सूखती उम्मीदें, जर्जर बांध: मानिकपुर के डोंडा माफी समेत कई बांधों में मरम्मत के नाम पर खेल!

🟥 संजय सिंह राणा की रिपोर्ट

📌 जिन बांधों से खेतों में हरियाली आनी थी, वही अब खुद बदहाली की कहानी कह रहे हैं—क्या यह विकास है या धन की बंदरबांट?

चित्रकूट जिले का पठारी क्षेत्र मानिकपुर, जहां किसानों की जिंदगी पानी पर टिकी हुई है, वहीं अब जल संसाधनों की बदहाली एक गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है। विशेष रूप से डोंडा माफी बांध, जो कभी सिंचाई का मुख्य आधार माना जाता था, आज उपेक्षा और अव्यवस्था का शिकार बन चुका है। बांध के फाटक जर्जर हो चुके हैं, पिचिंग टूट रही है और मरम्मत कार्य केवल कागजों तक सीमित नजर आते हैं।

🌊 डोंडा माफी बांध: उपेक्षा की मार झेलता जल स्रोत

मानिकपुर के डोंडा माफी बांध की स्थिति दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है। सिंचाई प्रखंड प्रथम के अंतर्गत आने वाले इस बांध के फाटक पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं, लेकिन उनके रखरखाव की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई। लंबे समय से मेंटीनेंस कार्य न होने के कारण फाटक अपनी उपयोगिता खोते जा रहे हैं। इससे न केवल जल संचयन प्रभावित हो रहा है बल्कि भविष्य में किसी बड़े हादसे की आशंका भी बनी हुई है।

⚠️ पिचिंग ध्वस्त, संरचना पर खतरा

बांध की पिचिंग भी कई स्थानों पर ध्वस्त हो चुकी है, जिससे बांध की संरचना कमजोर होती जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि समय रहते इसकी मरम्मत नहीं की गई, तो यह स्थिति और गंभीर हो सकती है। बावजूद इसके जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से कोई ठोस कदम उठता नजर नहीं आ रहा है।

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🚜 नहरों की सफाई में लापरवाही

डोंडा माफी बांध से निकलने वाली नहरों की हालत भी कुछ बेहतर नहीं है। सिल्ट सफाई का कार्य केवल औपचारिकता बनकर रह गया है। कई स्थानों पर नहरों में गाद जमी हुई है, जिससे पानी का प्रवाह बाधित हो रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि थोड़े बहुत कार्य दिखाकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है।

🏗️ अन्य बांधों में भी वही कहानी

केवल डोंडा माफी बांध ही नहीं, बल्कि मानिकपुर तहसील के अन्य बांध—ओहन, हेला, जरेडा और बरदहा—भी इसी तरह की समस्याओं से जूझ रहे हैं। इन बांधों में भी मरम्मत कार्यों के नाम पर अनियमितताओं के आरोप लग रहे हैं। खासकर बरदहा बांध की नहर में ठेकेदारों की मनमानी खुलकर सामने आ रही है।

🔍 जमीनी हकीकत: गुणवत्ता विहीन कार्य

‘चलो गांव की ओर’ जागरूकता अभियान के संस्थापक अध्यक्ष संजय सिंह राणा ने जब इन बांधों का निरीक्षण किया, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। उन्होंने पाया कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता का घोर अभाव है। स्थानीय पहाड़ों की खनिज सामग्री का अवैध उपयोग कर कार्य कराए जा रहे हैं, जिससे बांधों की मजबूती पर सवाल उठ रहे हैं।

💰 विकास या भ्रष्टाचार?

सरकार द्वारा किसानों को पर्याप्त सिंचाई सुविधा देने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर यह धन सही तरीके से उपयोग होता नजर नहीं आ रहा है। ठेकेदारों और अधिकारियों की मिलीभगत के आरोप इस पूरे मामले को और गंभीर बना देते हैं।

🌾 किसानों पर असर

इन बांधों की बदहाली का सीधा असर किसानों पर पड़ रहा है। सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी न मिलने से फसल उत्पादन प्रभावित हो रहा है। यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो यह समस्या आने वाले समय में और विकराल रूप ले सकती है।

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📢 जांच की मांग

संजय सिंह राणा ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इन सभी बांधों और नहरों के मरम्मत कार्यों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। दोषी ठेकेदारों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि सरकारी धन का सही उपयोग सुनिश्चित हो सके।

❓ महत्वपूर्ण सवाल-जवाब

डोंडा माफी बांध की मुख्य समस्या क्या है?

बांध के फाटक जर्जर हो चुके हैं और पिचिंग टूट रही है, जिससे संरचना कमजोर हो रही है।

नहरों की स्थिति कैसी है?

नहरों में सिल्ट जमा है और सफाई कार्य केवल नाम मात्र का हुआ है।

क्या प्रशासन ने कोई कार्रवाई की है?

फिलहाल जांच की मांग की गई है, कार्रवाई का इंतजार है।

निष्कर्ष: चित्रकूट के मानिकपुर क्षेत्र में जल संसाधनों की यह बदहाली केवल लापरवाही का परिणाम नहीं, बल्कि व्यवस्था की खामियों का आईना है। यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो यह समस्या केवल बांधों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरे क्षेत्र की कृषि और जीवन को प्रभावित करेगी।

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