उत्तर प्रदेश के जौनपुर से मुंबई तक संघर्ष की लंबी राह तय करने वाली फ्लाइट अटेंडेंट पिंकी माली की मौत ने सिर्फ एक परिवार नहीं, बल्कि पूरे समाज को झकझोर दिया है। यह हादसा सुरक्षा, सपनों और व्यवस्था पर कई सवाल छोड़ गया।
जौनपुर। महाराष्ट्र के बारामती में हुए विमान हादसे ने देशभर में गहरा शोक पैदा कर दिया है। इस दर्दनाक दुर्घटना में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के साथ यात्रा कर रही फ्लाइट अटेंडेंट पिंकी माली की मौत ने एक साधारण लेकिन संघर्षशील परिवार की पूरी दुनिया उजाड़ दी। यह हादसा सिर्फ एक तकनीकी दुर्घटना नहीं, बल्कि उन सपनों की असमय समाप्ति है, जिन्हें एक पिता ने वर्षों की मेहनत से सींचा था।
पिंकी माली मूल रूप से उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले की रहने वाली थीं। सीमित संसाधनों और साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि के बावजूद उन्होंने बड़े सपने देखने की हिम्मत की। उनके पिता शिवकुमार माली ने मुंबई में टैक्सी चलाकर परिवार का पालन-पोषण किया। दिन-रात की मेहनत, भीड़भाड़ भरी सड़कों और अस्थिर आमदनी के बीच भी उन्होंने अपनी बेटियों की पढ़ाई में कभी कमी नहीं आने दी।
शिवकुमार माली बताते हैं कि उनका एक ही सपना था कि उनकी बेटियां वह ज़िंदगी जिएं, जो वह खुद नहीं जी सके। उन्होंने पाई-पाई जोड़कर पिंकी की पढ़ाई पूरी कराई और एविएशन सेक्टर में करियर बनाने के उसके फैसले का पूरा समर्थन किया। कठिन ट्रेनिंग, मानसिक दबाव और प्रतिस्पर्धा के बावजूद पिंकी ने हार नहीं मानी और आखिरकार फ्लाइट अटेंडेंट बनने का सपना पूरा किया।
पिछले करीब पांच वर्षों से पिंकी चार्टर्ड विमानों में सेवा दे रही थीं। अपने अनुशासन, व्यवहार और जिम्मेदारी के कारण वह साथ काम करने वालों के बीच काफी सम्मानित थीं। घर की आर्थिक जिम्मेदारी भी काफी हद तक उन्हीं पर थी। माता-पिता का इलाज, छोटी बहन की पढ़ाई और घर का खर्च वह पूरी गंभीरता से संभाल रही थीं।
हादसे से कुछ देर पहले पिंकी ने अपने पिता से फोन पर बात की थी। यही बातचीत आज शिवकुमार माली के जीवन की सबसे भारी याद बन गई है। पिंकी ने कहा था कि वह अजित दादा के साथ बारामती जा रही हैं, उन्हें छोड़ने के बाद नांदेड़ जाएंगी और अगले दिन बात करेंगी। पिता को क्या पता था कि यह बेटी की आखिरी कॉल होगी।
बारामती में यह विमान हादसा तकनीकी कारणों से हुआ या इसमें मानवीय चूक शामिल थी, इसकी जांच अभी जारी है। प्रारंभिक जानकारियों के अनुसार मौसम और तकनीकी खराबी जैसे कारणों की पड़ताल की जा रही है। इस हादसे में पिंकी की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर हलचल मच गई।
इस त्रासदी का एक और दर्दनाक पहलू यह है कि पिंकी के पिता शिवकुमार माली स्वयं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के करीब 35 वर्षों से कार्यकर्ता रहे हैं। उन्होंने संगठन के लिए जमीनी स्तर पर काम किया, रैलियों और अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्हें कभी अंदेशा नहीं था कि राजनीति से जुड़ा एक सफर उनकी निजी ज़िंदगी को इस तरह तोड़ देगा।
जौनपुर और मुंबई दोनों जगह पिंकी के परिवार में मातम पसरा हुआ है। मां बार-बार बेसुध हो रही हैं और छोटी बहन इस सदमे से उबर नहीं पा रही। पड़ोसियों और रिश्तेदारों के अनुसार पिंकी बेहद मिलनसार, जिम्मेदार और परिवार से जुड़ी हुई लड़की थीं। वह जब भी घर आतीं, माता-पिता के लिए समय निकालतीं और पूरे घर का माहौल खुशहाल बना देती थीं।
हादसे के बाद राज्य सरकार और विमानन विभाग की ओर से मुआवजे और सहायता की घोषणाएं की गई हैं। साथ ही दुर्घटना की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं। हालांकि परिवार का कहना है कि किसी भी तरह की आर्थिक सहायता उस खालीपन को नहीं भर सकती, जो उनकी बेटी के जाने से पैदा हुआ है।
यह हादसा कई गंभीर सवाल खड़े करता है। क्या विमानन सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन किया जा रहा है। क्या तकनीकी जांच सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गई है। और सबसे अहम सवाल यह कि क्या हर उड़ान से पहले सुरक्षा को वास्तव में सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है।
पिंकी माली की कहानी आज उन लाखों बेटियों की कहानी बन गई है, जो छोटे शहरों और गांवों से निकलकर बड़े सपने देखती हैं। पिता अपनी सीमित आमदनी के बावजूद उन्हें उड़ान देने की कोशिश करते हैं। बारामती विमान हादसा एक चेतावनी है कि सुरक्षा में की गई छोटी सी लापरवाही भी किसी की पूरी दुनिया छीन सकती है।








