
ठाकुर के.के. सिंह की रिपोर्ट
फरह मथुरा न्यूज: मथुरा जिले के फरह कस्बे का परखम चौराहा इन दिनों जलभराव और सीवर जाम की मार झेल रहा है। गंदे पानी की झील में तब्दील यह सड़क अब स्थानीय नागरिकों के लिए जानलेवा खतरा बन चुकी है। समाचार दर्पण की टीम ने जब मौके का जायजा लिया तो पाया कि यहां न सफाई का नामो-निशान है और न ही जिम्मेदारी लेने वाला कोई विभाग। नगर पंचायत और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की खींचतान में जनता रोज सड़कों पर गंदे पानी से होकर गुजरने को मजबूर है।
फरह परखम चौराहे पर जलभराव से जनता बेहाल
समाचार दर्पण को मिले वीडियो फुटेज और तस्वीरों में साफ नजर आता है कि परखम चौराहे की सड़कें सीवर के ओवरफ्लो से डूबी हुई हैं। दुकानदारों और राहगीरों की मुश्किलें दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही हैं। प्रसिद्ध पप्पू लस्सी वाले और स्थानीय व्यापारी नेत्रपाल सिंह जादौन का कहना है कि “गंदगी और बदबू ने दुकानदारी चौपट कर दी है, ग्राहक अब यहां रुकना नहीं चाहते।”
सीवर का पानी सड़क पर बहता रहता है, जिससे आवागमन ही नहीं, जीवन तक दूभर हो चुका है। फरह मथुरा न्यूज की पड़ताल में सामने आया कि यह हालात कई महीनों से बने हुए हैं, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही ने स्थिति को विकराल बना दिया है।
नगर पंचायत और प्राधिकरण का जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ना
जब समाचार दर्पण ने नगर पंचायत चेयरमैन से इस पर सवाल किया, तो उन्होंने कहा कि “यह नाला राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण का है।” वहीं, एनएचएआई अधिकारियों ने पलटकर जवाब दिया कि “सफाई नगर पंचायत की जिम्मेदारी है।” नतीजा — जनता पानी में डूबी रहे और दोनों विभाग “NOC” के खेल में एक-दूसरे को दोष देते रहें।
फरह जलजमाव का यह मामला इस बात का जीता-जागता सबूत है कि प्रशासन की आपसी खींचतान किस तरह जनता के जीवन को नरक बना रही है।
सफाई व्यवस्था ठप, जेसीबी बनी सफेद हाथी
स्थानीय नागरिकों ने फरह मथुरा न्यूज को बताया कि नगर पंचायत की जेसीबी मशीन महीनों से यार्ड में खड़ी है। सफाई कर्मियों की उपस्थिति सिर्फ कागजों में दिखाई देती है। “सफाई के नाम पर खाना पूर्ति होती है, असल में कुछ नहीं,” यह कहना है दुकानदार सुरेश यादव का।
नाले में जमा कचरा और प्लास्टिक पूरे कस्बे की जलनिकासी को रोक रहे हैं। बारिश होते ही फरह की गलियां तालाब में बदल जाती हैं।
संक्रमण और बीमारियों का खतरा बढ़ा
समाचार दर्पण ने स्वास्थ्य विभाग से संपर्क किया, तो पता चला कि हाल के दिनों में बुखार, डेंगू और मलेरिया के केसों में तेजी आई है। गंदे पानी के कारण बच्चों और बुजुर्गों की हालत सबसे ज्यादा खराब हो रही है। डॉक्टरों का कहना है कि यदि जलभराव तुरंत नहीं हटाया गया तो फरह में संक्रामक बीमारियों का प्रकोप फैल सकता है।
गांव के लोगों ने बताया कि छोटे बच्चे रोज स्कूल जाते वक्त गंदे पानी में गिर जाते हैं। बावजूद इसके, प्रशासन आंख मूंदे बैठा है।
समाजसेवियों का फूटा गुस्सा
फरह के समाजसेवी और अधिवक्ता सुरेश सिंह चौहान ने फरह मथुरा न्यूज से कहा — “यह सीधी-सीधी प्रशासनिक नाकामी है। नगर पंचायत और प्राधिकरण दोनों अपनी जिम्मेदारी से भाग रहे हैं। जनता को मरने के लिए छोड़ दिया गया है।”
ठाकुर के.के. सिंह, जो फरह के प्रमुख समाजसेवी हैं, ने कहा — “वर्तमान चेयरमैन नगर में विकास की जगह अपने निजी व्यवसाय में व्यस्त हैं। जनता की कोई सुनवाई नहीं। उनके कार्यकाल में सफाई व्यवस्था पूरी तरह धराशायी हो चुकी है। पूर्व चेयरमैन के समय कम से कम गलियां साफ रहती थीं।”
एन.ओ.सी. का झोल, जनता फंसी बीच में
दोनों विभाग अपनी जिम्मेदारी तय करने की बजाय NOC का बहाना बना रहे हैं। नगर पंचायत कहती है – “हमें एनओसी दो, हम सफाई कराएंगे।” जबकि प्राधिकरण का कहना है – “हम निर्माण करेंगे, सफाई नगर पंचायत करेगी।”
इस पचड़े में सबसे ज्यादा परेशान आम जनता है। फरह मथुरा न्यूज बार-बार यह सवाल उठा रहा है — “कब तक जनता गंदे पानी में डूबती रहेगी और जिम्मेदार बहाने बनाते रहेंगे?”
फरह मथुरा न्यूज की चेतावनी
समाचार दर्पण स्पष्ट रूप से कहना चाहता है कि यदि प्रशासन ने तुरंत कार्यवाही नहीं की तो यह समस्या महामारी का रूप ले सकती है। जनता का सब्र अब टूट चुका है। जरूरत है कि नगर पंचायत और एनएचएआई मिलकर इस संकट का स्थायी समाधान निकालें।
समाचार दर्पण अपील करता है कि फरह के नागरिक अपनी आवाज बुलंद करें। यह सिर्फ गंदे पानी का नहीं, बल्कि नागरिक हक और स्वास्थ्य सुरक्षा का सवाल है।
समाचार दर्पण24.कॉम की यह ग्राउंड रिपोर्ट साफ दिखाती है कि प्रशासनिक लापरवाही और राजनीतिक उदासीनता ने फरह को जलभराव के दलदल में धकेल दिया है। जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, फरह के लोग “बिन वारिस पानी” में यूं ही डूबते रहेंगे।









