कालूपुर गांव में सामने आई दर्दनाक घटना
चित्रकूट जनपद के जिला मुख्यालय कर्वी से सटे गांव कालूपुर (पाही) में एक बेजुबान कुतिया ‘रूबी’ के साथ हुई क्रूरता की घटना ने स्थानीय लोगों को झकझोर कर रख दिया है। बताया जा रहा है कि किसी अज्ञात व्यक्ति की निर्दयता का शिकार हुई रूबी के पैर में गंभीर चोटें आई हैं। चोट इतनी भयावह थी कि उसका पैर लगभग अलग होकर लटक गया और हड्डी बाहर तक निकल आई। इस दर्दनाक स्थिति को देखकर गांव के कुछ संवेदनशील युवकों ने मानवता का परिचय देते हुए घायल रूबी को तुरंत जिला कचेहरी के पास स्थित मुख्य पशु चिकित्सालय लेकर पहुंचे, ताकि उसका उपचार कराया जा सके।
हालांकि, आरोप है कि अस्पताल पहुंचने के बावजूद रूबी को अपेक्षित उपचार नहीं मिल सका। स्थानीय लोगों और रूबी को अस्पताल लेकर गए युवकों का कहना है कि पशु चिकित्सक द्वारा गंभीर चोट को देखते हुए तत्काल सर्जरी की जरूरत होने के बावजूद उचित इलाज नहीं किया गया। इससे रूबी की हालत और चिंताजनक बनी हुई है और लोगों में पशु चिकित्सालय की कार्यप्रणाली को लेकर असंतोष भी बढ़ता दिखाई दे रहा है।
इलाज में लापरवाही का आरोप
घायल रूबी को अस्पताल ले जाने वाले युवकों का आरोप है कि पशु चिकित्सक ने मामले की गंभीरता को समझने के बजाय सामान्य उपचार तक सीमित रहकर अपना कर्तव्य पूरा कर दिया। उनका कहना है कि रूबी के पैर की हड्डी बाहर निकली हुई थी और ऐसी स्थिति में तुरंत सर्जरी की आवश्यकता थी, लेकिन इसके बावजूद ऑपरेशन नहीं किया गया। इतना ही नहीं, इंजेक्शन भी अस्पताल से उपलब्ध कराने के बजाय बाहर से मंगवाने को कहा गया।
युवकों ने बताया कि जब उन्होंने बाहर से इंजेक्शन मंगाकर लगवाया तब जाकर रूबी के असहनीय दर्द में थोड़ी राहत मिली। हालांकि, गंभीर चोट के कारण उसकी स्थिति अभी भी चिंताजनक बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सही इलाज नहीं हुआ तो रूबी की जान भी जा सकती है।
सामाजिक कार्यकर्ता ने जताई नाराजगी
घटना की जानकारी मिलने के बाद वरिष्ठ पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता संजय सिंह राणा भी मौके पर पहुंचे और घायल रूबी की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने रूबी को अस्पताल पहुंचाने वाले दोनों युवकों के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें धन्यवाद दिया और कहा कि समाज में ऐसे संवेदनशील लोगों की मौजूदगी ही इंसानियत को जीवित रखती है।
इसके साथ ही उन्होंने पशु चिकित्सक की कथित लापरवाही पर गंभीर नाराजगी व्यक्त की। उनका कहना है कि जब किसी पशु को इतनी गंभीर चोट लगी हो तो डॉक्टर का दायित्व बनता है कि वह पूरी जिम्मेदारी के साथ उसका उपचार करे। यदि उपचार में लापरवाही बरती जाती है तो यह न केवल मानवीय संवेदनाओं के खिलाफ है बल्कि कानून के दायरे में भी गंभीर मामला बन सकता है।
जिलाधिकारी से की जाएगी शिकायत
संजय सिंह राणा ने कहा है कि घायल रूबी के इलाज में कथित लापरवाही बरतने वाले पशु चिकित्सक के खिलाफ जिलाधिकारी चित्रकूट को पत्र लिखकर शिकायत की जाएगी। उन्होंने यह भी मांग की है कि रूबी का उचित इलाज और आवश्यक सर्जरी जल्द से जल्द कराई जाए, ताकि उसकी जान बचाई जा सके।
उन्होंने कहा कि प्रशासन को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच करानी चाहिए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। उनका मानना है कि पशुओं के प्रति संवेदनशीलता समाज की सभ्यता का महत्वपूर्ण संकेत होती है और ऐसे मामलों में उदासीनता स्वीकार्य नहीं हो सकती।
पशु क्रूरता करने वाले के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग
रूबी के साथ हुई इस क्रूर घटना को लेकर संजय सिंह राणा ने यह भी कहा है कि प्रभारी निरीक्षक सदर कोतवाली कर्वी को एक शिकायती पत्र देकर उस व्यक्ति के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की जाएगी जिसने इस बेजुबान पशु के साथ निर्दयता दिखाई। उन्होंने कहा कि मामले की जांच कराकर दोषी के खिलाफ पशु क्रूरता अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए।
उनका कहना है कि यदि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो समाज में पशुओं के प्रति हिंसा और क्रूरता की घटनाएं बढ़ सकती हैं। इसलिए जरूरी है कि दोषियों को कानून के दायरे में लाकर सख्त संदेश दिया जाए कि बेजुबान जानवरों के साथ अत्याचार किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
समाज में जागरूकता की जरूरत
यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि समाज में पशुओं के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना कितनी जरूरी है। बेजुबान जानवर अपने दर्द को शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकते, इसलिए उनके प्रति करुणा और दया का भाव रखना हर इंसान की जिम्मेदारी बन जाती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समाज और प्रशासन दोनों मिलकर ऐसे मामलों में संवेदनशीलता दिखाएं तो पशु क्रूरता की घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। रूबी के मामले ने लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि इंसानियत केवल शब्दों में नहीं बल्कि व्यवहार में भी दिखाई देनी चाहिए।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
पशु क्रूरता अधिनियम क्या है?
पशु क्रूरता अधिनियम भारत में लागू एक कानून है जो जानवरों के साथ होने वाली हिंसा और क्रूरता को रोकने के लिए बनाया गया है। इसके तहत दोषी पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
घायल पशु मिलने पर क्या करना चाहिए?
यदि कोई घायल पशु मिलता है तो उसे नजदीकी पशु चिकित्सालय ले जाना चाहिए और स्थानीय प्रशासन या पशु संरक्षण संगठनों को इसकी सूचना देनी चाहिए।
पशुओं के प्रति संवेदनशीलता क्यों जरूरी है?
पशुओं के प्रति संवेदनशीलता समाज की मानवीयता को दर्शाती है। इससे न केवल जीवों की रक्षा होती है बल्कि समाज में करुणा और जिम्मेदारी की भावना भी मजबूत होती है।










