
लखनऊ। राजधानी लखनऊ में आयोजित ग्रीन कॉरिडोर फेज-2 के लोकार्पण समारोह में उस समय माहौल कुछ अलग ही हो गया जब उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने मंच से अपने संबोधन की शुरुआत अवधी अंदाज में की। आमतौर पर सरकारी कार्यक्रमों में औपचारिक भाषण सुनने को मिलते हैं, लेकिन इस बार डिप्टी सीएम की भाषा में वह अपनापन था जो सीधे जनता के दिल तक पहुंच गया। जैसे ही उन्होंने अवधी में कहा— “जब मन करै दाबे चले जाव, ब्रिक लेवे के जरूरत नाहीं है… दाबे चले जाव हरहरउवा, अब 15 मिनट मा पहुंच जइहैं”—सभा स्थल पर मौजूद लोगों के चेहरों पर मुस्कान फैल गई और तालियों की गूंज सुनाई देने लगी।
दरअसल यह कार्यक्रम राजधानी में बनाए जा रहे बहुप्रतीक्षित ग्रीन कॉरिडोर परियोजना के दूसरे चरण के उद्घाटन का था। इस अवसर पर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि लखनऊ का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। शहर में सड़कों और कॉरिडोर का जाल बिछाया जा रहा है, जिससे ट्रैफिक जाम जैसी पुरानी समस्याओं से लोगों को धीरे-धीरे राहत मिल रही है।
अवधी में संवाद, जनता से जुड़ाव
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का भाषण केवल विकास योजनाओं की जानकारी तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने अपनी बात ऐसे अंदाज में कही जो लखनऊ और आसपास के इलाकों की मिट्टी से जुड़ा हुआ था। मंच से उन्होंने कहा कि अब शहर में ऐसी सड़कें बन रही हैं जिनसे लोगों को घंटों जाम में फंसे रहने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा— “पहिले जाम मा घंटन लग जात रहा, अब दाबे चले जइहैं त 15 मिनट मा हरहरउवा पहुंच जइहैं।”
उनके इस अवधी अंदाज ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का दिल जीत लिया। आम लोगों के लिए यह केवल भाषण नहीं था बल्कि ऐसा संवाद था जिसमें उन्हें अपनेपन की झलक दिखाई दी। कई लोगों ने बाद में कहा कि नेताओं को जब जनता की भाषा में बात करते देखा जाता है तो लोगों को लगता है कि उनकी समस्याओं को सचमुच समझा जा रहा है।
लखनऊ की ट्रैफिक समस्या से राहत की उम्मीद
डिप्टी सीएम ने अपने संबोधन में राजधानी की ट्रैफिक समस्या का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि लखनऊ जैसे तेजी से बढ़ते शहर में यातायात का दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में नए कॉरिडोर और चौड़ी सड़कों का निर्माण समय की जरूरत है। उन्होंने याद दिलाया कि कुछ वर्ष पहले तक सीतापुर रोड, नाका हिंडोला और डालीगंज जैसे इलाकों में जाम लगना आम बात थी। लोग कई-कई घंटे तक सड़क पर फंसे रहते थे।
लेकिन अब सरकार की योजनाओं के तहत कई फ्लाईओवर, कॉरिडोर और नई सड़कें बन रही हैं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य केवल ट्रैफिक कम करना ही नहीं बल्कि शहर की आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों को भी गति देना है।
गोमती नदी के किनारे विकसित हुआ ग्रीन कॉरिडोर
ग्रीन कॉरिडोर परियोजना लखनऊ के लिए एक महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना परियोजना मानी जा रही है। यह कॉरिडोर गोमती नदी के किनारे विकसित किया गया है, जिससे शहर के कई महत्वपूर्ण इलाकों के बीच तेज और सुगम आवागमन संभव हो सकेगा।
परियोजना के दूसरे चरण के अंतर्गत समता मूलक चौक गोमतीनगर से लेकर निशातगंज और हनुमान सेतु होते हुए डालीगंज तक सड़क का निर्माण किया गया है। यह मार्ग अब जनता के लिए खोल दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि इस कॉरिडोर के शुरू होने से शहर के कई व्यस्त इलाकों में ट्रैफिक का दबाव कम होगा।
छह लेन की सड़क से बदलेगी शहर की तस्वीर
ग्रीन कॉरिडोर के इस हिस्से को छह लेन की आधुनिक सड़क के रूप में विकसित किया गया है। सड़क के दोनों ओर बेहतर ड्रेनेज व्यवस्था, पैदल पथ और हरित पट्टी भी बनाई गई है ताकि यह केवल यातायात का मार्ग न होकर शहर की सुंदरता को भी बढ़ाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस सड़क के शुरू होने से निशातगंज, बादशाहनगर, डालीगंज और आसपास के इलाकों में लगने वाले जाम से काफी राहत मिलेगी। इसके साथ ही शहर के विभिन्न हिस्सों के बीच यात्रा का समय भी काफी कम हो जाएगा।
चार चरणों में पूरी होगी परियोजना
ग्रीन कॉरिडोर परियोजना को कुल चार चरणों में विकसित किया जा रहा है। इसका पहला चरण आईआईएम रोड से पक्का पुल डालीगंज तक तैयार किया गया था। दूसरा चरण समता मूलक चौक से हनुमान सेतु डालीगंज तक पूरा हुआ है, जिसका लोकार्पण किया गया।
तीसरे और चौथे चरण के तहत इस कॉरिडोर को आगे बढ़ाते हुए डालीगंज से शहीद पथ और फिर किसान पथ तक जोड़ा जाएगा। इन चरणों के पूरा होने के बाद लखनऊ के उत्तरी और पूर्वी हिस्सों के बीच आवागमन और भी आसान हो जाएगा।
1519 करोड़ रुपये की लागत से बना दूसरा चरण
ग्रीन कॉरिडोर परियोजना के दूसरे चरण का निर्माण लगभग 1519 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है। यह परियोजना केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें शहर के यातायात ढांचे को दीर्घकालिक रूप से मजबूत करने की योजना शामिल है।
सरकार का कहना है कि राजधानी के विकास के लिए इस प्रकार की परियोजनाएं आवश्यक हैं, क्योंकि आने वाले वर्षों में शहर की आबादी और वाहनों की संख्या दोनों तेजी से बढ़ने वाली हैं।
विकास और संवाद का मिला संदेश
लोकार्पण समारोह केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं था। यह विकास और जनता के बीच संवाद का भी अवसर बन गया। जब डिप्टी सीएम ने अवधी भाषा में लोगों से बात की तो यह संदेश भी गया कि विकास की योजनाएं तभी सार्थक होती हैं जब वे जनता के जीवन से जुड़ती हैं।
कार्यक्रम में मौजूद कई लोगों ने कहा कि लखनऊ की पहचान केवल उसकी ऐतिहासिक इमारतों या तहजीब से ही नहीं बल्कि उसके बदलते बुनियादी ढांचे से भी बन रही है। नई सड़कें, फ्लाईओवर और कॉरिडोर आने वाले समय में शहर की गति को और तेज करेंगे।
अवधी अंदाज में दिया गया डिप्टी सीएम का संदेश इस कार्यक्रम की सबसे यादगार झलक बन गया। उनके शब्दों में विकास का भरोसा भी था और उस मिट्टी की महक भी, जिससे लखनऊ की पहचान बनती है।
FAQ
ग्रीन कॉरिडोर परियोजना क्या है?
ग्रीन कॉरिडोर लखनऊ में गोमती नदी के किनारे विकसित की जा रही एक प्रमुख सड़क परियोजना है जिसका उद्देश्य ट्रैफिक जाम कम करना और शहर के विभिन्न हिस्सों के बीच तेज आवागमन सुनिश्चित करना है।
ग्रीन कॉरिडोर का दूसरा चरण कहां तक बनाया गया है?
दूसरा चरण समता मूलक चौक गोमतीनगर से निशातगंज होते हुए हनुमान सेतु डालीगंज तक बनाया गया है।
इस परियोजना की लागत कितनी है?
ग्रीन कॉरिडोर परियोजना के दूसरे चरण का निर्माण लगभग 1519 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है।










