मनरेगा बहाली की मांग और मतदाता सूची में गड़बड़ी पर कांग्रेस का आंदोलन

भाटपाररानी तहसील में मनरेगा बहाली और मतदाता सूची गड़बड़ी के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा नायब तहसीलदार को ज्ञापन सौंपते हुए

✍️इरफान अली लारी की रिपोर्ट
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मनरेगा बहाली की मांग और एसआईआर के तहत प्रकाशित मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भाटपाररानी तहसील मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपते हुए नेताओं ने इसे गरीब-मजदूरों और लोकतंत्र से जुड़ा गंभीर प्रश्न बताया।

मनरेगा बहाली की मांग को लेकर उत्तर प्रदेश के देवरिया जनपद अंतर्गत भाटपाररानी तहसील क्षेत्र में राजनीतिक हलचल उस समय तेज हो गई, जब कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शीर्ष नेतृत्व के निर्देश पर तहसील मुख्यालय पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया। युवा कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष केशवचन्द यादव के नेतृत्व में किए गए इस प्रदर्शन में दो प्रमुख मांगों को केंद्र में रखा गया—पहली, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को पूर्ववत प्रभावी ढंग से बहाल किया जाए और दूसरी, एसआईआर प्रक्रिया के तहत प्रकाशित मतदाता सूची में सामने आई गड़बड़ियों को तत्काल दुरुस्त किया जाए। प्रदर्शन के उपरांत राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन नायब तहसीलदार सुशील कुमार तिवारी को सौंपा गया।

मनरेगा: गांव, गरीब और मजदूर की जीवनरेखा

प्रदर्शन को संबोधित करते हुए केशवचन्द यादव ने कहा कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत के लिए जीवनरेखा है। उन्होंने महात्मा गांधी के उस कथन को उद्धृत किया कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है। इसी दर्शन को आगे बढ़ाते हुए पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने मनरेगा जैसी महत्वाकांक्षी योजना को लागू किया था, ताकि गांव के गरीब, मजदूर और बेरोजगार व्यक्ति को सम्मानजनक रोजगार मिल सके। यादव ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार इस योजना को धीरे-धीरे कमजोर कर समाप्त करने की दिशा में बढ़ रही है।

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उनका कहना था कि मनरेगा के तहत मिलने वाला रोजगार सिर्फ मजदूरी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देता है, पलायन रोकता है और सामाजिक सुरक्षा का आधार बनता है। यदि इस योजना की फंडिंग और संचालन में कटौती की गई, तो इसका सीधा असर गांवों के लाखों परिवारों पर पड़ेगा।

केंद्र-राज्य फंडिंग में बदलाव पर सवाल

कांग्रेस जिला उपाध्यक्ष डॉ. धर्मेन्द्र पांडेय ने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहले मनरेगा में लगभग 90 प्रतिशत धन की व्यवस्था केंद्र सरकार करती थी, जबकि अब राज्यों को 40 प्रतिशत तक का वित्तीय बोझ उठाना पड़ रहा है। इसका परिणाम यह हुआ है कि कई राज्य आर्थिक दबाव के कारण योजना को प्रभावी ढंग से संचालित नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने इसे गरीब और मजदूर विरोधी नीति करार दिया।

डॉ. पांडेय के अनुसार, जब केंद्र अपनी जिम्मेदारी से पीछे हटता है, तो उसका खामियाजा सीधे ग्रामीण मजदूर को भुगतना पड़ता है। समय पर मजदूरी न मिलना, काम के दिनों में कटौती और परियोजनाओं का अधूरा रह जाना—ये सभी समस्याएं इसी नीति परिवर्तन का नतीजा हैं।

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मतदाता सूची में गड़बड़ी और लोकतंत्र का सवाल

प्रदर्शन का दूसरा अहम मुद्दा एसआईआर के तहत प्रकाशित नई मतदाता सूची रहा। कांग्रेस पंचायती राज प्रकोष्ठ के प्रदेश महासचिव चंद्रभूषण पांडेय ने कहा कि नई सूची में गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं। कई मामलों में 2003 की मतदाता सूची और वर्तमान सूची में एक ही व्यक्ति का नाम अलग-अलग तरीके से दर्ज है, कहीं नाम गायब है तो कहीं विवरण में त्रुटियां हैं।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते इन गड़बड़ियों को ठीक नहीं किया गया, तो बड़ी संख्या में पात्र मतदाता अपने मताधिकार से वंचित हो सकते हैं। यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि लोकतंत्र की जड़ों पर चोट है। सभी पात्र नागरिकों का नाम मतदाता सूची में होना लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद है।

ज्ञापन में क्या-क्या मांगे रखीं गईं

राष्ट्रपति को सौंपे गए ज्ञापन में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट रूप से मांग की कि मनरेगा योजना को पूर्व की तरह पूरी वित्तीय और प्रशासनिक मजबूती के साथ लागू किया जाए। साथ ही, मजदूरों को समय पर भुगतान सुनिश्चित हो, काम के दिनों में कटौती न की जाए और पंचायत स्तर पर पारदर्शिता बढ़ाई जाए। मतदाता सूची के संदर्भ में एसआईआर प्रक्रिया की पुनः समीक्षा कर सभी त्रुटियों को दूर करने और किसी भी पात्र मतदाता का नाम न कटे, यह सुनिश्चित करने की अपील की गई।

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कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं की मौजूदगी

इस मौके पर बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। ज्ञापन सौंपने वालों में जनार्दन वर्मा, जगरनाथ यादव, जितेन्द्र यादव, सलीम अली, एडवोकेट इंदू भूषण शुक्ला, राणा प्रताप सिंह एडवोकेट, मनीष रजक, कन्हैया कुशवाहा, जेपी यादव, विराट यादव, हरिश्चंद्र यादव, जावेद अख्तर, अवधकिशोर, श्रीकांत यादव, भरत मिश्र, सुग्रीव कुशवाहा, बाबूलाल सिंह और विशाल मद्देशिया सहित कई नाम प्रमुख रहे। सभी ने एक स्वर में मनरेगा बहाली और निष्पक्ष मतदाता सूची की मांग दोहराई।

कुल मिलाकर, भाटपाररानी तहसील मुख्यालय पर हुआ यह प्रदर्शन केवल एक राजनीतिक गतिविधि नहीं, बल्कि ग्रामीण रोजगार और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर संदेश था। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यदि इन मुद्दों पर सरकार ने शीघ्र कदम नहीं उठाए, तो आंदोलन को और व्यापक स्तर पर ले जाया जाएगा।

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