उत्तर प्रदेश बिजली माफी योजना:
घोषणाओं और ज़मीनी हकीकत के बीच पिसते उपभोक्ता, अफसरशाही पर गंभीर सवाल

लखनऊ के गैहरू और नादरगंज पावर हाउस में बिजली माफी योजना को लेकर परेशान उपभोक्ता, कार्यालय के बाहर खड़ी भीड़ और अव्यवस्था का दृश्य

कमलेश कुमार चौधरी की रिपोर्ट
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इंट्रो: उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बिजली उपभोक्ताओं को राहत देने के उद्देश्य से घोषित बिजली बिल माफी योजना राजधानी लखनऊ में ही सवालों के घेरे में आ गई है।
सरकार के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद गैहरू पावर हाउस और नादरगंज पावर हाउस से जुड़े सैकड़ों उपभोक्ता महीनों से भटकने को मजबूर हैं।
ब्याज माफी और मूलधन में छूट की घोषणा कागज़ों तक सीमित दिख रही है, जबकि ज़मीनी स्तर पर उपभोक्ताओं को कथित भ्रष्टाचार और अफसरशाही की बेरुख़ी का सामना करना पड़ रहा है।

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा यह दावा किया गया कि दिसंबर से मार्च के बीच बिजली उपभोक्ताओं को बिलों में ब्याज पूरी तरह माफ किया जाएगा और साथ ही मूलधन में 25, 20 और 15 प्रतिशत तक की राहत दी जाएगी।
लेकिन राजधानी लखनऊ में हालात इसके ठीक उलट नज़र आ रहे हैं।

गैहरू और नादरगंज पावर हाउस क्षेत्र के उपभोक्ताओं का कहना है कि योजना की घोषणा के बाद उन्हें उम्मीद जगी थी कि वर्षों से चले आ रहे बिल विवादों का समाधान होगा। शुरुआती दिनों में कुछ उपभोक्ताओं के मामलों का निस्तारण भी हुआ, लेकिन इसके बाद प्रक्रिया अचानक ठप पड़ गई। आज स्थिति यह है कि उपभोक्ताओं की भीड़ पावर हाउसों के बाहर रोज़ उमड़ रही है, मगर समाधान शून्य है।

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बिल माफी योजना या अफसरों की मनमानी?

उपभोक्ताओं के आरोप बेहद गंभीर हैं। उनका कहना है कि जिन उपभोक्ताओं पर मात्र 10 हजार रुपये का बकाया था,
उनके कनेक्शन जेई के आदेश पर काट दिए गए। संविदा कर्मियों द्वारा मीटर उखाड़कर पावर हाउस में जमा कराए गए
और बाद में उन्हीं उपभोक्ताओं के घर लाखों रुपये के बिजली बिल भेज दिए गए।

जब पीड़ितों ने इस पर आपत्ति जताई तो कथित तौर पर ‘सेटलमेंट’ के नाम पर 30 से 40 हजार रुपये की मांग की गई।
गरीब किसान, मजदूर और दिहाड़ी पर काम करने वाले उपभोक्ता जब इतनी बड़ी रकम देने में असमर्थ रहे,
तो उनके मीटर बिलों पर रोक लगा दी गई। इसके बाद उन्हें बिजली माफी योजना का लाभ भी नहीं दिया गया।

लिखित शिकायतें, लेकिन समाधान शून्य

पीड़ित उपभोक्ताओं का दावा है कि उन्होंने पिछले एक वर्ष में एसडीओ और उपखंड अधिकारियों को सैकड़ों बार लिखित शिकायतें दीं। पत्रकारों के माध्यम से भी समस्याएं अधिकारियों तक पहुंचाई गईं, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला। न तो फर्जी बिलों की जांच हुई और न ही माफी योजना का लाभ मिला।

यह सवाल अब केवल बिजली बिल का नहीं, बल्कि शासन-प्रशासन की जवाबदेही का बन चुका है।
उपभोक्ताओं का कहना है कि यदि मुख्यमंत्री स्तर से घोषित योजनाएं भी ज़मीनी अधिकारियों की मनमानी की भेंट चढ़ जाएं, तो आम जनता किस पर भरोसा करे?

गरीब, किसान और मजदूर सबसे ज़्यादा प्रभावित

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इस पूरी व्यवस्था का सबसे बड़ा बोझ गरीब, किसान और अनपढ़ उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है।
दिन भर मजदूरी करके परिवार पालने वाले लोग सुबह से शाम तक पावर हाउसों के चक्कर लगा रहे हैं। मजदूरी छूट रही है, खर्च बढ़ रहा है और मानसिक तनाव अलग।

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लखनऊ के कृष्ण लोक कॉलोनी क्षेत्र में स्थित बन्थरा फीडर से जुड़े उपभोक्ताओं का कहना है कि
नादरगंज पावर हाउस को भी खत्म कर उन्हें और दूर भेज दिया गया।
स्थिति यह है कि लोगों का आधा दिन तो पावर हाउस का पता पूछने में ही निकल जा रहा है।

सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता पर सवाल

उपभोक्ताओं का आक्रोश अब खुलकर सामने आ रहा है। उनका कहना है कि यदि योजनाओं का लाभ केवल कागज़ों में ही मिलना है, तो ऐसी योजनाओं का कोई औचित्य नहीं।
बिजली विभाग की कार्यप्रणाली सरकार की मंशा पर भी सवाल खड़े कर रही है।

लोगों का यह भी कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो भारी-भरकम बिजली बिल आने वाले समय में विभाग के लिए ही नासूर बन जाएंगे।
जनता में असंतोष बढ़ रहा है, जिसका सीधा असर सरकार की छवि पर पड़ेगा।

29 दिसंबर 2025: उपभोक्ताओं की आपबीती

आज दिनांक 29/12/2025 को पत्रकारों द्वारा जब बिजली उपभोक्ताओं से बातचीत की गई, तो लगभग सभी ने एक ही दर्द बयां किया।
पिछले एक महीने से वे बिजली माफी योजना के तहत पावर हाउसों के चक्कर काट रहे हैं।

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सैकड़ों लिखित शिकायतों के बावजूद अधिकारी बात करने से कतरा रहे हैं।
एसडीओ से लेकर जेई और कंप्यूटर ऑपरेटर तक, कोई भी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है।

क्या यह वही सुशासन है?

यह पूरा मामला उत्तर प्रदेश में सुशासन के दावों की भी परीक्षा ले रहा है।
सरकार एक ओर राहत योजनाओं का प्रचार कर रही है,
तो दूसरी ओर ज़मीनी स्तर पर वही योजनाएं हवा-हवाई साबित हो रही हैं।

लखनऊ के गैहरू और नादरगंज पावर हाउस में बिजली माफी योजना को लेकर परेशान उपभोक्ता, कार्यालय के बाहर खड़ी भीड़ और अव्यवस्था का दृश्य।
बिजली माफी योजना के तहत समाधान की उम्मीद में लखनऊ के गैहरू और नादरगंज पावर हाउस के बाहर जुटे सैकड़ों उपभोक्ता, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी नहीं मिला निस्तारण।

अब देखना यह है कि क्या मुख्यमंत्री कार्यालय इस पूरे मामले का संज्ञान लेकर बिजली विभाग, विशेषकर मध्यांचल पावर कॉरपोरेशन के अधिकारियों पर कार्रवाई करता है,
या फिर उपभोक्ताओं को यूं ही दर-दर भटकने के लिए छोड़ दिया जाएगा।

जनता के सवाल, प्रशासन के जवाब?

❓ बिजली माफी योजना का लाभ क्यों नहीं मिल रहा?

उपभोक्ताओं का आरोप है कि विभागीय अधिकारियों की मनमानी, फर्जी बिल और कथित वसूली के कारण योजना का लाभ रोका जा रहा है।

❓ क्या लिखित शिकायतों पर कोई कार्रवाई हुई?

पीड़ितों के अनुसार, सैकड़ों शिकायतों के बावजूद अब तक किसी भी मामले का ठोस समाधान नहीं हुआ है।

❓ सबसे ज़्यादा प्रभावित कौन है?

गरीब किसान, मजदूर और दिहाड़ी पर काम करने वाले उपभोक्ता इस व्यवस्था से सबसे अधिक प्रभावित हैं।

❓ समाधान क्या हो सकता है?

निष्पक्ष जांच, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई और योजनाओं का पारदर्शी क्रियान्वयन ही इसका एकमात्र समाधान है।

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