ई-रिक्शा संचालन प्रणाली के माध्यम से नगर यातायात को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है।
सीतापुर जिले के खैराबाद नगर में यह नई व्यवस्था जिलाधिकारी के निर्देश पर नगर पालिका परिषद द्वारा लागू की गई है।
इस प्रणाली का शुभारंभ समाजसेवी एवं अध्यक्ष प्रतिनिधि श्री बेबी अभिषेक गुप्ता द्वारा किया गया।
इस पहल का मूल उद्देश्य ई-रिक्शा के अनियंत्रित संचालन पर लगाम लगाते हुए यात्रियों की सुरक्षा, चालकों की पहचान और नगर की यातायात व्यवस्था को अधिक सुगम बनाना है।
नगर यातायात में ई-रिक्शा की बढ़ती भूमिका
बीते कुछ वर्षों में ई-रिक्शा नगरों के लिए केवल एक परिवहन साधन नहीं, बल्कि आजीविका का मजबूत आधार बन चुके हैं।
खैराबाद जैसे कस्बाई क्षेत्रों में ई-रिक्शा ने उन मार्गों तक पहुंच बनाई है, जहां बड़े वाहन नहीं जा पाते।
हालांकि, तेजी से बढ़ती संख्या के साथ अव्यवस्थित संचालन, यातायात जाम, दुर्घटनाओं और यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े सवाल भी सामने आने लगे थे।
ई-रिक्शा संचालन प्रणाली इन्हीं समस्याओं के समाधान के उद्देश्य से तैयार की गई है।
जिलाधिकारी के निर्देश और नगर पालिका की जिम्मेदारी
जिलाधिकारी सीतापुर के स्पष्ट निर्देशों के बाद नगर पालिका परिषद खैराबाद ने इस दिशा में ठोस कदम उठाए।
प्रशासन का मानना है कि यदि ई-रिक्शा संचालन को नियमों के दायरे में लाया जाए, तो न केवल यातायात व्यवस्था सुधरेगी बल्कि दुर्घटनाओं में भी कमी आएगी।
नगर पालिका ने इस प्रणाली के तहत ई-रिक्शा चालकों का पंजीकरण, पहचान और संचालन नियमों को प्राथमिकता दी है।
328 ई-रिक्शा का पंजीकरण—एक अहम उपलब्धि
नगर पालिका परिषद द्वारा अब तक कुल 328 ई-रिक्शा का पंजीकरण किया जा चुका है।
यह आंकड़ा न केवल प्रशासनिक गंभीरता को दर्शाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि चालक वर्ग इस पहल को सकारात्मक रूप से स्वीकार कर रहा है।
पंजीकरण की प्रक्रिया के माध्यम से प्रत्येक ई-रिक्शा की पहचान सुनिश्चित की गई है, जिससे भविष्य में किसी भी प्रकार की शिकायत या दुर्घटना की स्थिति में जिम्मेदारी तय की जा सकेगी।
यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता
ई-रिक्शा संचालन प्रणाली का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यात्रियों की सुरक्षा है।
पहले जहां बिना किसी पहचान के ई-रिक्शा चलते थे, वहीं अब पंजीकृत ई-रिक्शा से यात्रियों में भरोसा बढ़ेगा।
इस व्यवस्था से महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के लिए यात्रा अधिक सुरक्षित होने की उम्मीद है।
नगर पालिका का मानना है कि जब चालक और वाहन दोनों की पहचान स्पष्ट होगी, तो अनुशासन अपने आप बनेगा।
चालकों के लिए भी राहत और सम्मान
यह पहल केवल यात्रियों के लिए ही नहीं, बल्कि ई-रिक्शा चालकों के लिए भी फायदेमंद साबित होगी।
पंजीकरण के बाद चालकों को एक वैध पहचान मिलेगी, जिससे वे अनावश्यक रोक-टोक और संदेह से मुक्त रह सकेंगे।
साथ ही, भविष्य में किसी सरकारी योजना या सहायता का लाभ भी पंजीकृत चालकों को आसानी से मिल सकेगा।
इस तरह ई-रिक्शा संचालन प्रणाली रोजगार की गरिमा को भी मजबूत करती है।
नगर की छवि और यातायात अनुशासन
किसी भी नगर की पहचान उसकी यातायात व्यवस्था से भी बनती है।
अव्यवस्थित ई-रिक्शा संचालन से जहां नगर की छवि प्रभावित होती थी, वहीं नई प्रणाली से खैराबाद को एक अनुशासित और आधुनिक नगर के रूप में स्थापित करने की कोशिश की जा रही है।
यातायात नियमों का पालन, निर्धारित मार्गों पर संचालन और सीमित संख्या में ई-रिक्शा—ये सभी पहलू नगर को बेहतर दिशा देंगे।
भविष्य की योजनाएं और विस्तार
नगर पालिका परिषद के अनुसार यह पहल केवल शुरुआत है।
आने वाले समय में ई-रिक्शा चालकों के लिए प्रशिक्षण, यातायात जागरूकता कार्यक्रम और तकनीकी निगरानी जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं।
यदि यह प्रणाली सफल रहती है, तो इसे अन्य नगरों के लिए मॉडल के रूप में भी अपनाया जा सकता है।
ई-रिक्शा संचालन प्रणाली वास्तव में शहरी परिवहन के भविष्य की एक झलक पेश करती है।
व्यवस्था, सुरक्षा और भरोसे की ओर कदम
खैराबाद में शुरू की गई यह नई व्यवस्था प्रशासनिक इच्छाशक्ति और सामाजिक जरूरतों के संतुलन का उदाहरण है।
ई-रिक्शा जैसे साधारण दिखने वाले परिवहन माध्यम को नियमों और व्यवस्था से जोड़कर नगर पालिका ने यह स्पष्ट कर दिया है कि विकास छोटे कदमों से भी संभव है।
यदि यह प्रणाली ईमानदारी से लागू होती है, तो निश्चय ही खैराबाद की यातायात व्यवस्था एक नई पहचान हासिल करेगी।

