धर्मविचार

आखिर अल्पसंख्यक आयोग और मंत्रालय की जरूरत क्यों ?

संजीव कुमार 

देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय नरसिम्हा राव ने दो बहुत भारी गलतियां की। पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव जी को यह भी गौरव प्राप्त है कि उन्होंने अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिरने दिया हम भी ऐसा ही मानते थे पहले यह बताया गया कि सनातन हिंदू धर्म के रावजी बड़े प्रेमी थे।

अयोध्या का बाबरी मस्जिद मामला उस समय सुप्रीम कोर्ट के निरीक्षण में था। उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री कल्याण सिंह जी ने सुप्रीम कोर्ट को लिखित आश्वासन दिया था और मस्जिद गिर गई।

दोनों बातें हैं, तत्कालीन प्रधानमंत्री का सहयोग था और नहीं भी था क्योंकि उसके बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री ने उत्तर प्रदेश सहित तीन और राज्य सरकारों को बर्खास्त कर दिया जो निर्दोष थी।

इन सब के बावजूद अगर नरसिंह राव जी के दिल में जरा सा भी सनातन धर्म का प्रेम होता तो उन्होंने कभी भी सनातन धर्म को विखंडित करने का कार्य न किया होता। नरसिंहा राव जी ही प्रधानमंत्री थे जिन्होंने बौद्ध सिख और जैन को हिंदुओं से अलग कर दिया और इन तीनों को अलग धर्म की मान्यता दे दी जिससे यह सब सनातन धर्म से अलग हो गए।

इससे भी बड़ी गलती उन्होंने यह कर दी कि 1992 में ही अल्पसंख्यक आयोग का गठन कर दिया नहीं तो उसके पहले कोई भी संवैधानिक निकाय नहीं था।

जो अभी काम अधूरा था उसको 2006 में मनमोहन सिंह जी ने पूरा कर दिया और नया अल्पसंख्यक मंत्रालय अस्तित्व में आ गया। 2006 के पहले देश में अल्पसंख्यक मंत्रालय नहीं था। 2014 से नरेंद्र मोदी जी प्रधानमंत्री हैं। वह अल्पसंख्यक मंत्रालय भी खत्म नहीं कर पाए और अल्पसंख्यक मंत्री आज भी हैं।

यह बात अलग है कि 2017 में अल्पसंख्यक आयोग में एक भी सदस्य नहीं था। अध्यक्ष उपाध्यक्ष की बात छोड़ दें तब दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकार लगाई आज की तिथि में अल्पसंख्यक आयोग में केवल 1 सदस्य हैं। मोदी सरकार को इस असंवैधानिक आयोग को समाप्त कर देना चाहिए।

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ है। कई मंत्रालय योगी जी ने खत्म कर दिया परंतु अल्पसंख्यक मंत्रालय खत्म नहीं कर पाए, जबकि अल्पसंख्यक मंत्रालय स्वतंत्रता के समय से नहीं था। देश की स्वतंत्रता के 59 साल बाद अल्पसंख्यक मंत्रालय बना परंतु योगी जी भी खत्म नहीं किए ना तो राज्य अल्पसंख्यक आयोग खत्म किए।

कांग्रेस हर काम कर देती थी परंतु भाजपा ऐसी पार्टी है जो कोई कार्य नहीं कर पाती जबकि इन सारी बातों पर रोक लगना जरूरी है।

नोट- ये लेखक के अपने निजी विचार हैं।

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