घूसखोर दरोगा जब रंगे हाथ पकड़ा गया, तो खुलती चली गईं परतें — पढ़िए पूरी कहानी

नवाबगंज थाना गोंडा में तैनात दरोगा अमर पटेल की फाइल फोटो, जिसे रिश्वत लेते एंटी करप्शन टीम ने गिरफ्तार किया
✍️ चुन्नीलाल प्रधान की रिपोर्ट
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उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार चल रही कार्रवाई के बीच गोंडा जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने पुलिस विभाग की कार्यशैली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नवाबगंज थाने में तैनात दरोगा को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा जाना केवल एक गिरफ्तारी नहीं है, बल्कि यह उस व्यवस्था का आईना है, जिसमें कानून के रखवाले ही कानून को सौदेबाज़ी का जरिया बना लेते हैं।

यह मामला डुमरियाडीह/गोंडा क्षेत्र का है, जहां भ्रष्टाचार निवारण संगठन (एंटी करप्शन) की ट्रैप टीम ने सुनियोजित तरीके से कार्रवाई करते हुए दरोगा अमर पटेल को दस हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद न सिर्फ थाने में हलचल मच गई, बल्कि पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया कि आखिर आम आदमी न्याय पाने के लिए कितनी कठिन लड़ाई लड़ने को मजबूर है।

📌 कैसे शुरू हुआ पूरा मामला

नवाबगंज थाना क्षेत्र के विश्नोहरपुर गड़रियन पुरवा निवासी बृजेश यादव के अनुसार, पूरे शंभू रघुनाथपुर निवासी हरिश्चंद मिश्र ने 23 दिसंबर को नवाबगंज थाने में एक मुकदमा दर्ज कराया था। इस एफआईआर में दंगा भड़काने समेत कई गंभीर धाराएं लगाई गई थीं, जिनमें बृजेश यादव सहित कुल पांच लोगों को नामजद किया गया।

इस मुकदमे की विवेचना दरोगा अमर पटेल को सौंपी गई। विवेचना शुरू होते ही बृजेश यादव का आरोप है कि दरोगा ने उन्हें बुलाकर न केवल डराने-धमकाने की भाषा अपनाई, बल्कि साफ तौर पर कहा कि यदि उन्होंने ‘सहयोग’ नहीं किया तो एफआईआर में जानलेवा हमले की धारा जोड़कर उन्हें जेल भेज दिया जाएगा।

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💰 नाम निकालने के बदले मांगी गई रिश्वत

पीड़ित के अनुसार, दरोगा अमर पटेल ने एफआईआर से नाम निकालने के एवज में दस हजार रुपये की मांग की। बृजेश यादव ने रकम कम करने की कोशिश की, लेकिन दरोगा अपने रुख पर अड़ा रहा। स्थिति यह बन गई कि या तो रिश्वत दी जाए, या फिर झूठे मुकदमे में फंसकर जेल की राह देखी जाए।

ऐसे हालात में बृजेश यादव ने हिम्मत दिखाई और एंटी करप्शन विभाग से संपर्क किया। शिकायत दर्ज होते ही भ्रष्टाचार निवारण संगठन ने पूरे मामले की गोपनीय जांच शुरू की और ट्रैप की योजना बनाई गई।

🚨 ट्रैप ऑपरेशन: रंगे हाथ गिरफ्तारी

एंटी करप्शन टीम के प्रभारी धनंजय सिंह के अनुसार, शिकायत की पुष्टि के बाद बृजेश यादव को निर्देश दिया गया कि वह दरोगा से संपर्क बनाए रखें। बातचीत के दौरान एफआईआर से नाम निकालने के बदले रिश्वत देने की सहमति दर्शाई गई।

मंगलवार दोपहर दरोगा अमर पटेल ने बृजेश यादव को नवाबगंज ब्लॉक परिसर में बुलाया। तय योजना के तहत बृजेश यादव के पास केमिकल लगे नोट थे। जैसे ही दरोगा ने पैसे अपने हाथ में लिए, पहले से घात लगाए बैठी ट्रैप टीम ने उसे मौके पर ही पकड़ लिया।

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रंगे हाथ पकड़े जाने के बाद दरोगा के चेहरे से हवाइयां उड़ गईं। मौके पर मौजूद लोगों के बीच अफरा-तफरी मच गई, वहीं पुलिस विभाग में इस कार्रवाई की खबर तेजी से फैल गई।

⚖️ एफआईआर और कोर्ट में पेशी

ट्रैप के बाद आरोपी दरोगा के खिलाफ वजीरगंज थाने में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कराई गई। एंटी करप्शन टीम ने बताया कि आरोपी को बुधवार को गोरखपुर स्थित भ्रष्टाचार निवारण न्यायालय में पेश किया जाएगा।

इस कार्रवाई को विभाग ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश के रूप में पेश किया है, लेकिन सवाल यह भी है कि ऐसे कितने मामले हैं जो शिकायत के अभाव में दबा दिए जाते हैं।

🔍 महत्वपूर्ण तथ्य:
दरोगा अमर पटेल पर यह पहला आरोप नहीं है। इससे पहले भी घूस मांगने और उत्पीड़न के गंभीर आरोप सामने आ चुके हैं।

🕵️‍♂️ पहले भी लग चुके हैं गंभीर आरोप

विश्नोहरपुर क्षेत्र में तैनाती के दौरान भी दरोगा अमर पटेल पर घूस मांगने के आरोप लगे थे। तुलसीपुर माझा निवासी रामदेव यादव ने पेड़ कटान और मिट्टी के अवैध खनन की शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल पर की थी।

जब शिकायतों का सही निस्तारण नहीं हुआ और रामदेव यादव ने बार-बार पोर्टल पर शिकायत की, तो आरोप है कि इससे नाराज दरोगा ने उन्हें जबरन हवालात में डाल दिया। आरोपों में यह भी कहा गया कि फर्जी मुकदमे में फंसाने और छोड़ने के बदले चार हजार रुपये की मांग की गई थी।

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यह मामला भी सीएम पोर्टल पर दर्ज हुआ था, जिससे साफ होता है कि आरोपी दरोगा का रिकॉर्ड पहले से ही संदिग्ध रहा है।

📢 बड़ा सवाल: सिस्टम कब सुधरेगा?

इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब कानून के रखवाले ही कानून को बिकाऊ बना दें, तो आम नागरिक कहां जाए? हालांकि एंटी करप्शन की कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन यह भी सच है कि ऐसे मामलों की संख्या कहीं अधिक हो सकती है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि जब तक पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और सख्त निगरानी तंत्र नहीं लागू होगा, तब तक भ्रष्टाचार के ऐसे मामले सामने आते रहेंगे।

❓ क्लिक करें और जानें — सवाल व जवाब

दरोगा अमर पटेल को किस मामले में गिरफ्तार किया गया?

दरोगा को एफआईआर से नाम निकालने के बदले दस हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया।

गिरफ्तारी किस टीम ने की?

भ्रष्टाचार निवारण संगठन (एंटी करप्शन) की ट्रैप टीम ने कार्रवाई की।

क्या आरोपी दरोगा पर पहले भी आरोप लगे थे?

हां, पहले भी घूस मांगने, जबरन हवालात में डालने और फर्जी मुकदमे की धमकी देने के आरोप लगे थे।

आरोपी को कहां पेश किया जाएगा?

आरोपी को गोरखपुर स्थित भ्रष्टाचार निवारण न्यायालय में पेश किया जाएगा।

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