बृज भूषण शरण सिंह
ने कांग्रेस पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को प्रतिबंधित करने की ऐतिहासिक कोशिशों का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि पर्यावरणीय संकट, विशेषकर पराली जलाने से उत्पन्न प्रदूषण से निपटने के लिए किसानों को
दंडित करने से पहले समझाने, संसाधन देने और तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराने की आवश्यकता है।
गोंडा मुख्यालय के सर्कुलर रोड पर नवनिर्मित चैरिटेबल ब्लड बैंक के उद्घाटन अवसर पर मीडिया से बातचीत करते हुए
बृज भूषण शरण सिंह ने राष्ट्रीय राजनीति से लेकर पर्यावरण, सामाजिक विवादों और न्यायिक निर्णयों तक
कई संवेदनशील मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। उनका वक्तव्य ऐसे समय आया है जब राजधानी दिल्ली और
आसपास के इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 400 के पार पहुंच चुका है और पराली जलाने का मुद्दा
फिर से केंद्र में है।
कांग्रेस–आरएसएस विवाद: ‘बैन की कोशिशें पहले भी हुई हैं’
कांग्रेस सांसद
मणिकम टैगोर
द्वारा आरएसएस की तुलना अल-कायदा से किए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए बृज भूषण सिंह ने कहा कि
यह कोई नई बात नहीं है। उनके अनुसार, कांग्रेस ने अतीत में भी
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश की थी और एक समय ऐसा भी रहा जब बैन लागू किया गया।
स्वास्थ्य तंत्र की एक बेचैन तस्वीर
उन्होंने कहा कि किसी विचारधारा या संगठन को देशद्रोह या नफरत से जोड़कर देखना राजनीतिक शॉर्टकट हो सकता है,
लेकिन इससे सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचता है। बृज भूषण के मुताबिक, ऐसे बयान केवल सुर्खियां बटोरने
का माध्यम बनते हैं, जबकि ज़मीनी समस्याओं—जैसे किसान, रोजगार और पर्यावरण—पर ठोस संवाद की ज़रूरत है।
दिग्विजय–राहुल–मोहन भागवत बयान पर संतुलित प्रतिक्रिया
आरएसएस को लेकर कांग्रेस के भीतर ही आए विरोधाभासी बयानों पर पूछे गए सवाल के जवाब में
बृज भूषण सिंह ने संयमित रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि
दिग्विजय सिंह
और
राहुल गांधी
दोनों ही बड़े नेता हैं, और उनके बीच चल रही बयानबाज़ी में टिप्पणी करना उचित नहीं।
इसी क्रम में,
मोहन भागवत
द्वारा दिग्विजय सिंह को लेकर दिए गए बयान पर भी उन्होंने कहा कि राजनीति में मतभेद स्वाभाविक हैं,
लेकिन संवाद का स्तर गिरना नहीं चाहिए। यह टिप्पणी उनके संतुलन और सार्वजनिक मंच पर शब्दों की
मर्यादा को रेखांकित करती है।
ब्राह्मण संगठन विवाद पर विराम की अपील
ब्राह्मण संगठन और हालिया बैठकों से जुड़े विवाद पर बृज भूषण सिंह ने स्पष्ट कहा कि इस विषय को
और तूल देने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने दोहराया कि वह पहले भी कह चुके हैं कि अब इस पर
राजनीति बंद होनी चाहिए और समाज को आगे बढ़ने देना चाहिए।
उनके अनुसार, जातीय या सामाजिक मुद्दों को राजनीतिक लाभ के लिए उछालना दीर्घकाल में समाज के लिए
हानिकारक सिद्ध होता है। ऐसे मामलों में शांति, संवाद और सहमति ही समाधान का रास्ता है।
AQI 400 के पार: किसानों से संवाद, उपकरण और फिर सख्ती
दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण और पराली जलाने पर पूछे गए सवाल पर बृज भूषण सिंह ने व्यावहारिक
दृष्टिकोण रखा। उन्होंने कहा कि किसानों को अपराधी मानने से पहले उनके बीच जाकर संवाद करना होगा—
उन्हें पराली जलाने से होने वाले नुकसान और वैकल्पिक उपायों के लाभ समझाने होंगे।
उन्होंने जोर दिया कि सरकार को किसानों को आधुनिक उपकरण, मशीनें और आर्थिक सहायता उपलब्ध करानी चाहिए,
ताकि पराली प्रबंधन संभव हो सके। इसके बाद भी यदि कोई नियमों की अनदेखी करता है, तो सख्ती
अंतिम विकल्प के रूप में अपनाई जानी चाहिए।
न्यायिक फैसलों पर टिप्पणी से परहेज़
कुलदीप सिंह सेंगर को जमानत और अदालत द्वारा लगाई गई शर्तों के सवाल पर बृज भूषण सिंह ने कहा कि
न्यायालय के निर्णय पर उनकी ओर से कोई टिप्पणी नहीं बनती। उन्होंने स्पष्ट किया कि
भारत का सर्वोच्च न्यायालय
जो निर्णय लेता है, उसका सम्मान किया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी लोकतंत्र में न्यायपालिका का सम्मान अनिवार्य है और अदालतें
कानून व साक्ष्यों के आधार पर फैसले करती हैं—राजनीतिक बयानबाज़ी से दूर रहना ही बेहतर है।
कार्यक्रम की पृष्ठभूमि: समाजसेवा का मंच
यह पूरा बयान उस अवसर पर आया जब बृज भूषण सिंह गोंडा में एक नवनिर्मित चैरिटेबल ब्लड बैंक के
उद्घाटन के लिए पहुंचे थे। कार्यक्रम का उद्देश्य समाजसेवा और स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ावा देना था,
लेकिन मीडिया से बातचीत के दौरान राष्ट्रीय और स्थानीय राजनीति से जुड़े अहम मुद्दे भी सामने आए।
इससे स्पष्ट होता है कि सार्वजनिक मंच केवल उद्घाटन या औपचारिकता तक सीमित नहीं रहते,
बल्कि वे जन-चिंताओं, पर्यावरण और लोकतांत्रिक विमर्श के केंद्र भी बनते हैं।
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बृज भूषण सिंह ने कांग्रेस पर क्या आरोप लगाया?
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अतीत में आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश की थी
और आज भी संगठन को बदनाम करने वाले बयान दिए जा रहे हैं।
पराली जलाने पर उनका समाधान क्या है?
किसानों को पहले समझाना, वैकल्पिक उपकरण और सहायता देना, और अंतिम विकल्प के रूप में सख्ती।
AQI बढ़ने पर उन्होंने किसे जिम्मेदार ठहराया?
उन्होंने कहा कि समस्या बहुआयामी है और समाधान संवाद, संसाधन और नीति के संतुलन से निकलेगा।
न्यायिक फैसलों पर उनकी क्या राय रही?
उन्होंने कहा कि अदालत के निर्णयों का सम्मान होना चाहिए और उन पर टिप्पणी से बचना चाहिए।










