चित्रकूट जनपद में पिछले दो दिनों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और तेज़ हवाओं ने किसानों की ज़िंदगी पर कहर ढा दिया है। किसानों के खेतों में खड़ी और कटी दोनों फसलें पानी में डूब चुकी हैं। जिस फसल के सुनहरे बालों को देखकर किसान पूरे वर्ष उम्मीदें पालते हैं, वही अब कीचड़ में पड़ी सड़ रही है। गांव-गांव में खेतों से उठती सड़न की गंध, बहते बीजों की परत और निराश किसानों के चेहरे — यह दृश्य किसी दर्दनाक दस्तावेज़ से कम नहीं।
जनपद की चारों तहसीलों — मऊ, मानिकपुर, कर्वी और पहाड़ी — में शुक्रवार की सुबह से शुरू हुई बारिश अब भी थमी नहीं है। तेज़ हवाओं के साथ हो रही लगातार बारिश ने न सिर्फ धान की फसल को गिरा दिया है बल्कि खेतों की मिट्टी भी बहा दी है। खेतों में पानी भर गया है और वहां पड़ी फसलें अब सड़ने लगी हैं। कई किसानों ने बताया कि उनकी फसल कटाई के लिए तैयार थी, कुछ ने काट भी ली थी और उसे खेत में ही सुखाने के लिए रख छोड़ा था। अब वही फसल पानी में डूबकर खराब हो गई है।
मऊ तहसील के खजुरिया कला गांव में हालात सबसे गंभीर हैं। यहां खेत पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं। धान की लहराती फसल अब कीचड़ में बिछी पड़ी है। गांव के किसान रामशरण बताते हैं — “हमने पूरी मेहनत से यह फसल उगाई थी। दो दिन पहले तक सोचा था कि अब कटाई कर लेंगे, पर बारिश ने सब बर्बाद कर दिया। जो धान गिर गई है, वह अब खड़ी नहीं हो पाएगी। बीज झड़ गए हैं, और जो कटी पड़ी थी, वह पानी में सड़ रही है।”
“अब खेत में जाकर मन रोने लगता है। महीनों की मेहनत, खर्चा, पसीना — सब बेकार गया। बारिश रुकने का नाम नहीं ले रही।”
— किसान रामशरण, खजुरिया कला, चित्रकूट
चित्रकूट में इस बार धान की फसल उम्मीद से कहीं बेहतर थी। किसानों ने भारी लागत लगाकर बीज, खाद, डीज़ल और मजदूरी पर खर्च किया था। लेकिन अब बारिश और हवा ने सब चौपट कर दिया है। कई खेतों में पानी इतना भर गया है कि किसान अपने खेतों तक पहुंच भी नहीं पा रहे। जो खेत ऊँचे हैं वहां धान झुककर गीली मिट्टी में दब गई है, और निचले खेतों में पूरी फसल डूब चुकी है। किसानों का कहना है कि इस नुकसान से उबरने में उन्हें पूरे साल लग जाएगा।
तेज़ हवाओं के चलते खेतों की मेड़ें टूट गई हैं, कई जगहों पर छोटे तालाबों का पानी खेतों में घुस आया है। कुछ किसानों ने बताया कि उनकी धान की मंड़ाई हो चुकी थी, लेकिन वे फसल को घर तक नहीं ले जा पाए। अब वह सारा अनाज खेत में ही गल रहा है। गांवों में हालात इतने खराब हैं कि लोगों ने खेतों से बची फसल निकालने की कोशिश तक छोड़ दी है। कई किसानों ने रात भर खेतों में जाकर बोरियों में धान भरने की कोशिश की, मगर बारिश और कीचड़ के चलते वे सफल नहीं हो पाए।
इस आपदा से सिर्फ फसल ही नहीं, किसानों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी भी प्रभावित हुई है। गांवों के रास्ते कीचड़ से पट गए हैं, पशुओं के चारे की दिक्कत बढ़ गई है, और जिन परिवारों का सारा सहारा धान की फसल थी, अब वे अपने घरों में बैठकर चिंता में डूबे हैं। कई किसान बताते हैं कि वे रबी सीजन की तैयारी भी नहीं कर पाएंगे, क्योंकि खेतों से पानी निकलने में कई दिन लगेंगे।
“फसल का 80 प्रतिशत हिस्सा बर्बाद हो गया है। बीमा तो कराया था, लेकिन भुगतान कब मिलेगा — यह किसी को नहीं पता।”
— शंकर लाल, किसान, मानिकपुर
कृषि विभाग के अधिकारियों ने माना है कि जिले के अधिकांश हिस्सों में धान की फसल को भारी नुकसान हुआ है। कृषि अधिकारी के अनुसार, जिन किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा कराया है, उन्हें नियमों के अनुसार मुआवज़ा दिलाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। वहीं जिन किसानों ने बीमा नहीं कराया, उनकी फसलों का सर्वे कराकर अन्य राहत योजनाओं के तहत मदद की जाएगी। राजस्व विभाग की टीमें भी प्रभावित गांवों में जाकर नुकसान का आकलन कर रही हैं।
बारिश से नुकसान का यह मंजर चित्रकूट ही नहीं, बल्कि पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र के किसानों के लिए चिंता का विषय बन गया है। धान की कटाई के इस अहम समय में हुई बरसात ने कृषि चक्र को अस्त-व्यस्त कर दिया है। अब किसान न तो अपनी फसल बेच पा रहे हैं, न अगली बुवाई की तैयारी कर पा रहे हैं। आसमान में छाए बादल अब किसी वरदान की तरह नहीं, बल्कि डर और निराशा की तरह महसूस हो रहे हैं।
स्थानीय सामाजिक संगठनों और स्वयंसेवकों ने प्रशासन से अपील की है कि प्रभावित किसानों के लिए तत्काल राहत और बीज सहायता की व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि अगर स्थिति पर जल्द नियंत्रण नहीं हुआ, तो अगले मौसम की बुवाई भी संकट में पड़ जाएगी। गांवों में कई जगह किसानों ने छोटे-छोटे समूह बनाकर फसल बचाने के उपायों पर चर्चा शुरू कर दी है, लेकिन लगातार हो रही बारिश उनके हर प्रयास को नाकाम कर रही है।
अब जब आसमान में बादल गहराते हैं, किसान खेत नहीं देखते — वे अपने टूटते सपनों को याद करते हैं। किसी के लिए यह बस बारिश है, लेकिन चित्रकूट के किसानों के लिए यह आफत की बारिश है, जो उनकी सालभर की मेहनत, आशा और आजीविका सब कुछ अपने साथ बहा ले गई।
— संवाददाता, चित्रकूट
💬 सवाल-जवाब: चित्रकूट में बारिश से फसल को नुकसान पर किसानों की पुकार
❓ चित्रकूट में बारिश कब से हो रही है और कितनी तेज़ है?
चित्रकूट जनपद में शुक्रवार सुबह से लगातार बारिश हो रही है। तेज़ हवाओं के साथ मूसलाधार वर्षा का यह सिलसिला दो दिनों से जारी है। कई स्थानों पर हवा की रफ्तार इतनी तेज़ रही कि खेतों में खड़ी धान की फसल झुककर गिर गई और खेतों की मिट्टी तक बह गई।
❓ बारिश से सबसे अधिक नुकसान किन क्षेत्रों में हुआ है?
जनपद की चारों तहसीलों — मऊ, मानिकपुर, कर्वी और पहाड़ी — में बारिश का असर देखा गया है। इनमें से मऊ तहसील का खजुरिया कला गांव सबसे अधिक प्रभावित है, जहां लगभग सभी खेत जलमग्न हैं और धान की फसल पूरी तरह चौपट हो चुकी है।
❓ किसानों को इस बारिश से कितना नुकसान हुआ है?
किसानों के अनुसार उनकी 70 से 80 प्रतिशत तक की फसल बर्बाद हो गई है। खड़ी फसल झुककर गिर गई है, और जो कटी पड़ी थी, वह पानी में सड़ गई है। कई किसानों ने बताया कि वे अब रबी सीजन की तैयारी भी नहीं कर पाएंगे क्योंकि खेतों से पानी निकलने में कई दिन लगेंगे।
❓ किसानों की क्या स्थिति है और वे क्या कह रहे हैं?
किसानों का कहना है कि यह बारिश उनके लिए किसी आपदा से कम नहीं। कई किसान अपने खेतों में जाकर फसल बचाने की कोशिश कर चुके हैं, लेकिन लगातार होती बरसात और कीचड़ के कारण सब व्यर्थ चला गया। एक किसान रामशरण कहते हैं — “अब खेत में जाकर मन रोने लगता है। महीनों की मेहनत, खर्चा, पसीना — सब बेकार गया।”
❓ क्या सरकार या प्रशासन की ओर से कोई मदद मिलेगी?
कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया है कि जिन किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा कराया है, उन्हें नियमों के अनुसार मुआवज़ा दिया जाएगा। वहीं जिन किसानों ने बीमा नहीं कराया, उनके लिए राजस्व और कृषि विभाग की टीमें नुकसान का सर्वे कर रही हैं ताकि अन्य राहत योजनाओं के तहत उन्हें सहायता मिल सके।
❓ क्या यह बारिश भविष्य की फसल पर भी असर डालेगी?
हां, लगातार हो रही बारिश और खेतों में भरे पानी के कारण रबी सीजन की बुवाई पर भी असर पड़ेगा। खेतों की मिट्टी गीली और कमजोर हो गई है, जिससे गेहूं जैसी फसलों की बुवाई में देरी होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अगले कुछ दिनों में मौसम सामान्य नहीं हुआ, तो किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ेगी।
❓ स्थानीय लोग प्रशासन से क्या मांग कर रहे हैं?
स्थानीय सामाजिक संगठनों और स्वयंसेवकों ने प्रशासन से तत्काल राहत वितरण, मुफ्त बीज, और बर्बाद फसलों के मुआवज़े की मांग की है। उन्होंने कहा है कि जिन किसानों के पास अब कुछ भी नहीं बचा, उनके लिए अस्थायी सहायता और खाद्य सुरक्षा की व्यवस्था की जानी चाहिए।
❓ क्या किसानों को दोबारा खेती करने की उम्मीद है?
किसान अब भी उम्मीद नहीं छोड़ना चाहते। कई गांवों में किसान अपने साथियों के साथ मिलकर खेतों से पानी निकालने की कोशिश कर रहे हैं। उनका कहना है कि “मौसम चाहे जैसा हो, खेती छोड़ना हमारे बस में नहीं।” हालांकि उनके चेहरों पर थकान और निराशा साफ झलकती है।
—संजय सिंह राणा, चित्रकूट









