शिक्षक आत्महत्या प्रकरण में सख्ती , फरार बीएसए व लिपिक के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी

शिक्षक आत्महत्या प्रकरण में फरार बीएसए और लिपिक के खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट से जुड़ी प्रतीकात्मक तस्वीर

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🖊️ इरफान अली लारी की रिपोर्ट

अदालत का कड़ा रुख, गिरफ्तारी तेज करने के निर्देश

देवरिया जनपद में चर्चित शिक्षक आत्महत्या मामले ने अब न्यायिक स्तर पर नया मोड़ ले लिया है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सख्त रुख अपनाते हुए निलंबित बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) जारी कर दिया है। यह आदेश सीओ गोरखनाथ रवि कुमार सिंह की ओर से प्रस्तुत अर्जी पर सुनवाई के बाद पारित किया गया। अदालत के इस निर्णय के बाद पुलिस प्रशासन ने आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास और तेज कर दिए हैं।

मामले में पुलिस पहले ही कई धाराओं में मुकदमा दर्ज कर चुकी थी, जिसमें बाद में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं भी जोड़ी गईं। इसके बावजूद आरोपी गिरफ्त से बाहर हैं, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। अदालत के इस आदेश को जांच की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

लगातार फरार चल रहे हैं आरोपी

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपी बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह लगातार पुलिस से बचते हुए फरार चल रहे हैं। कई संभावित ठिकानों पर दबिश देने के बावजूद पुलिस को अब तक सफलता नहीं मिल सकी है। सीओ गोरखनाथ ने अदालत को अवगत कराया कि दोनों आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार स्थान बदल रहे हैं, जिससे उन्हें पकड़ने में कठिनाई हो रही है।

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पुलिस ने देवरिया, बलिया, लखनऊ और प्रयागराज समेत कई जिलों में विशेष टीमों का गठन कर दबिश दी है। बावजूद इसके अब तक कोई ठोस सफलता नहीं मिलने से पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।

इनामी राशि बढ़ाकर 25-25 हजार की गई

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एसएसपी गोरखपुर ने पहले आरोपियों की गिरफ्तारी पर 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। लेकिन गिरफ्तारी में देरी को देखते हुए अब इस इनाम राशि को बढ़ाकर 25-25 हजार रुपये कर दिया गया है। प्रशासन का मानना है कि इनाम बढ़ने से आरोपियों की गिरफ्तारी में तेजी आएगी और आम जनता से भी सूचना मिलने की संभावना बढ़ेगी।

हालांकि स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि इतने बड़े मामले में अब तक गिरफ्तारी न होना कई सवाल खड़े करता है। लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं, जो प्रशासन के लिए चिंता का विषय बन सकती हैं।

क्या है पूरा मामला?

बताया जाता है कि कुशीनगर जनपद के हरैया बुजुर्ग निवासी 37 वर्षीय कृष्ण मोहन सिंह देवरिया के गौरीबाजार स्थित कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन में सहायक अध्यापक के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने गोरखपुर के गुलरिहा थाना क्षेत्र स्थित अपने आवास में फंदे से लटककर आत्महत्या कर ली थी। इस घटना ने पूरे शिक्षा विभाग और क्षेत्र में सनसनी फैला दी थी।

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आत्महत्या से पहले शिक्षक ने चार पेज का सुसाइड नोट और एक वीडियो भी बनाया था, जिसमें उन्होंने गंभीर आरोप लगाए थे। सुसाइड नोट में उन्होंने बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह और सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह पर नियुक्ति बहाली के नाम पर 16 लाख रुपये की मांग करने और मानसिक उत्पीड़न करने का आरोप लगाया था।

परिजनों की तहरीर पर दर्ज हुआ मुकदमा

घटना के बाद मृतक की पत्नी गुड़िया सिंह की तहरीर पर गुलरिहा थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। प्रारंभिक जांच के बाद मामले में गंभीरता को देखते हुए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं भी जोड़ी गईं। इसके बाद पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए अभियान शुरू किया।

मृतक के परिवार ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है और न्याय की उम्मीद जताई है। परिवार का कहना है कि यदि समय रहते आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई होती तो शायद यह दुखद घटना टल सकती थी।

चार टीमें कर रहीं लगातार दबिश

पुलिस की चार विशेष टीमें लगातार अलग-अलग जिलों में आरोपियों की तलाश में लगी हुई हैं। देवरिया, बलिया, लखनऊ और प्रयागराज जैसे स्थानों पर लगातार दबिश दी जा रही है। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि आरोपियों को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

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हालांकि अब तक गिरफ्तारी न होने के कारण लोगों के बीच असंतोष की स्थिति बनी हुई है। कई लोग इसे प्रशासनिक ढिलाई मान रहे हैं, जबकि अधिकारी इसे आरोपियों की रणनीति बता रहे हैं।

जनमानस में उठ रहे सवाल

इस पूरे मामले को लेकर जनमानस में कई सवाल उठ रहे हैं। लोग यह जानना चाहते हैं कि जब आरोप इतने गंभीर हैं और सुसाइड नोट जैसे ठोस साक्ष्य मौजूद हैं, तो फिर आरोपियों की गिरफ्तारी में इतनी देरी क्यों हो रही है।

सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तारी में देरी के कारण कई तरह की चर्चाएं भी फैल रही हैं, जो मामले की संवेदनशीलता को और बढ़ा रही हैं। ऐसे में प्रशासन पर दबाव भी बढ़ता जा रहा है कि वह जल्द से जल्द आरोपियों को गिरफ्तार कर मामले का खुलासा करे।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

गैर-जमानती वारंट क्या होता है?

गैर-जमानती वारंट (NBW) वह वारंट होता है जिसमें आरोपी को सीधे गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया जाता है और उसे तत्काल जमानत नहीं मिलती।

इस मामले में किन पर आरोप हैं?

इस मामले में निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह और एक सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक पर आरोप लगाए गए हैं।

अब आगे क्या कार्रवाई हो सकती है?

गैर-जमानती वारंट जारी होने के बाद पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार कर अदालत में पेश करेगी, जिसके बाद आगे की कानूनी कार्रवाई होगी।

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