अवैध शराब ठेका के खिलाफ महिलाओं का फूटा गुस्सा, उपखंड कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन

कामां उपखंड कार्यालय में अवैध शराब ठेके के विरोध में नारेबाजी करती नौनेरा गांव की ग्रामीण महिलाएं

✍️ हिमांशु मोदी की रिपोर्ट
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अवैध शराब ठेका के खिलाफ नौनेरा गांव में सामाजिक अशांति और पारिवारिक तनाव का बड़ा कारण बनता जा रहा है। कामां उपखंड क्षेत्र के नौनेरा गांव में अवैध रूप से संचालित शराब ठेके के खिलाफ शुक्रवार को ग्रामीण महिलाओं का आक्रोश खुलकर सामने आया। बड़ी संख्या में महिलाएं संगठित होकर कामां उपखंड कार्यालय पहुंचीं, जहां उन्होंने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए ठेके को तत्काल प्रभाव से बंद कराने की मांग की। महिलाओं का कहना है कि देसी शराब की आड़ में खुलेआम अंग्रेजी शराब बेची जा रही है, जिससे गांव का माहौल लगातार बिगड़ता जा रहा है।

समाचार सार : नौनेरा गांव में अवैध शराब ठेके के कारण घरेलू हिंसा, झगड़े और बच्चों पर पड़ रहे दुष्प्रभाव को लेकर महिलाएं सड़कों पर उतरीं। उपखंड कार्यालय पहुंचकर प्रशासन को चेतावनी दी गई कि यदि ठेका बंद नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज होगा।

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जाटव मोहल्ले में अवैध संचालन का आरोप

प्रदर्शन में शामिल महिलाओं ने आरोप लगाया कि नौनेरा गांव के जाटव मोहल्ले में लंबे समय से यह शराब ठेका अवैध रूप से संचालित हो रहा है। नियमानुसार अनुमति के बिना ठेके का संचालन किया जा रहा है और प्रशासनिक आंखों के सामने नियमों को ताक पर रखकर शराब बेची जा रही है। महिलाओं का कहना है कि ठेकेदार देसी शराब के नाम पर अंग्रेजी शराब बेच रहा है, जिससे शराब की उपलब्धता और नशे का स्तर दोनों बढ़ गए हैं।

घरेलू हिंसा और सामाजिक तनाव में इजाफा

महिलाओं ने बताया कि अवैध शराब ठेके की वजह से गांव में घरेलू हिंसा की घटनाएं बढ़ी हैं। शराब पीकर घर लौटने वाले पुरुषों के कारण परिवारों में झगड़े, मारपीट और मानसिक उत्पीड़न आम हो गया है। कई महिलाओं ने कहा कि उनके घरों का आर्थिक संतुलन बिगड़ गया है और बच्चों की पढ़ाई पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। नशे के कारण गांव का शांत वातावरण अशांत हो चुका है।

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बच्चों और युवाओं पर पड़ रहा बुरा असर

प्रदर्शनकारी महिलाओं का कहना है कि शराब की खुली बिक्री से बच्चों और युवाओं पर भी गलत असर पड़ रहा है। कम उम्र के लड़के शराबियों के संपर्क में आ रहे हैं, जिससे उनका भविष्य खतरे में पड़ता नजर आ रहा है। महिलाओं ने चिंता जताई कि यदि समय रहते ठेके को बंद नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ी नशे की गिरफ्त में चली जाएगी।

नारेबाजी से गूंजा उपखंड कार्यालय परिसर

उपखंड कार्यालय पहुंचीं महिलाओं ने “अवैध ठेका बंद करो”, “दारू बेचने वालों पर कार्रवाई करो” और “गांव बचाओ, नशा हटाओ” जैसे नारे लगाए। महिलाओं की एकजुटता और आक्रोश को देखकर कार्यालय परिसर में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा, लेकिन महिलाओं की चेतावनी साफ थी।

प्रशासन को सौंपा ज्ञापन

प्रदर्शन के बाद महिलाओं के प्रतिनिधिमंडल ने उपखंड अधिकारी को एक लिखित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में अवैध शराब ठेके को तत्काल प्रभाव से बंद कराने, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और गांव में नियमित निगरानी व्यवस्था लागू करने की मांग की गई। महिलाओं ने कहा कि यह केवल कानून व्यवस्था का नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा और महिलाओं के सम्मान से जुड़ा मुद्दा है।

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कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी

महिलाओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि प्रशासन ने शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाए तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। गांव की महिलाएं सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगी और यह प्रदर्शन केवल नौनेरा तक सीमित नहीं रहेगा। उनका कहना है कि वे अपने परिवार, बच्चों और गांव के भविष्य के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।

नौनेरा गांव में उठते सवाल

इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अवैध शराब ठेका लंबे समय से संचालित हो रहा था, लेकिन संबंधित विभागों ने समय रहते कार्रवाई नहीं की। अब जब महिलाएं खुद सड़क पर उतरी हैं, तब प्रशासन की भूमिका निर्णायक साबित होगी।

भरतपुर के आरबीएम अस्पताल के पीएमओ डॉ. नगेन्द्र भदौरिया की फाइल फोटो
भरतपुर आरबीएम अस्पताल के पीएमओ डॉ. नगेन्द्र भदौरिया, जिनका नाम हालिया प्रशासनिक निर्णयों को लेकर चर्चा में है।

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