बाराबंकी। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या, बच्चों पर हो रहे हमलों और रेबीज जैसे जानलेवा खतरे को देखते हुए प्रशासन ने एक असाधारण लेकिन महत्वपूर्ण फैसला लिया है। अब जिले की नगर पालिका परिषद और नगर पंचायत क्षेत्रों में सरकारी और निजी विद्यालयों के शिक्षकों को आवारा कुत्तों की गणना की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
बेसिक शिक्षा अधिकारी नवीन पाठक द्वारा जारी आदेश के अनुसार, जिले के प्रत्येक नगर निकाय क्षेत्र में निजी और सरकारी विद्यालयों से एक-एक शिक्षक को नोडल अधिकारी नामित किया गया है। यह निर्णय न्यायालय के आदेश और शासन के निर्देशों के अनुपालन में लिया गया है।
न्यायालय के आदेश और जनस्वास्थ्य की पृष्ठभूमि
बीते कुछ वर्षों में बाराबंकी सहित उत्तर प्रदेश के कई जिलों में आवारा कुत्तों के हमलों की घटनाओं में लगातार इजाफा हुआ है। खासतौर पर स्कूली बच्चों और बुजुर्गों पर हुए हमलों ने प्रशासन को गंभीर चिंता में डाल दिया है। रेबीज जैसी बीमारी, जो समय पर इलाज न मिलने पर जानलेवा साबित होती है, उसके मामलों में भी वृद्धि दर्ज की गई है।
गूगल शीट से होगी आवारा कुत्तों की गणना
बीएसए कार्यालय के अनुसार, आवारा कुत्तों की संख्या से जुड़ा पूरा डेटा गूगल शीट के माध्यम से एकत्र किया जाएगा। नोडल शिक्षक अपने-अपने क्षेत्र में भ्रमण कर कुत्तों की वास्तविक संख्या दर्ज करेंगे और निर्धारित प्रारूप में ऑनलाइन अपलोड करेंगे, ताकि नगर निकाय समयबद्ध कार्रवाई कर सकें।
31 दिसंबर को शासन स्तर पर समीक्षा
इस अभियान के लिए समय-सीमा भी तय कर दी गई है। 31 दिसंबर को शासन स्तर पर इसकी समीक्षा की जाएगी। इससे पहले सभी विद्यालयों को नोडल शिक्षक का विवरण और कुत्तों की संख्या अनिवार्य रूप से अपलोड करनी होगी।
कुत्ता काटने पर इलाज की जिम्मेदारी
इस आदेश का सबसे संवेदनशील पहलू यह है कि यदि स्कूल परिसर या उसके आसपास किसी बच्चे अथवा व्यक्ति को आवारा कुत्ता काटता है, तो नोडल शिक्षक की जिम्मेदारी होगी कि वह पीड़ित को तत्काल एंटी-रेबीज इंजेक्शन सहित इलाज की व्यवस्था कराए। नोडल शिक्षक का नाम और मोबाइल नंबर स्कूल गेट पर चस्पा किया जाएगा।
250 शिक्षक बनाए गए नोडल अधिकारी
नगर पालिका परिषद बाराबंकी सहित बंकी, सतरिख, जैदपुर, रामसनेहीघाट, फतेहपुर, बेलहरा, देवा, रामनगर, हैदरगढ़, सुबेहा, सिद्धौर, टिकैतनगर और दरियाबाद नगर पंचायतों में कुल 250 शिक्षकों को नोडल अधिकारी बनाया गया है।
प्रशासनिक प्रयोग या नई व्यवस्था?
जहां एक ओर यह निर्णय जनस्वास्थ्य और बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से अहम माना जा रहा है, वहीं शिक्षकों के बीच इसे लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। प्रशासन का कहना है कि यह अस्थायी लेकिन आवश्यक व्यवस्था है, जिसका उद्देश्य सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
❓ सवाल-जवाब
शिक्षकों को नोडल अधिकारी क्यों बनाया गया?
क्योंकि शिक्षक स्थानीय स्तर पर सबसे संगठित और भरोसेमंद नेटवर्क होते हैं।
कुत्ता काटने पर शिक्षक क्या करेंगे?
पीड़ित को तुरंत एंटी-रेबीज इंजेक्शन और इलाज दिलवाने में मदद करेंगे।
इस योजना की समीक्षा कब होगी?
31 दिसंबर को शासन स्तर पर इस योजना की समीक्षा की जाएगी।
यह रिपोर्ट आधिकारिक आदेशों और प्रशासनिक दस्तावेजों के आधार पर तैयार की गई है। समाचार का उद्देश्य जनहित में सूचना प्रदान करना है।










