अपराध

मुख्तार का ‘सिकंदर’ ; 19 साल की खोज के बाद भी नहीं मिला सीबीआई को, पाकिस्तान में शादी कर गुमनाम  तो नहीं जी रहा… .

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आत्माराम त्रिपाठी की रिपोर्ट

सिकंदर… हां मुख्तार अंसारी उसे इसी नाम से पुकारता था। ये दौर था 1990 के दशक का। पूर्वांचल ही नहीं, पूरे उत्तर प्रदेश से लेकर देश की राजधानी दिल्ली तक मुख्तार के नाम की दहशत थी। 

रंगदारी हो या सरकारी ठेके, मुख्तार के गुर्गों का एक फोन बड़े से बड़े व्यापारी और ठेकेदार के चेहरे का रंग उड़ा देता था। इन गुर्गों के बीच एक नाम सबसे खास था। ये नाम था, अत्ता-उर-रहमान उर्फ सिकंदर उर्फ बाबू। जो साए की तरह मुख्तार के साथ रहता था। 

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हत्या हो या फिरौती या फिर किडनैपिंग… हर वारदात की प्लानिंग इसी सिकंदर के शैतानी दिमाग से फाइनल होती थी। जब मुख्तार के गुर्गे बंदूकों से खौफ फैला रहे थे, तो सिकंदर अकेला था, जो दिमाग से वार करता था।

मुख्तार का नाम अब मिट चुका है। मुन्ना बजरंगी जैसे उसके कई खूंखार गुर्गे भी खत्म हो चुके हैं। लेकिन, ये सिकंदर कहां छिपा है? वो जिंदा है या मर गया? यूपी पुलिस और सीबीआई पिछले 19 सालों से उसे तलाश रही है। आइए जानते हैं कि कौन है ये सिकंदर।

सिकंदर मुख्तार अंसारी के गुर्गों में सबसे अलग था। एक रिपोर्ट के मुताबिक, वो कितना खतरनाक था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सीबीआई ने 19 साल पहले उसके ऊपर 2 लाख रुपए का इनाम रखा था। सिकंदर की एंट्री मुख्तार अंसारी के गैंग में उस वक्त हुई, जब उसने अपनी भतीजी अफशां से मुख्तार का निकाह कराया। 

शुरुआत में सिकंदर मुख्तार के भाई अफजाल अंसारी के चुनाव प्रचार का जिम्मा संभालता था। लेकिन, मुख्तार के निकाह के बाद वो उसके लिए काम करने लगा। मुख्तार ने सिकंदर पर जितना भरोसा जताया, वो उससे कहीं ज्यादा बढ़कर निकला। अब वो मुख्तार के गैंग आईएस-191 का हिस्सा था।

कैसे मुख्तार का खास बना सिकंदर

गाजीपुर में मोहम्मदाबाद थाना क्षेत्र के महारूपुर गांव के रहने वाले सिकंदर को मुख्तार के गैंग में शोहरत उस वक्त मिली, जब 1993 में देश की राजधानी दिल्ली के अंदर एक किडनैपिंग हुई। 

दिल्ली के पंजाबी बाग इलाके से 7 दिसंबर 1993 को वेद प्रकाश गोयल नाम के व्यापारी का दिनदहाड़े अपहरण हो गया। मुख्तार के गुर्गों ने बीच सड़क गोयल की गाड़ी को रोका और उन्हें अगवा कर लिया। इस अपहरण कांड ने पूरी दिल्ली को हिलाकर रख दिया। 

पूर्वांचल के किसी माफिया की देश की राजधानी में शायद ये पहली वारदात थी। वेद प्रकाश गोयल के परिवार से उनकी जान के बदले में एक करोड़ रुपए की फिरौती मांगी गई। इस किडनैपिंग की पूरी प्लानिंग सिकंदर ने ही तैयार की थी।

कोयला व्यापारी नंद किशोर रूंगटा को घर से किया किडनैप

इसके बाद मुख्तार अंसारी के लिए सिकंदर ने एक और बड़ी किडनैपिंग की। 1997 में जब यूपी के अंदर विधानसभा चुनाव की गहमागहमी थी, तो बनारस के जवाहर एक्सटेंशन से जाने-माने कोयला व्यापारी नंद किशोर रूंगटा का अपहरण हो गया। एक शख्स झारखंड का कोयला व्यापारी बनकर नंद किशोर के घर पहुंचा। बातों-बातों में वो उसे घर के बाहर लेकर आया और इसके बाद अपनी गाड़ी में किडनैप कर ले गया। झारखंड का ये कोयला व्यापारी कोई और नहीं, बल्कि मुख्तार का खासमखास सिकंदर ही था। 

काफी खोजबीन के बाद भी नंद किशोर का कुछ पता नहीं चला। परिजनों ने आरोप लगाया कि कोयले के कारोबार में वर्चस्व स्थापित करने के लिए मुख्तार ने नंद किशोर की हत्या करा दी।

29 नवंबर 2005 को यूपी का गाजीपुर उस वक्त दहल गया था, जब भाजपा विधायक कृष्णानंद राय की सरेआम गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई। इस हत्याकांड को अत्ता-उर-रहमान, प्रेम प्रकाश सिंह उर्फ मुन्ना बजरंगी और संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा सहित 6 लोगों ने अंजाम दिया था। 

इनमें से मुख्तार अंसारी का एक गुर्गा ऐसा था, जिसने इस हत्याकांड की पूरी प्लानिंग तैयार की थी। इस गुर्गे का नाम था अत्ता-उर-रहमान उर्फ सिकंदर। ना सिर्फ कृष्णानंद राय, बल्कि 1990 के दशक में मुख्तार अंसारी ने जो जो बड़े कांड किए, उन सबके पीछे इसी सिकंदर का दिमाग था। मुख्तार की मौत के बाद अब इस सिकंदर का पाकिस्तानी कनेक्शन सामने आया है।

कौन है अत्ता-उर-रहमान उर्फ सिकंदर?

उसके पाकिस्तानी कनेक्शन को जानने से पहले सबसे पहले जानते हैं कि आखिर ये अत्ता-उर-रहमान उर्फ सिकंदर कौन है? मुख्तार अंसारी के गैंग में कैसे उसकी एंट्री हुई? अत्ता-उर-रहमान गाजीपुर के मोहम्मदाबाद में महारूपुर गांव का रहने वाला था। 

रहमान शुरुआत में मुख्तार अंसारी के बड़े भाई अफजाल अंसारी के लिए काम करता था। अफजाल जब राजनीति में उतरे तो उनके चुनाव प्रचार का पूरा जिम्मा इसी रहमान के हाथों में था। कुछ वक्त बाद रहमान ने अपनी भतीजी अफशां का निकाह मुख्तार अंसारी के साथ करा दिया। और इसके बाद, रहमान मुख्तार के लिए काम करने लगा। अत्ता-उर-रहमान के शातिर दिमाग को देखते हुए मुख्तार अंसारी उसे सिकंदर कहकर बुलाता था।

पाकिस्तान में जा छिपा है सिकंदर?

साल 2005 में हुए कृष्णानंद राय हत्याकांड में जब उसका नाम मुख्य आरोपियों में शामिल किया गया, तो सिकंदर अंडरग्राउंड हो गया। 

उसके बाद पुलिस और सीबीआई उसे तलाशती रही, लेकिन सिकंदर का कोई सुराग नहीं मिला। 

एचटी की रिपोर्ट के मुताबिक, यूपी स्पेशल टास्क फोर्स में डीएसपी दीपक कुमार सिंह ने बताया, ‘हमारे पास जो जानकारी मौजूद है, उसके मुताबिक पाकिस्तान में सिकंदर के कुछ रिश्तेदार रहते हैं। 

बताया जाता है कि खतरे को भांपकर वो भारत से पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान भाग गया है। पता ये भी चला है कि वहां उसने एक पाकिस्तानी महिला मुमताज बेगम से निकाह कर लिया है। हालांकि, वो पाकिस्तान में कहां छिपा है, इसकी कोई जानकारी किसी के पास नहीं है।’

सीबीआई ने रखा था सिकंदर पर 2 लाख का इनाम

सिकंदर को गायब हुए करीब दो दशक हो चुके हैं। सीबीआई की मोस्ट वांटेड लिस्ट में शामिल इस खूंखार गुर्गे के ऊपर 2 लाख रुपए का इनाम भी रखा गया था। लेकिन, सिकंदर एक छलावे की तरह गायब हो गया। 

यूपी पुलिस की वेबसाइट पर वांटेड अपराधियों की लिस्ट में केवल उसका नाम अत्ता-उर-रहमान उर्फ सिकंदर उर्फ बाबू ही लिखा है। उसके मोबाइल, बैंक खातों या परिवार के सदस्यों की भी कोई जानकारी नहीं है। 

मोहम्मदाबाद में महारूपुर गांव में सिकंदर का जो पुराना घर है, अब वहां कोई नहीं रहता है। घर की हालत भी खंडहर जैसी हो चुकी है। बताया जाता है कि उसकी पत्नी और एक बच्चा है, उनसे भी उसका कोई सपर्क नहीं है।

मोबाइल, बैंक अकाउंट या परिवार का कोई सुराग नहीं

वो जिंदा है या मर गया? पुलिस के पास इस बात की कोई जानकारी नहीं है। उसका नाम यूपी पुलिस और सीबीआई दोनों की मोस्ट वांटेड लिस्ट में शामिल है। 

किसी भी जांच एजेंसी के पास उसके मोबाइल, बैंक अकाउंट नंबर या परिवार से जुड़ा कोई सुराग नहीं है। हालांकि, यूपी स्पेशल टास्क फोर्स के डीएसपी दीपक कुमार सिंह बताते हैं कि कुछ सूत्रों से पता चला है कि उसके रिश्तेदार पाकिस्तान में हैं। दीपक कुमार के मुताबिक, माना जाता है कि सिकंदर पाकिस्तान भाग गया है और वहां किसी गुमनाम जगह पर पहचान छिपाकर रहता है। बताया ये भी जाता है कि सिकंदर ने पाकिस्तान में मुमताज बेगम नाम की महिला से शादी कर ली है।

मुख्तार के गैंग में उसका दबदबा था। कोई भी बड़ा काम हो, उसके शैतानी दिमाग की प्लानिंग के जरिए ही उसके गुर्गे मुख्तार के उस काम को अंजाम देते थे। 

एक वक्त ऐसा भी था, जब सिकंदर साए की तरह मुख्तार के साथ रहने लगा था। मुख्तार अंसारी के तीन सबसे बड़े खतरनाक गुर्गे मुन्ना बजरंगी, जीवा और मेराजुद्दीन मर चुके हैं। लेकिन, सिकंदर फरार है। पिछले 19 सालों से पुलिस और सीबीआई उसके पीछे हैं।

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"कलम हमेशा लिखती हैं इतिहास क्रांति के नारों का, कलमकार की कलम ख़रीदे सत्ता की औकात नहीं.."

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