कामां (राजस्थान) में 2025 का विकास आईना : सफाई–पेयजल के सरकारी दावे और ज़मीनी सच

कामां राजस्थान में 2025 के दौरान शहरी सफाई व्यवस्था, कचरा वाहन, ग्रामीण पेयजल टंकी और जल जीवन मिशन की वास्तविक स्थिति दर्शाती फीचर इमेज


कामां (राजस्थान) में वर्ष 2025 के सरकारी विकास कार्य—सफाई और पेयजल पर केंद्रित एक दस्तावेजी रिपोर्ट

हिमांशु मोदी की रिपोर्ट

राजस्थान के पूर्वी छोर पर स्थित कामां कोई महानगर नहीं, बल्कि एक ऐसा कस्बा है जहाँ विकास की वास्तविकता घोषणाओं से अधिक दैनिक अनुभवों में मापी जाती है। वर्ष 2025 में सरकारी स्तर पर जिन योजनाओं और अभियानों का शोर सुनाई दिया, उनमें सफाई और पेयजल दो ऐसे क्षेत्र रहे जो सीधे जनजीवन से जुड़े हैं। यह रिपोर्ट उन्हीं दावों, उपलब्धियों, कमियों और नागरिक शिकायतों के बीच के अंतराल को समझने का प्रयास है—शहरी और ग्रामीण परिदृश्य की तुलनात्मक पड़ताल के साथ।

सफाई व्यवस्था : अभियान, व्यवहार और हकीकत

(क) शहरी क्षेत्र—नगरपालिका के भीतर

2025 में कामां नगर क्षेत्र में स्वच्छता को लेकर तीन प्रमुख हस्तक्षेप देखने को मिले—डोर-टू-डोर कचरा संग्रह का विस्तार, मशीनीकृत सफाई (ट्रॉली/ट्रैक्टर आधारित) तथा नालों की आंशिक मरम्मत व डी-सिल्टिंग।

दावे: नगर के लगभग 70–75% वार्डों में नियमित कचरा उठान, सप्ताह में एक बार मुख्य सड़कों पर यांत्रिक सफाई और सार्वजनिक स्थलों पर डस्टबिन की संख्या में वृद्धि।

ज़मीनी तस्वीर: मुख्य बाज़ार और प्रशासनिक क्षेत्रों में सफाई अपेक्षाकृत बेहतर दिखी, जबकि बाहरी वार्डों और घनी बस्तियों में अनियमितता बनी रही। कचरा संग्रह वाहन समय पर न पहुँचने की शिकायतें आम रहीं।

नगर स्तर की शिकायतें: दुर्गंध व खुले कचरे की शिकायतें लगभग 40%, नालियों के ओवरफ्लो की समस्या करीब 30%, सफाईकर्मियों की कमी 20% और अन्य कारण 10% रहे।

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कार्रवाई का पक्ष: नगरपालिका स्तर पर शिकायतों का निस्तारण औसतन 3–7 दिनों में दर्ज किया गया, किंतु कई मामलों में स्थायी समाधान के बजाय अस्थायी सफाई तक ही कार्रवाई सीमित रही।

(ख) ग्रामीण क्षेत्र—पंचायतों के भीतर

ग्रामीण कामां में सफाई व्यवस्था वर्ष 2025 में मुख्यतः स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की संरचना के अंतर्गत रही। अधिकांश पंचायतों में खुले में शौच से मुक्ति की स्थिति, ग्राम स्तरीय सफाईकर्मियों की नियुक्ति और सामुदायिक स्थलों की सफाई दर्ज की गई।

वास्तविकता: शौचालय तो उपलब्ध हैं, लेकिन पानी और रख-रखाव की कमी, कचरा निस्तारण की स्थायी व्यवस्था का अभाव और जागरूकता अभियानों की कमजोरी साफ दिखाई दी।

ग्रामीण शिकायतें: शौचालय अनुपयोगी—35%, नालियों की सफाई न होना—30%, कचरा ढेर—25% और पंचायत स्तर पर उदासीनता—10%।

पेयजल व्यवस्था : पाइपलाइन से टैंकर तक

(क) शहरी कामां—आपूर्ति बनाम आवश्यकता

2025 में नगर क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति का आधार पाइपलाइन नेटवर्क रहा। सरकारी दावों के अनुसार औसतन 45–60 मिनट की जलापूर्ति (एक दिन छोड़कर) की गई और पुराने पाइपलाइन खंडों का आंशिक प्रतिस्थापन हुआ।

हालाँकि ऊँचाई वाले वार्डों में कम दबाव, गर्मियों में टैंकरों पर निर्भरता और पाइपलाइन लीकेज की शिकायतें लगातार सामने आती रहीं।

संकेतात्मक संतोष स्तर: नियमित जलापूर्ति से संतुष्ट—55%, आंशिक संतुष्टि—25%, असंतुष्ट—20%।

(ख) ग्रामीण क्षेत्र—जल जीवन मिशन की परीक्षा

ग्रामीण कामां में 2025 का सबसे बड़ा दावा हर घर नल से जल रहा। अधिकांश गांवों में नल कनेक्शन और जल गुणवत्ता परीक्षण शिविर आयोजित किए गए।

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ज़मीनी स्थिति: नल तो हैं, लेकिन पानी अनियमित है। कई स्थानों पर मोटर और बिजली पर निर्भरता बनी रही, जबकि गर्मियों में जलस्तर गिरने से आपूर्ति बाधित हुई।

ग्रामीण शिकायतें: पानी नहीं आता—40%, गुणवत्ता संदिग्ध—30%, पाइपलाइन क्षतिग्रस्त—20%, शिकायत सुनवाई नहीं—10%।

शिकायत निवारण : प्रक्रिया और प्रभावशीलता

नगरपालिका और पंचायत स्तर पर शिकायत निवारण के लिए हेल्पलाइन, ऑनलाइन पोर्टल और जनसुनवाई जैसे माध्यम उपलब्ध रहे।

पक्ष (सरकार का): शिकायत दर्ज होने का औपचारिक रिकॉर्ड और समयबद्ध निस्तारण का दावा।

विपक्ष (नागरिक अनुभव): कई बार शिकायतें केवल “निस्तारित” दिखा दी जाती हैं, समस्याएँ दोहराती हैं और जवाबदेही तय नहीं हो पाती।

तुलनात्मक निष्कर्ष : शहरी बनाम ग्रामीण

शहरी क्षेत्र में सफाई के दृश्य सुधार दिखाई दिए, लेकिन असमानता बनी रही। ग्रामीण क्षेत्रों में संरचनात्मक कमजोरी अधिक स्पष्ट रही। पेयजल में शहर पाइपलाइन पर निर्भर रहा, जबकि गांवों में नल होने के बावजूद पानी अनियमित रहा। शिकायत निवारण शहरी क्षेत्र में अपेक्षाकृत सक्रिय और ग्रामीण क्षेत्रों में धीमा व औपचारिक रहा। नागरिक संतोष का स्तर कुल मिलाकर मध्यम ही रहा।

विकास, लेकिन अधूरा

वर्ष 2025 में कामां में सफाई और पेयजल के क्षेत्र में कुछ ठोस प्रयास दिखते हैं—यह अस्वीकार नहीं किया जा सकता। लेकिन यह भी उतना ही सच है कि दावे और दैनिक अनुभव के बीच अभी भी एक फासला है। शहरी क्षेत्र में जहाँ दृश्य सुधार प्राथमिकता रहा, वहीं ग्रामीण इलाकों में बुनियादी स्थायित्व अब भी चुनौती बना हुआ है।

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यह रिपोर्ट किसी अंतिम निर्णय का दावा नहीं करती—यह केवल इतना कहती है कि विकास तब सार्थक होगा, जब आंकड़े काग़ज़ से उतरकर नागरिक जीवन में स्थिर राहत बनें।

❓ पाठकों के सवाल — ज़मीनी जवाब

कामां (राजस्थान) में 2025 में सबसे अधिक विकास किस क्षेत्र में हुआ?

वर्ष 2025 में कामां में सरकारी स्तर पर सबसे अधिक ध्यान सफाई व्यवस्था और पेयजल आपूर्ति पर केंद्रित रहा। हालांकि इसका प्रभाव शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में समान नहीं रहा।

क्या कामां नगर क्षेत्र में सफाई व्यवस्था संतोषजनक रही?

मुख्य बाज़ार और प्रशासनिक इलाकों में सफाई में सुधार दिखाई दिया, लेकिन बाहरी वार्डों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में अनियमितता बनी रही।

ग्रामीण कामां में जल जीवन मिशन कितना सफल रहा?

अधिकांश गांवों में नल कनेक्शन उपलब्ध कराए गए, लेकिन पानी की नियमित आपूर्ति, दबाव और गुणवत्ता को लेकर ग्रामीण शिकायतें बनी रहीं।

क्या नागरिक शिकायतों पर प्रशासन ने प्रभावी कार्रवाई की?

शिकायतें दर्ज की गईं, लेकिन कई मामलों में समाधान अस्थायी रहा और वही समस्याएँ दोबारा सामने आती रहीं।

क्या शहरी और ग्रामीण कामां के विकास में असमानता है?

हाँ, शहरी क्षेत्रों में दृश्य सुधार अधिक स्पष्ट रहे, जबकि ग्रामीण इलाकों में बुनियादी स्थायित्व अब भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

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