
📰 अब्दुल मोबीन सिद्दीकी की रिपोर्ट
हमीरपुर, कुरारा। बेतवा नदी के बीहड़ों में जंगली सूअरों का अवैध शिकार (Wild Boar Hunting) रोकने के लिए वन विभाग ने सख्ती शुरू कर दी है। बुधवार को कुरारा थाना क्षेत्र के पारा गांव के जंगलों में वन विभाग की टीम ने छापेमारी कर दो शिकारियों को पकड़ा है। इनके पास से जंगली सूअर का मांस और एक कुल्हाड़ी बरामद हुई है। दोनों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (Wildlife Protection Act) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। इस कार्रवाई से हमीरपुर क्षेत्र में चोरी-छिपे शिकार करने वालों में हड़कंप मचा हुआ है।
सूचना पर पहुंची वन विभाग की टीम
वन दरोगा रोहित सिंह ने बताया कि सुबह करीब दस बजे सूचना मिली कि दो व्यक्ति पारा गांव के जंगल में जंगली सूअर का शिकार कर मांस बोरी में भरकर ले जा रहे हैं। इस पर वनरक्षक संजय कुमार के साथ टीम ने दबिश दी। रास्ते में साइकिल पर दो बोरी लेकर जाते हुए दो लोग दिखे। बोरी से खून टपकता देख टीम ने उन्हें रोका। पूछताछ में दोनों ने जंगली सूअर का शिकार करने की बात कबूल की।
टीम ने जब बोरी खोली तो उसमें करीब छह किलो सूअर का मांस मिला। साथ ही एक धारदार कुल्हाड़ी भी बरामद की गई। आरोपियों की पहचान शिवचरण कुशवाहा और कामता प्रजापति के रूप में हुई। दोनों जल्ला गांव (थाना कुरारा) के निवासी हैं।
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज
वन विभाग की तहरीर पर पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा-9, 39, 50 व 51 के अंतर्गत मुकदमा दर्ज कर लिया है। डीएफओ अनिल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि जंगली सूअर को शैड्यूल-II संरक्षित जीव की श्रेणी में रखा गया है। इसका शिकार पूरी तरह प्रतिबंधित है। दोषी पाए जाने पर सजा और जुर्माना दोनों का प्रावधान है।
कुरारा के जंगलों में जंगली सूअरों की भरमार
हमीरपुर-कुरारा क्षेत्र के बेतवा नदी किनारे बसे गांव — पारा, पतारा, बेरी और जल्ला — के जंगलों में जंगली सूअरों की बहुतायत है। किसान बताते हैं कि ये सूअर फसलों को भारी नुकसान पहुंचाते हैं। सर्दियों के मौसम में जंगली सूअर खेतों में घुसकर गेहूं, चना, आलू और सरसों की फसलों को उजाड़ देते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि दिन-रात चौकीदारी करनी पड़ती है फिर भी फसलों का नुकसान रुक नहीं पाता।
फसलें बर्बाद, किसान परेशान – लेकिन शिकार कानूनन अपराध
हालांकि किसान इन सूअरों से परेशान हैं, लेकिन कानून के तहत जंगली सूअर का शिकार करना अपराध है। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के अनुसार, शेड्यूल-II जीव का शिकार करने पर अधिकतम 7 वर्ष तक की सजा और ₹25,000 तक जुर्माना लगाया जा सकता है। इस वजह से कुरारा के ग्रामीणों को वन विभाग से अनुमति लिए बिना किसी प्रकार की कार्रवाई की अनुमति नहीं है।
वन विभाग की सख्ती से शिकारीयों में हड़कंप
इस कार्रवाई के बाद कुरारा और आसपास के इलाकों में शिकारियों में हड़कंप मच गया है। वन विभाग ने साफ किया है कि अब जंगली सूअर का शिकार करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। टीम ने बीहड़ों में गश्त बढ़ाने का भी निर्णय लिया है।
डीएफओ ने दी चेतावनी
डीएफओ अनिल कुमार श्रीवास्तव ने कहा — “जंगली सूअर का शिकार गैरकानूनी है। यह जीव पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। किसी को भी वन्यजीव का नुकसान करने की अनुमति नहीं है। दोषियों पर कठोर कार्रवाई होगी।”
वन विभाग की सलाह किसानों के लिए
- खेतों के चारों ओर मजबूत बाड़ या कांटेदार तार लगाएं।
- रात में फसलों की निगरानी के लिए सामूहिक चौकीदारी करें।
- जंगली सूअरों की गतिविधि की सूचना तुरंत वन विभाग को दें।
- कोई भी व्यक्ति स्वयं शिकार करने का प्रयास न करे, अन्यथा कानूनी कार्रवाई होगी।
पर्यावरणीय दृष्टि से जंगली सूअर का महत्व
विशेषज्ञों का कहना है कि जंगली सूअर जंगलों की मिट्टी को पलटते हैं जिससे नए पौधों को अंकुरण में मदद मिलती है। वे मृत जीवों को खाकर पर्यावरण की सफाई में भी भूमिका निभाते हैं। इसलिए इनका संरक्षण जरूरी है।
हमीरपुर के कुरारा क्षेत्र में जंगली सूअर का शिकार करने वाले दो शिकारियों की गिरफ्तारी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वन विभाग अब अवैध शिकार पर किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरतेगा। इस कार्रवाई से एक ओर जहां पर्यावरण संरक्षण को बल मिलेगा, वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों में कानून के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी।
सामान्य प्रश्न (FAQ)
1️⃣ क्या जंगली सूअर का शिकार करना अपराध है?
2️⃣ पकड़े गए आरोपियों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई?
3️⃣ क्या किसान खुद जंगली सूअर को मार सकते हैं?
— रिपोर्ट: न्यूज़ एस.डी. डिजिटल टीम, हमीरपुर ©समाचार दर्पण









