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अपराधसमाचार समीक्षा

जेल के अंदर भी गैंगवार और जेल के बाहर भी गैंगवार, प्रदेश में कहां है कोई कानून व्यवस्था…..

अनिल अनूप की खास रिपोर्ट

चित्रकूट जेल में हुई जघन्य घटना में सुरक्षा बंदोबस्त में बड़ी लापरवाही सामने आई है। अधिकारियों का कहना है कि जेल में पिस्टल कैसे पहुंची, यह अभी पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो सका है। घटना की न्यायिक जांच होगी, जिसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। घटना में चित्रकूट पुलिस एफआइआर दर्ज कर रही है। पुलिस विवेचना में कई तथ्य पूरी तरह से स्पष्ट हो सकेंगे।

यूपी के चित्रकूट जेल हत्याकांड मामले में योगी सरकार ने कार्रवाई की है। जेल के अंदर गोलीबारी और हत्या के बाद चित्रकूट जेल के जेलर और जेल अधीक्षक को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही विभागीय कार्रवाई के भी आदेश दिए गए हैं। शुक्रवार को चित्रकूट जेल में गैंगवार में दो अपराधी मारे गए थे। तीसरा कैदी पुलिस की गोली से मारा गया था। 

फिलहाल, अशोक कुमार सागर को चित्रकूट का नया जेल अधीक्षक बनाया गया है। वहीं, सीपी त्रिपाठी चित्रकूट जेल के नए जेलर बनाए गए। डीआईजी जेल प्रयागराज संजीव त्रिपाठी को अयोध्या डीआईजी का भी चार्ज दिया गया, जबकि शैलेंद्र कुमार मित्रेय को डीआईजी जेल लखनऊ का चार्ज दिया गया है।

उधर, इस मामले में चित्रकूट प्रशासन का कहना है कि जेल में बंद अंशु दीक्षित ने मुकीम और मेराज अली की गोली मारकर हत्या कर दी। इसके बाद उसने 5 कैदियों को बंधक बना लिया। इस दौरान जेल प्रशासन ने अंशु से कैदियों को छोड़ने की अपील की, लेकिन वह नहीं माना। जिसके बाद पुलिस और अंशु के बीच मुठभेड़ हुई, जिसमें अंशु भी मारा गया। यानी कि चित्रकूट जेल में शुक्रवार को तीन अपराधी मारे गए, दो गैंगवार में और एक पुलिस से मुठभेड़ में।

विपक्षी दलों ने योगी सरकार को घेरा

समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता अनुराग भदौरिया ने मामले को लेकर कहा

उत्तर प्रदेश में कोई भी, कभी भी, कहीं भी, किसी को भी ठोक सकता है, क्योंकि उत्तर प्रदेश में जंगल और गुंडाराज चल रहा है। यहां पर कानून व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं है। जेलों में, जो बड़े-बड़े माफिया बंद हैं, उनके पास जेल के अंदर असलहा पहुंच जाते हैं और गैंगवार हो जाती है। जेल के अंदर भी गैंगवार और जेल के बाहर भी गैंगवार, तो उत्तर प्रदेश में कहां कोई कानून व्यवस्था है, यहां तो सिर्फ जंगलराज चल रहा है।

कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने भी जेल में हुई गोलीबारी को लेकर कहा है

उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जेल के अंदर हुआ शूटआउट, उत्तर प्रदेश में जंगलराज की पराकाष्ठा व्यक्त करने में पूर्ण है. उत्तर प्रदेश सरकार अपना इकबाल खो चुकी है और अपराधी जेल के अंदर हथियार लेकर जा रहे हैं. कोई कानून व्यवस्था नहीं है। एक अपराधी दूसरे अपराधी को मारता है और कहा जा रहा है कि दूसरे अपराधी को पुलिस ने मार कर प्रकरण ही खत्म कर दिया। सुबूत नष्ट कर दिए. यह क्या हो रहा है उत्तर प्रदेश में?

कौन था मुकीम?

शामली के जहानपुरा में रहने वाला मुकीम शुरुआत में छोटी मोटी वारदातों को अंजाम देता था। बाद में उसने शातिर कग्गा गैंग ज्वाइन किया था। इसके बाद में वह खुद गिरोह का सरगना बन गया। अपने गैंग के साथियों की मदद से वह हरियाणा, पश्चिम उत्तर, दिल्ली और उत्तराखंड में अपराधों को अंजाम देने लगा।

मुकीम काला के गैंग ने 15 फरवरी 2015 को सहारनपुर के तनिष्क ज्वेलरी शोरूम में डकैती की थी। उसी दरमियान सहारनपुर के तीतरो में दो सगे भाइयों की हत्या और सहारनपुर में सिपाही राहुल ढाका की हत्या कर दी थी। बाद में 20 अक्तूबर 2015 को एसटीएफ ने मुकीम और उसके शार्प शूटर साबिर जंधेड़ी को गिरफ्तार किया था।

मुकीम पर 50 करोड़ से अधिक की लूटपाट और अनगिनत हत्याओं का आरोप था। 2015 में मुकीम की गिरफ्तारी को लेकर कई तरह की चर्चाएं रहीं। कहा जाता है कि मुकीम को पश्चिम उत्तर प्रदेश के कई राजनेताओं की शह मिली हुई थी। जिसके कारण वह लगातार अपराध की दुनिया में आगे बढ़ता रहा और पुलिस ने भी उसके ऊपर हाथ डालने की कोशिश नहीं की।

सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए कारागार के अधीक्षक और जेलर को निलंबित कर दिया गया है। वहीं, जेलर महेंद्र पाल पर विभागीय कार्रवाई करने का भी आदेश जारी किया है। बता दें, घटना के बाद हुई जांच में जेल अधीक्षक को पहली नजर में दोषी पाया गया है। उन्हें दायित्यों के प्रति उदासीन, कर्तव्य विमुखता के साथ प्रशासनिक अक्षमता का दोषी करार दिया गया है।

होगी विभागीय कार्रवाई

जेल के दोनों पुलिस अधिकारियों के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली-1999 के नियम 7 के तहत कार्यवाही की जा रही है। इसके साथ ही, निलंबित जेल अधिकारियों की जगह पर कासगंज में तैनात अशोक सागर और और अयोध्या में तैनात सीपी त्रिपाठी को नियुक्त किया गया है। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि उनपर जरूरी विभागीय कार्रवाई होगी।

अंशू बन गया था आतंक का पर्याय

अंशू का आतंक जेल तक ही नहीं लोगों के बीच भी बरसों से मौजूद था। करीब बीस साल पहले सीतापुर के पूर्व सपा एमएलसी भरत त्रिपाठी के पुत्र परिक्षित त्रिपाठी से किसी बात को लेकर अंशू की बातचीत हुई। इसके बाद उसने जुर्म की दुनिया में ही कदम रख दिया। आंख अस्पताल चौराहे के करीब पिता जगदीश दीक्षित की कापी-किताब की दुकान बंद हो गई और अंशू कुछ दिन के लिए अपने पैतृक गांव महोली के बढ़इया गांव चला गया फिर उसका संपर्क लखनऊ के कुछ छात्रा नेताओं से हुआ। यहां एक छात्र नेता की हत्या में इसका नाम आया फिर लगातार घटनाएं होती रहीं।

दस वर्ष पूर्व बिहार जेल में रहकर अंशू ने फोन पर शहर के प्रमुख भट्टा व्यवसाई जगदीश उर्फ जग्गी से रंगदारी मांगी, इसको लेकर अंशू के विरुद्ध कोतवाली नगर में अभियोग पंजीकृत हुआ। विधिक प्रक्रिया के तहत अंशू को बिहार से लखनऊ जेल लाया गया। 17 अक्टूबर वर्ष 2013 में इसी मुकदमे को लेकर अंशू सीतापुर में पेशी पर आया था। अंशू के साथ लखनऊ जीआरपी पुलिस लाइन के सिपाही सौरभ यादव और रामकुमार थे। पेशी से लौटते समय अंशू सिपाहियों की आंखों में मिर्च झोंककर फरार हो गया। रेलवे स्टेशन के करीब हुई इस घटना को लेकर सीतापुर जीआरपी थाने में अभियोग पंजीकृत हुआ। कई महीनों की तलाश के बाद इसे यूपी एसटीएफ द्वारा पकड़ा गया। अंशू उर्फ सुमित दीक्षित पर उप्र के अलावा मध्य प्रदेश सहित कई स्थानों पर गंभीर धाराओं में अभियोग पंजीकृत हैं।

कई वीडियो हो चुके हैं वायरल

तीन वर्ष पूर्व अंशू दीक्षित का रायबरेली जेल के भीतर रंगदारी और शराब मांगने का वीडियो वायरल होने के बाद एक और वीडियो की जांच जिला पुलिस द्वारा कराई जा चुकी है।

पूर्वांचल के एक गिरोह से थीं नजदीकियां

अंशू और उसके गुर्गों की फेहरिस्त लंबी है। सूत्रों की मानें तो अंशू के गिरोह में पूर्वांचल के एक गुट के कुछ शातिर भी हालत दिनों में जुड़ गए थे। इसी के बाद अंशू की आक्रामकता और बढ़ गई। जानकारों की मानें तो कुछ शातिरों की आवाजाही का इनपुट सीतापुर पुलिस को कुछ दिनों पहले मिला था, लेकिन धरपकड़ से पहले ही अपराधी जिले की सीमा छोड़ चुके थे।

मौत के बाद घर के बाहर पसरा सन्नाटा

अंशू दीक्षित के मारे जाने की खबर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई। सूचना मिलते ही कई परिवारों ने राहत की सांस ली। आतंक के अंत की कहानी देर तक फोन से लोगों द्वारा एक दूसरे को बताई जाती रही। अंशू की मौत की खबर मिलने पर अंशू के पुराने घर पर सन्नाटा पसर गया।

पिता ने कहा- अगर मुंह खोला तो जीना मुश्किल

अंशू के पिता जगदीश ने पुत्र की हत्या के पीछे एक गहरी साजिश होना बताया है। अंशू के पिता का दावा है कि दो दिन पहले ही उसकी अपने पुत्र से बातचीत हुई थी, तब सबकुछ ठीक ठाक था। अचानक हुई घटना को सोची समझी साजिश बताया। कहा कि इसके पीछे बड़े-बड़े शामिल हैं। अगर मुंह खोलूंगा तो मेरा भी जीना मुश्किल हो जाएगा।

परिजनों को चित्रकूट लेकर गई कोतवाली पुलिस

परिजनों को कोतवाली पुलिस चित्रकूट लेकर गई। कोतवाली प्रभारी निरीक्षक टीपी सिंह का कहना है कि अंशू के पिता जगदीश के अलावा परिवार के अन्य लोग भी चित्रकूट ले जाए गए हैं। परिवार के साथ चौकी इंचार्ज सिविल लाइन को भेजा गया है।

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