
देवरिया जनपद के लार क्षेत्र में रसोई गैस की किल्लत अब एक साधारण असुविधा नहीं रही, बल्कि यह एक गंभीर जनसमस्या का रूप लेती दिखाई दे रही है। गैस सिलेंडर की लगातार बढ़ती कीमतों के बीच अब आपूर्ति में अनियमितता ने ग्रामीण उपभोक्ताओं की मुश्किलों को और बढ़ा दिया है। हालात ऐसे बन गए हैं कि बुकिंग कराने और पर्ची कटवाने के बावजूद भी लोगों को गैस सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है, जिससे दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है।
जमीनी हकीकत बनाम दावे
सरकारी स्तर पर गैस आपूर्ति को सुचारू और पारदर्शी बताया जाता है, लेकिन लार क्षेत्र के रोपन छपरा स्थित प्रिंस इंडेन सर्विस से जुड़े उपभोक्ताओं की स्थिति इससे बिल्कुल अलग कहानी बयां करती है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि उन्होंने विधिवत बुकिंग कराई, पर्ची भी कटवाई, लेकिन इसके बावजूद सिलेंडर की डिलीवरी नहीं हो रही है।
गांव के कई परिवारों का कहना है कि पहले जहां एजेंसी या गोदाम पर लाइन लगाकर किसी तरह गैस प्राप्त हो जाती थी, वहीं अब होम डिलीवरी के नाम पर लोगों को दिनों-दिन इंतजार करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि लोग न तो गोदाम से सिलेंडर ले पा रहे हैं और न ही घर तक इसकी आपूर्ति हो रही है।
“डिलीवर” का मैसेज, लेकिन सिलेंडर गायब
इस पूरे मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू तब सामने आया जब एक उपभोक्ता के मोबाइल पर बिना सिलेंडर मिले ही “रिफिल डिलीवर” का संदेश आ गया। 1 मार्च को भेजे गए इस मैसेज ने उपभोक्ताओं के बीच भ्रम और आक्रोश दोनों पैदा कर दिया है।
जब संबंधित उपभोक्ता ने दोबारा बुकिंग करने की कोशिश की, तो सिस्टम में पहले से बुकिंग दर्ज होने की सूचना मिली, जिसके कारण वह नई बुकिंग भी नहीं कर सका। यह तकनीकी और प्रशासनिक खामी अब उपभोक्ताओं के लिए दोहरी परेशानी का कारण बन चुकी है।
एजेंसी की अनभिज्ञता या जिम्मेदारी से बचाव?
जब इस संबंध में एजेंसी संचालक से बात की गई, तो उन्होंने पूरे मामले से अनभिज्ञता जाहिर की। लेकिन सवाल यह उठता है कि यदि उपभोक्ताओं को लगातार ऐसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
ग्रामीणों का कहना है कि एजेंसी स्तर पर न तो स्पष्ट जवाब मिल रहा है और न ही कोई समाधान प्रस्तुत किया जा रहा है। इससे लोगों में असंतोष बढ़ता जा रहा है और व्यवस्था पर भरोसा कमजोर पड़ रहा है।
अब स्कूलों तक पहुंचा असर
गैस संकट का असर अब केवल घरेलू रसोई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका सीधा प्रभाव सरकारी स्कूलों की मिड-डे मील योजना पर भी पड़ने लगा है। यह स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है क्योंकि यह सीधे बच्चों के पोषण और शिक्षा से जुड़ी हुई है।
स्थानीय शिक्षकों का कहना है कि गैस सिलेंडर नहीं मिलने के कारण उन्हें मजबूरी में लकड़ी पर भोजन बनवाना पड़ रहा है। इससे न केवल समय अधिक लग रहा है, बल्कि स्वच्छता और गुणवत्ता पर भी असर पड़ रहा है। कई स्कूलों में भोजन तैयार करने की प्रक्रिया बाधित हो रही है, जिससे बच्चों को समय पर खाना नहीं मिल पा रहा है।
ग्रामीणों में बढ़ता आक्रोश
ग्रामीण उपभोक्ताओं का आरोप है कि एक ओर सरकार गैस आपूर्ति को बेहतर बताने के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर लोग कई दिनों से गैस के लिए भटक रहे हैं। गोदाम पर जाने से मना किया जा रहा है और होम डिलीवरी भी समय पर नहीं हो रही है।
लोगों का कहना है कि यह स्थिति केवल असुविधा नहीं, बल्कि व्यवस्था की विफलता का संकेत है। यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो यह संकट और गहराता जा सकता है।
पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग
उपभोक्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि गैस वितरण प्रणाली को पारदर्शी बनाया जाए और इस पूरे मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि तकनीकी खामियों और वितरण में गड़बड़ी को तुरंत दूर किया जाना चाहिए, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके।
साथ ही यह भी मांग उठ रही है कि स्कूलों में मिड-डे मील की व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए प्राथमिकता के आधार पर गैस सिलेंडर उपलब्ध कराए जाएं, ताकि बच्चों के पोषण पर कोई असर न पड़े।
अंत में…
देवरिया के लार क्षेत्र में गैस संकट एक गंभीर चेतावनी की तरह है, जो यह संकेत देता है कि योजनाओं और जमीनी हकीकत के बीच अभी भी बड़ा अंतर मौजूद है। जब बुकिंग के बाद भी सिलेंडर न मिले और स्कूलों की रसोई तक प्रभावित हो जाए, तो यह केवल एक तकनीकी समस्या नहीं रह जाती—यह एक सामाजिक चिंता बन जाती है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मुद्दे को कितनी गंभीरता से लेता है और कब तक इस संकट का समाधान सामने आता है।
FAQ
क्या समस्या केवल एक क्षेत्र तक सीमित है?
फिलहाल यह समस्या देवरिया के लार क्षेत्र में अधिक सामने आई है, लेकिन अन्य क्षेत्रों में भी ऐसी शिकायतें हो सकती हैं।
उपभोक्ताओं को सबसे बड़ी परेशानी क्या है?
बुकिंग और पर्ची के बावजूद सिलेंडर न मिलना, तथा बिना डिलीवरी के “डिलीवर” का मैसेज आना।
इसका स्कूलों पर क्या असर पड़ा है?
मिड-डे मील योजना प्रभावित हो रही है, जिससे बच्चों के भोजन और पोषण पर असर पड़ रहा है।










