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संपादकीय

अब “भारत रत्नों” की जांच….

– अनिल अनूप

प्रधान संपादक

लता मंगेशकर और सचिन तेंदुलकर को भारत या एशिया ही नहीं, पूरी दुनिया जानती-पहचानती और उनका सम्मान करती है। दोनों ही महान हस्तियों को भारत सरकार ने सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत-रत्न’ से नवाजा है। यकीनन यह अप्रतिम उपलब्धि और मान्यता है। लता दीदी ने 20 भाषाओं में करीब 30,000 गाने गाए हैं। उन्हें 1974 में ही ‘गिनीज़ बुक ऑफ  वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ में दर्ज किया गया और सम्मानित भी किया। एक और महान तथा अभूतपूर्व उपलब्धि…! लता जी एक संपादकीय आलेख का विषय नहीं हैं। वह एक किताब नहीं, महाकाव्य की रूपक हैं। सिर्फ  एक प्रसंग ही उनकी शख्सियत को सत्यापित करता है। 1962 में भारत-चीन युद्ध के बाद लता जी ने एक गीत गाया था-‘ऐ मेरे वतन के लोगो! जरा आंख में भर लो पानी…।’ उस समारोह में देश के प्रथम और तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू भी मौजूद थे। गीत सुनकर उनकी आंखें भी छलक उठीं। वह समारोह एक ऐतिहासिक दस्तावेज है। लताजी के अलावा ‘शतकों के शतकवीर’ सचिन तेंदुलकर का उल्लेख करते हैं, जिनके नाम क्रिकेट में बल्लेबाजी के तमाम बड़े कीर्तिमान दर्ज हैं। एक ही खेल में, जीवन की छोटी-सी उम्र में, 100 महान शतक…! अभूतपूर्व, अतुलनीय, अकल्पनीय कीर्तिमान..! गौरतलब यह है कि उन्हें ‘भारत-रत्न’ से सम्मानित करने के लिए कांग्रेस नेतृत्व की यूपीए सरकार को संविधान में संशोधन करना पड़ा था। उससे पहले खेल में ‘भारत-रत्न’ देने का नियम नहीं था। उसी सरकार ने सचिन को राज्यसभा के लिए मनोनीत किया था। दुर्भाग्य और विडंबना है कि उसी कांग्रेस के एक अनाम कार्यकर्ता की शिकायत पर ‘भारत-रत्नों’ के अलावा कुछ और महान, लोकप्रिय हस्तियों के खिलाफ  भी जांच बिठाई गई है। यह हरकत महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार ने की है, जो खुद एक फर्जी और गैर-जनादेशीय सरकार है। बेशक सरकार को शपथ दिलाई गई है, लेकिन देश जानता है कि चुनाव के बाद महाराष्ट्र का जनादेश क्या था? बहरहाल लता मंगेशकर, सचिन तेंदुलकर, अक्षय कुमार, अजय देवगन, विराट कोहली और साइना नेहवाल आदि के खिलाफ जांच शुरू की गई है, क्योंकि उन्होंने भारत के खिलाफ  ट्वीट करने वाले विदेशी चेहरों को मुंहतोड़ जवाब दिया था। उन सभी महान भारतीय हस्तियों ने सार-रूप में भारत की संप्रभुता, एकता, अखंडता की बात करते हुए ‘भारतीय’ होने का गौरवमय दायित्व निभाया था। हमने उनके ट्वीट देखे हैं और उनकी भाषा, भावना और पीड़ा को भी समझने की कोशिश की है। बेशक ये सभी भारतीय हस्तियां ‘भारत-रत्न’ से सम्मानित नहीं हैं, लेकिन उन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में जो असीमित सफलताएं हासिल की हैं, उपलब्धियों के जो शिलालेख लिखे हैं, उनके मद्देनजर वे हमारे लिए ‘भारत-रत्न’ ही हैं।  पॉप गायिका रिहाना, पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा और पॉर्न स्टार मिया खलीफा आदि विदेशियों के हमारे राष्ट्रीय, आंतरिक मामलों में दखल के पलटजवाब क्यों नहीं देने चाहिए थे? यह करके इन ‘भारत-रत्नों’ ने क्या अपराध किया है? कौन-सी आपराधिक साजि़श की है? यदि भारत सरकार के पक्ष में उनके बयान ध्वनित हुए हैं, तो वह कौन-सा अपराध है? महाराष्ट्र भी तो भारत का ही एक राज्य है। यदि सभी पक्षों ने, जिसमें विदेश मंत्रालय भी शामिल है, भारत की संप्रभुता और एकजुटता की बात कही है, तो ठाकरे सरकार किन तथ्यों की खुफिया जांच कराएगी और उस जांच का हासिल क्या होगा? क्या ठाकरे सरकार यह जांच कराने का दुस्साहस कर सकती है कि कहीं मोदी सरकार के दबाव में तो इन हस्तियों ने ट्वीट नहीं किए? क्या इस उम्र और उपलब्धियों के मुकाम हासिल करने वाली इन हस्तियों पर कोई दबाव भी दे सकता है और दबाव में कुछ भी लिखवाया जा सकता है? अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की ठाकरे सरकार की व्याख्या को भी संविधान में शामिल कर लिया जाए, यह हमारा विनम्र सुझाव है। सवाल यह भी है कि जांच का निष्कर्ष क्या होगा? क्या जांच के बाद इन ‘भारत-रत्नों’ को सजा भी सुनाई जा सकती है? अब लगता है कि अभिव्यक्ति की आज़ादी भी ‘परजीवियों’ को है, देश की महान हस्तियों को नहीं है। इस दुस्साहस का फलितार्थ भी कांग्रेस को भुगतना पड़ेगा। हम तो इतना ही कह सकते हैं- वतन के लिए बोलने वालों का, यही बाकी निशां होगा।

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