
सदानंद इंगिली की रिपोर्ट
गढ़चिरौली/सिरोंचा: महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले के सिरोंचा तालुका में पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही बेमौसम बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। इस अनियंत्रित बारिश ने धान, कपास और मिर्च की फसलों को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। खेत जलमग्न हैं, फसलें सड़ने लगी हैं और किसानों के लिए अपनी लागत निकालना अब मुश्किल हो गया है।
पिछले तीन दिनों से गढ़चिरौली जिला और विशेष रूप से सिरोंचा तालुका तूफान और बेमौसम बारिश की मार झेल रहा है। यह क्षेत्र मुख्य रूप से कृषि प्रधान है और यहां के अधिकांश किसान कपास, धान और मिर्च की खेती पर निर्भर हैं। परंतु इस बार की बेमौसम बारिश ने सबकुछ तहस-नहस कर दिया है।
“सफेद सोना” कपास की फसल को बेमौसम बारिश से भारी नुकसान
सिरोंचा तालुका को कपास उत्पादन के लिए जाना जाता है। यहां की कपास को किसान “सफेद सोना” कहते हैं, लेकिन इस साल यह सोना काला पड़ गया है। बारिश के कारण कटी हुई कपास पूरी तरह भीग गई है, जिससे वह काली पड़कर खराब हो रही है। तापमान बढ़ने पर इन फसलों में कीड़े लगने की संभावना बढ़ जाती है, जिससे उत्पादन और गुणवत्ता दोनों पर असर पड़ता है।
कपास के साथ-साथ धान की फसल भी पूरी तरह जलमग्न हो चुकी है। लगातार हो रही वर्षा के कारण धान की बाली झुक गई है और खेतों में पानी भर जाने से पौधों की जड़ें सड़ने लगी हैं। इससे किसान अब अपनी मेहनत की कमाई को लेकर बेहद चिंतित हैं।
धान और मिर्च की फसल पर भी बेमौसम बारिश का कहर
सिरोंचा तालुका के करसपल्ली, नारायणपुर, मेदाराम, रंगय्यापल्ली, अमरावती, टेकडा, रेगुंठा, मोयाबिनपेठा, नरसिंहपल्ली, कोटापल्ली, असराली और अंकिसा जैसे गांवों में बड़े पैमाने पर धान और मिर्च की खेती की जाती है। लेकिन इस बार की बेमौसम बारिश ने यहां की मिर्च की फसल को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। दो महीने पहले बोई गई मिर्च की फसल अब गलने लगी है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक झटका लगा है।
धान की फसल जहां जलभराव की वजह से सड़ रही है, वहीं कपास के फूल झड़ने लगे हैं। मिर्च की फसल में कीट और फफूंदी का हमला बढ़ गया है। इससे कृषि उत्पादन में कमी और किसानों की आय में भारी गिरावट की आशंका है।
किसानों की मांग — तुरंत पंचनामा और मुआवजे की घोषणा करे सरकार
सिरोंचा तालुका के किसानों ने सरकार से मांग की है कि तत्काल एक टीम गठित कर खेतों का निरीक्षण किया जाए और नुकसान का पंचनामा तैयार किया जाए। किसानों का कहना है कि इस आपदा ने उनकी खरीफ सीजन की पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया है, इसलिए सरकार को मुआवजा घोषित करना चाहिए और तालुका को सूखाग्रस्त क्षेत्र घोषित करना चाहिए।
किसानों ने यह भी कहा कि मौसम की इस अनियमितता से उन्हें हर महीने किसी न किसी रूप में नुकसान उठाना पड़ रहा है। पहले सूखा, फिर बेमौसम बारिश, और अब तूफान — इन सबने खेती को घाटे का सौदा बना दिया है।
खेती पर बेमौसम बारिश का असर: एक नजर में
- धान की फसल जलमग्न होकर सड़ने लगी।
- कपास की फसल भीगने से काली पड़ गई और कीटों का प्रकोप बढ़ा।
- मिर्च की फसल में फफूंदी और कीट का हमला।
- कृषि उत्पादन में 50-60% तक की गिरावट की संभावना।
- किसानों के लिए लागत निकालना भी मुश्किल।
स्थानीय प्रशासन की भूमिका और किसानों की उम्मीदें
स्थानीय प्रशासन ने अभी तक कृषि विभाग की रिपोर्ट आने का इंतजार किया है। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारियों को जल्द ही सर्वे शुरू करना चाहिए ताकि किसानों को राहत मिल सके।
कई किसान संगठनों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है, जिसमें फसल बीमा योजना के तहत तत्काल मुआवजा देने की मांग की गई है। साथ ही, किसानों ने यह भी कहा है कि इस बार सरकारी मदद के बिना जीना मुश्किल हो जाएगा।
🟢 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
सवाल 1: सिरोंचा तालुका में किस फसल को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है?
सिरोंचा तालुका में कपास और धान की फसलों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। कपास भीगकर काली पड़ गई है और धान के खेत जलमग्न हो गए हैं।
सवाल 2: क्या किसानों को मुआवजा मिलेगा?
किसानों ने सरकार से मांग की है कि तुरंत पंचनामा कर नुकसान का आकलन किया जाए और फसल बीमा योजना के तहत मुआवजा दिया जाए।
सवाल 3: किन गांवों में फसल का सबसे ज्यादा नुकसान हुआ?
करसपल्ली, नारायणपुर, मेदाराम, रंगय्यापल्ली, अमरावती, टेकडा, रेगुंठा, मोयाबिनपेठा, नरसिंहपल्ली, कोटापल्ली और असराली में फसलों को भारी नुकसान हुआ है।
सवाल 4: सिरोंचा तालुका की मुख्य फसलें कौन सी हैं?
मुख्य रूप से कपास, धान और मिर्च की खेती होती है, जिन्हें बेमौसम बारिश ने इस बार बुरी तरह प्रभावित किया है।
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