छत्तीसगढ़ में बड़ा हाथी रेस्क्यू ऑपरेशन : कुएं में गिरे इन बेजुबानों को जीवित बाहर निकाल लिया

हरीश चन्द्र गुप्ता की रिपोर्ट

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बलौदाबाजार (छत्तीसगढ़)। छत्तीसगढ़ हाथी रेस्क्यू की इस रोमांचक घटना ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। बारनवापारा अभयारण्य के हरदी गांव में सोमवार देर रात चार हाथी—दो वयस्क और दो शावक—एक पुराने खेत के खुले कुएं में गिर गए। ग्रामीणों की सतर्कता और वन विभाग छत्तीसगढ़ की त्वरित कार्रवाई से यह बलौदाबाजार हाथी रेस्क्यू एक बड़ी सफलता में बदल गया।

कैसे हुआ हादसा: कुएं में फंस गए जंगल के दिग्गज

रात के समय हरदी गांव के पास घूम रहे ये हाथी पानी की तलाश में खेत के किनारे पहुंचे। अंधेरा और फिसलन भरी मिट्टी के कारण हाथियों का झुंड अचानक करीब 15 फीट गहरे कुएं में गिर पड़ा। यह कुआं कई सालों से परित्यक्त था और उस पर कोई सुरक्षा दीवार नहीं थी। छत्तीसगढ़ हाथी रेस्क्यू टीम के अनुसार, शोर सुनकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और तुरंत वन विभाग छत्तीसगढ़ को सूचना दी।

मौके पर पहुंचते ही रेस्क्यू टीम ने Elephant Rescue in Chhattisgarh अभियान शुरू किया। दो जेसीबी मशीनें बुलाई गईं और रातभर चला बचाव अभियान चारों हाथियों को सुरक्षित निकालने में सफल रहा।

पांच घंटे चला ऑपरेशन: जेसीबी और मानवीय हौसले की जीत

वन अमले ने पहले कुएं के चारों ओर की मिट्टी को काटकर एक ढलाननुमा रास्ता बनाया। सबसे पहले दो शावक हाथियों को ऊपर चढ़ाया गया। इसके बाद एक मादा और एक नर वयस्क हाथी ने भी सुरक्षित बाहर निकलने का रास्ता पाया। पूरी प्रक्रिया में लगभग 5 घंटे का बलौदाबाजार हाथी रेस्क्यू चला।

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रेस्क्यू के दौरान ग्रामीणों और वन विभाग के बीच बेहतर तालमेल देखने को मिला। स्थानीय लोगों ने हाथियों के बाहर निकलने के बाद ढोल-नगाड़े बजाकर खुशियां मनाईं। Chhattisgarh Elephant Rescue टीम ने बताया कि सभी हाथी पूरी तरह स्वस्थ हैं और उन्हें जंगल की दिशा में भेज दिया गया है।

वन विभाग की सतर्कता ने बचाई जानें

वन विभाग छत्तीसगढ़ के अधिकारी ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से यह झुंड बारनवापारा अभयारण्य और आसपास के गांवों में घूम रहा था। विभाग को पहले से सूचना थी और लगातार निगरानी रखी जा रही थी। इस वजह से सूचना मिलते ही Elephant Rescue in Chhattisgarh टीम तुरंत सक्रिय हुई।

अधिकारियों ने बताया कि यह छत्तीसगढ़ हाथी रेस्क्यू ऑपरेशन तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि कुएं का किनारा काफी फिसलन भरा था और अंधेरे में काम करना जोखिम भरा था। टीम को स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों का भी पूरा सहयोग मिला।

हाथियों और इंसानों के बीच बढ़ता संघर्ष

विशेषज्ञों के अनुसार, Human-Wildlife Conflict छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में बढ़ रहा है। वन क्षेत्र सिमटने से हाथी अक्सर गांवों की ओर रुख कर रहे हैं। हरदी गांव हाथी घटना इसका ताजा उदाहरण है।

पिछले एक दशक में छत्तीसगढ़ में हाथियों का बचाव अभियान और मानव-हाथी संघर्ष दोनों बढ़े हैं। वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले पाँच वर्षों में राज्य के 22 जिलों में हाथियों के साथ टकराव की घटनाएं दर्ज हुई हैं। इसी कारण से सरकार ने Elephant Safety पर विशेष ध्यान देने की नीति अपनाई है।

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स्थानीय लोगों की भूमिका और जागरूकता

ग्रामीणों ने इस बार बेहतरीन सतर्कता दिखाई। जैसे ही हाथियों की चिंघाड़ सुनाई दी, उन्होंने बिजली बंद की, भीड़ नियंत्रित रखी और तुरंत विभाग को सूचना दी। यही कारण रहा कि बलौदाबाजार हाथी रेस्क्यू में किसी को चोट नहीं आई।

वन विभाग अब Elephant Rescue in Chhattisgarh जैसे अभियानों में ग्रामीण भागीदारी को प्रोत्साहित करने जा रहा है। विभाग ग्रामीणों को खुले कुएं ढकने, हाथियों के मार्ग चिन्हित करने और रात्रि गश्त बढ़ाने के लिए प्रेरित कर रहा है।

भविष्य की योजना और चेतावनी

वन अधिकारी ने बताया कि छत्तीसगढ़ हाथी रेस्क्यू जैसी घटनाओं से सबक लेकर अब अभयारण्य और उसके आसपास के गांवों में खुले कुएं और खतरनाक जगहों की पहचान कर सुरक्षित करने की योजना है। सभी पुराने कुएं पर चेतावनी बोर्ड लगाने और उनमें जाली लगाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

साथ ही, विभाग ने घोषणा की है कि Elephant Rescue in Chhattisgarh के लिए विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे, ताकि भविष्य में किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने में तेजी लाई जा सके।

घटना का असर और सोशल मीडिया पर चर्चा

सोशल मीडिया पर यह छत्तीसगढ़ हाथी रेस्क्यू वीडियो खूब वायरल हुआ। लोगों ने वन विभाग के प्रयासों की सराहना की। ट्विटर (X) और फेसबुक पर #ChhattisgarhElephantRescue, #BaranwaparaSanctuary जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे।

पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने इस घटना को “मानवता और संवेदना की मिसाल” बताया। वहीं कई विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि अब समय है कि छत्तीसगढ़ को “हाथी-अनुकूल राज्य” के रूप में विकसित किया जाए।

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क्या सीख मिली?

  • खुले कुओं और गड्ढों को ढकने की व्यवस्था तुरंत की जाए।
  • ग्रामीणों को हाथियों का बचाव अभियान और आपात स्थिति में संपर्क सूत्रों की जानकारी दी जाए।
  • प्रत्येक जंगल क्षेत्र में स्थायी Elephant Rescue Team तैनात की जाए।
  • मानव-हाथी सह-अस्तित्व के लिए व्यवहारिक नीति अपनाई जाए।

निष्कर्ष: यह छत्तीसगढ़ हाथी रेस्क्यू केवल एक सफल बचाव नहीं, बल्कि एक सीख भी है कि इंसान और प्रकृति के बीच संवेदनशील रिश्ता अब भी जिंदा है। चारों हाथियों का सुरक्षित निकलना इस बात का प्रमाण है कि जब इंसान प्रकृति के साथ मिलकर काम करे तो असंभव भी संभव हो जाता है।

सवाल-जवाब (FAQ)

1. छत्तीसगढ़ हाथी रेस्क्यू कहां हुआ?

यह घटना बलौदाबाजार जिले के बारनवापारा अभयारण्य के हरदी गांव में हुई।

2. कितने हाथियों को बचाया गया?

कुल चार हाथी—दो वयस्क और दो शावक—को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

3. रेस्क्यू ऑपरेशन में कितना समय लगा?

पूरा Elephant Rescue in Chhattisgarh ऑपरेशन करीब पांच घंटे तक चला।

4. हाथियों की स्थिति कैसी है?

सभी हाथी स्वस्थ हैं और उन्हें सुरक्षित रूप से जंगल की दिशा में भेज दिया गया।

5. भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?

वन विभाग ने सभी खुले कुओं की पहचान कर उन्हें सुरक्षित करने और ग्रामीणों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।

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