4️⃣ क्या दिल्ली धमाका इसी नेटवर्क से जुड़ा है?
जांच एजेंसियां इस संभावना की गहन जांच कर रही हैं। दोनों मामलों में तकनीकी और संचार डेटा की तुलना जारी है।
5️⃣ क्या इस घटना से डॉक्टरों की विश्वसनीयता पर असर पड़ेगा?
विशेषज्ञों के अनुसार यह isolated केस है, लेकिन इससे पेशेवर क्षेत्र में सुरक्षा और नैतिक जिम्मेदारी को लेकर नए प्रश्न अवश्य उठे हैं।









