दलित महिला न्याय के लिए भटक रही, पुलिस पर आरोप — दबंगों से साठगांठ कर मामले को दबाया गया

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चित्रकूट के सीतापुर चौकी क्षेत्र में दलित महिला माया देवी का आरोप — 5 सितंबर को बकरा चोरी और मारपीट की घटना के बाद किसी ठोस कार्रवाई के बजाय उनकी शिकायत दबा दी गई। पीड़िता का कहना है कि स्थानीय दबंग और कोतवाली अधिकारियों के बीच साठगांठ के कारण उन्हें न्याय नहीं मिल रहा; परिवार पर डर और जान का खतरा है। मुख्यमंत्री से न्याय की गुहार।

मामला क्या है?

पीड़िता माया देवी के अनुसार घटना 5 सितंबर को हुई। उनका बकरा गलती से नगर पालिका के रैन बसेरा पार्किंग परिसर में चला गया था। आरोप है कि पार्किंग ठेकेदार धीरज त्रिपाठी और उसके साथियों ने बकरे को पकड़ कर छत पर कैद कर लिया और बकरे को छुड़ाने के एवज में पैसे की मांग की। जब माया देवी ने पैसे देने से इंकार किया तो आरोपियों ने गाली-गलौज और मारपीट शुरू कर दी।

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घबराकर महिला ने डायल 112 पर शांति-प्रहरियों को सूचित किया। मौके पर पहुंची पुलिस ने बकरे को छुड़वाकर तहरीर ली, लेकिन इसके बाद घटनाक्रम पूरी तरह उलट गया — पीड़िता के मुताबिक राजनीतिक दबाव में स्थानीय पुलिस ने मारपीट के मामले में उल्टा उनकी ओर से केस दर्ज कर दिया और आरोपी पक्ष के खिलाफ कोई गंभीर कार्रवाई नहीं हुई।

“सीओ राजापुर ने आरोपियों से पैसे लेकर साठगांठ कर ली है। इसलिए हमारी कोई सुनवाई नहीं हो रही। हर बार सिर्फ जांच का बहाना बनाया जाता है।” — माया देवी

न्याय की राह में रुकावटें

माया देवी ने जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक और डीआईजी तक गुहार लगायी, पर तब तक भी सुनवाई नहीं हुई। पीड़िता ने जांच अधिकारी व क्षेत्राधिकारी राजापुर पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं और कहा है कि दबंग व रसूखदार व्यक्ति अब उन्हें जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। उनके आस-पास रात में संदिग्ध लोग घूमते रहते हैं और परिवार दहशत में है।

आत्महत्या की चेतावनी: पीड़िता व परिवार ने कहा है कि वे कई महीनों से थक-हारे अधिकारियों के पास भटक रहे हैं; अगर न्याय नहीं मिला तो वे आत्महत्या करने को मजबूर हो जाएंगे — यह बयान स्थानीय स्तर पर संवेदनशील चिंता का विषय बन चुका है।

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क्या ‘मिशन शक्ति’ सिर्फ कागजों पर है?

यूपी पुलिस के ‘मिशन शक्ति’ जैसे अभियानों में महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के दावे बार-बार किए जाते रहे हैं। पर स्थानीय स्तर पर ऐसी शिकायतें यह संकेत देती हैं कि नीतिगत घोषणाओं और मैदान में लागू होने के बीच बड़ी दूरी बनी हुई है — खासकर तब जब स्थानीय रसूखदारों व राजनीतिक दबाव का आरोप उठे। निष्पक्ष जांच और पारदर्शिता की कमी से लोगों का भरोसा टूटता है।

दलित महिला के साथ अन्याय — जिम्मेदार कौन?

इस मामले में सीधे तौर पर कई पक्ष जिम्मेदार माने जा सकते हैं: आरोपियों पर तुरंत और पारदर्शी कार्रवाई न करने वाली स्थानीय पुलिस, शिकायतों को अनसुना करने वाले प्रशासनिक अधिकारी और ऐसा सामाजिक व राजनीतिक परिवेश जो दबंगों को संरक्षण देता हो। पीड़ित के पास उपलब्ध शिकायत-प्रमाण और सुरागों के आधार पर त्वरित, सार्वजनिक और पारदर्शी जांच ही इसे स्पष्ट कर सकती है।

क्या योगी सरकार तक पहुंचेगी माया देवी की गुहार?

माया देवी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भरोसा जताया और कहा कि वे सभी वर्गों की सुनवाई करते हैं। हालांकि, किसी भी शिकायत के मुख्यमंत्री स्तर तक पहुँचने और त्वरित कार्रवाई हो पाने के लिए औपचारिक रिपोर्टिंग चैनल, मीडिया कवरेज और अधिकारिक शिकायत पद्धति का सशक्त उपयोग आवश्यक है।

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स्थानीय प्रतिक्रिया

स्थानीय लोग कहते हैं कि यदि पुलिस निष्पक्ष रही होती तो मामले की सच्चाई पहले ही सामने आ चुकी होती। यह घटना न केवल एक व्यक्तिगत न्याय-संबंधी मसला है बल्कि कानून का भरोसा और कमजोर पड़ते संस्थागत तंत्र का प्रश्न भी है। ऐसे मामलों में तत्काल आवश्यकता है — निष्पक्ष जांच, झूठे/पक्षपातपूर्ण एफआईआर की समीक्षा और पीड़िता की सुरक्षा की गारंटी।

हमने संबंधित थाना व पुलिस अधिकारियों से प्रतिक्रिया के लिए संपर्क करने की कोशिश की पर उपलब्धता व जवाब मिलने की स्थिति पर त्वरित अपडेट प्रकाशित किया जाएगा। (यदि आपको मामले से सम्बन्धित कोई दस्तावेज़, तस्वीर या संपर्क जानकारी हो तो हमें भेजें — सत्यापन के बाद रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा।)

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रिपोर्टर: संजय सिंह राणा | स्थान: चित्रकूट, उत्तर प्रदेश

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