बेडरूम और ड्राइंग रूम में छिपा दीं 19 गाय और भैंसें
छापे में खुला ऐसा राज, जिसे देखकर अधिकारी सन्न

लखनऊ में नगर निगम की कार्रवाई के दौरान घर के बेडरूम से बाहर निकाली गई गाय और भैंसें

✍️कमलेश कुमार चौधरी की रिपोर्ट
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बेडरूम और ड्राइंग रूम में छिपा दीं 19 गाय और भैंसें—यह वाक्य सुनने में भले ही अतिशयोक्ति लगे, लेकिन उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में नगर निगम की कार्रवाई के दौरान सामने आया यह मामला हकीकत में उससे कहीं अधिक चौंकाने वाला निकला। शहर में अवैध डेयरी संचालन के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत जब नगर निगम और पशु कल्याण विभाग की संयुक्त टीम बिजनौर रोड स्थित रॉयल सिटी कॉलोनी पहुंची, तो उन्हें एक ऐसे घर का सामना करना पड़ा, जहां इंसानों के रहने के कमरों में मवेशियों को छिपाकर रखा गया था।

आलीशान मकान, बंद ताले, तीन घंटे की मशक्कत और फिर खुला ऐसा राज—जहां बेडरूम इंसानों के नहीं, बल्कि गाय-भैंसों के लिए इस्तेमाल हो रहा था।

छापे के लिए पहुंची टीम, बंद मिला संदिग्ध मकान

नगर निगम को लंबे समय से रॉयल सिटी कॉलोनी में अवैध डेयरी संचालन की शिकायतें मिल रही थीं। स्थानीय निवासियों का आरोप था कि कुछ लोग शहरी क्षेत्र में नियमों को ताक पर रखकर भैंस और गाय पाल रहे हैं, जिससे पूरे इलाके में गंदगी, बदबू और बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। इन्हीं शिकायतों के आधार पर पशु कल्याण अधिकारी डॉ. अभिनव वर्मा के नेतृत्व में नगर निगम, पशु कल्याण विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने मौके पर छापा मारा।

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टीम जब एक विशेष मकान के सामने पहुंची, तो वहां बाहर से ताला लगा मिला। आसपास के हालात और सूचना के आधार पर अधिकारियों को संदेह था कि इसी घर में मवेशियों को छिपाया गया है। हालांकि, मकान मालिक की अनुपस्थिति और अंदर से किसी प्रकार की आवाज न आने के कारण कार्रवाई तुरंत संभव नहीं हो सकी।

तीन घंटे बाद खुला ताला, अंदर का नजारा चौंकाने वाला

लगभग तीन घंटे की कड़ी मशक्कत और पुलिस हस्तक्षेप के बाद जब मकान का ताला खुलवाया गया, तो अंदर का दृश्य देखकर अधिकारी भी कुछ पल के लिए स्तब्ध रह गए। जिस घर को बाहर से एक सामान्य और आलीशान आवास समझा जा रहा था, उसके भीतर बेडरूम और ड्राइंग रूम में गाय और भैंसें बंधी हुई थीं।

कमरों के फर्श पर चारों ओर गोबर फैला हुआ था, हवा में तेज दुर्गंध थी और रहने योग्य स्थान को पूरी तरह पशुशाला में बदल दिया गया था। अधिकारियों के अनुसार, यह उनके करियर का पहला मामला था, जब किसी ने नगर निगम की कार्रवाई से बचने के लिए पशुओं को छिपाने हेतु बेडरूम और ड्राइंग रूम का इस्तेमाल किया हो।

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19 पशु जब्त, ऐशबाग कांजी हाउस भेजे गए

इस विशेष कार्रवाई में नगर निगम की टीम ने कुल 19 पशुओं को जब्त किया। जब्त किए गए पशुओं में 11 भैंसें, 4 पड़िया, 3 गाय और 1 बछिया शामिल हैं। सभी पशुओं को तत्काल ऐशबाग स्थित कांजी हाउस भेज दिया गया, जहां उन्हें नियमानुसार रखा गया है।

नगर निगम अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इन पशुओं को तब तक नहीं छोड़ा जाएगा, जब तक संबंधित पशुपालक निर्धारित जुर्माना अदा नहीं करते और कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं होती।

स्थानीय निवासियों की शिकायत बनी कार्रवाई की वजह

रॉयल सिटी कॉलोनी के निवासियों का कहना है कि अवैध डेयरी संचालन के कारण उनका रहना दूभर हो गया था। खुले प्लॉटों और नालियों में गोबर बहाए जाने से जलभराव की समस्या पैदा हो रही थी, जिससे मच्छर और संक्रामक बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा था।

कई बार शिकायत के बावजूद कार्रवाई न होने से लोग नाराज थे, लेकिन इस बार नगर निगम की सख्ती से उन्हें राहत की उम्मीद जगी है।

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विरोध के बावजूद हटाए गए पशु

कार्रवाई के दौरान पशुपालकों और उनके समर्थकों ने जमकर विरोध किया। कुछ लोगों ने पशु गाड़ी के सामने बैठकर रास्ता जाम करने की कोशिश भी की, लेकिन भारी पुलिस बल की मौजूदगी में स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया।

नगर निगम ने दो टूक कहा कि नगर निगम अधिनियम 1959 के तहत शहरी सीमा में भैंस पालन पूरी तरह प्रतिबंधित है। वहीं, गायों के मामले में भी केवल दो पशुओं तक का लाइसेंस मान्य है। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आगे भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

शहर में अवैध डेयरी पर सख्ती का संकेत

बेडरूम और ड्राइंग रूम में छिपा दीं 19 गाय और भैंसें का यह मामला न केवल लखनऊ, बल्कि पूरे प्रदेश के शहरी इलाकों में अवैध डेयरी संचालन की गंभीर तस्वीर पेश करता है। नगर निगम की यह कार्रवाई साफ संकेत देती है कि नियमों की अनदेखी करने वालों पर अब सख्ती तय है, चाहे उन्होंने पशुओं को छिपाने के लिए कितने ही असामान्य तरीके क्यों न अपनाए हों।

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