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आध्यात्मआयोजनउत्तर प्रदेशमथुरा

‘पहले सरकारों को देवस्थान में पूजा करने से सांप्रदायिकता का डर होता था अब नया भारत अंगड़ाई ले रहा है’

ब्रजनंदन पांडेय की रिपोर्ट

मथुरा। योगी आदित्यनाथ शाम करीब 4:58 बजे श्री कृष्ण जन्मस्थान पहुंचे। उन्होंने पहले केश‌वदेव के दर्शन किए और इसके बाद गर्भगृह में पहुंचकर ठाकुरजी के दर्शन किए। इसके बाद वह भागवत भवन पहुंचे और पूजन-अर्चना किया। यहां पर पुजारी ने उन्हें पगड़ी पहनाई और प्रसाद भेंट किया।

इससे पूर्व रामलीला मैदान में सभा में मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक सभी देव विग्रहों की पूजा-दर्शन करने में भी पहले की सरकारों को सांप्रदायिक होने का भय लगता था लेकिन अब प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में नया भारत अंगड़ाई ले रहा है। एक-एक करके सैकड़ों वर्षों से दबी हुई भावनाएं और आस्था के केंद्र अपने नए रूप में सामने आ रहे हैं।

कल वह राष्ट्रपति के साथ अयोध्या में थे। उन्होंने कहा कि आाजादी के बाद पहले राष्ट्रपति अयोध्या पहुंचे, जिन्होंने रामलला के दर्शन किए। प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी पहले प्रधानमंत्री थे, जिन्होंने रामलला के दर्शन किए। 

श्री कृष्ण जन्मोत्सव मनाने मथुरा पहुंचे सीएम योगी आदित्यनाथ विरोधी पार्टियों और पूर्व की सरकारों पर निशान साधने से नहीं चूके। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा कि जो लोग पहले मंदिर जाने में संकोच करते थे, अब कह रहे हैं कि राम और कृष्ण हमारे हृदय में हैं।

रामलीला मैदान में आयोजित भव्य समारोह में संबोधन के बाद मुख्यमंत्री ने कृष्णजन्म स्थान स्थित भागवत भवन में की पूजा-अर्चना भी की। उन्होंने ब्रज के विकास का संकल्प दोहराया और कहा कि ब्रज तीर्थ विकास परिषद संतों के सान्निध्य में है। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि पांच हजार वर्ष पुराने ब्रज जैसे धरोहर पर हम सभी को गौरव की अनुभूति होनी चाहिए। पूज्य संतों के आशीर्वाद से हम ब्रजपुरी में भौतिक विकास के साथ आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विकास पर भी पूरा ध्यान दे रहे हैं। इसी निमित्त संतों के नेतृत्व में ब्रज तीर्थ विकास परिषद का गठन किया गया है। यहां के सात धार्मिक स्थलों को पर्यटन स्थल घोषित किया है।

उन्होंने कहा कि प्रयागराज के ऐतिहासिक कुंभ के बाद ब्रज में संतों के आह्वान पर हुआ वैष्णव कुंभ भी सुव्यवस्था का नजीर बना। यह बांके बिहारी जी की कॄपा ही थी कि वैष्णव कुंभ में कोरोना किसी का बाल भी बांका न कर सका।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना ने पिछले डेढ़ साल में देश-दुनिया मे काफी कोहराम मचाया। अपना देश प्रदेश भी प्रभावित हुआ। प्रदेश में इसकी दूसरी लहर पूरी तरह नियंत्रण में है लेकिन सावधानी और सतर्कता जरूरी है। उन्होंने कहा कि अब बांके बिहारी जी से प्रार्थना है कि जैसे उन्होंने कई राक्षसों का संहार किया, उसी तरह इस कोरोना महामारी रूपी राक्षस का संहार करें।

उन्होंने कहा, “आज त्योहारों पर बधाई देने के लिए होड़ लगी है। पहले आपके पर्व-त्योहारों में बधाई देने के लिए न तो कोई मुख्यमंत्री आता था और न ही कोई मंत्री। लोग डरते थे कि उन्हें सांप्रदायिक न मान लिया जाए। पर्व-त्योहारों में बंदिशे लगती थीं। अलर्ट जारी होता था कि रात 12 बजे बाद कोई भी कार्यक्रम नहीं करेंगे। अब तो ऐसी कोई बंदिश नहीं है, भगवान श्रीकृष्ण का जन्म ही रात में 12 बजे होता है। अब तो हर्षोल्लास के साथ पर्व मनाया जाता है।”

मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “आजादी के बाद रामनाथ कोविंद पहले राष्ट्रपति हैं, जिन्होंने अयोध्या जाकर रामलला के दर्शन किए। इससे पहले सरकारों में बैठे लोगों को पूजा करने में भी सांप्रदायिकता का भय होता था। जो पहले मंदिर जाने में संकोच करते थे, अब कहते हैं राम और कृष्ण हमारे हृदय में हैं। पहले हिन्दू त्योहारों पर न बिजली होती थी न पानी, राजनीतिक परिवर्तन के बाद मिलने लगी।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले आपके (हिंदुओं के) पर्व और त्योहार पर बधाई देने के लिए न कोई मुख्यमंत्री आता था, न मंत्री और न विधायक आता था। भारतीय जनता पार्टी के जनप्रतिनिधियों को छोड़ दें तो शेष दलों के लोग दूर भागते थे। लोग डरते थे। हिंदू पर्व और त्योहारों में कोई नहीं आता था, सहभागी नहीं बनता था। पर्व और त्योहारों में बंदिशें अलग से रहती थीं। बिजली-पानी नहीं होते थे, सुरक्षा नहीं होती थी, सफाई नहीं रहती थी। अलर्ट जारी होता था कि रात 12 बजे के बाद आप कार्यक्रम नहीं करेंगे। रंगोत्सव का काय्रक्रम नहीं करेंगे। अब तो ऐसी बंदिश नहीं है, यह राजनीतिक परिवर्तन है।

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