मल्लापुर रास्ते पर गंदा पानी और कीचड़ अब केवल असुविधा का विषय नहीं रहा, बल्कि यह सीतापुर जिले के हरगांव ब्लॉक स्थित मल्लापुर गांव के लिए एक स्थायी संकट बन चुका है। गांव के मुख्य मार्ग पर वर्षों से जमा गंदा पानी और कीचड़ ने आवागमन को कठिन बना दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि यह सड़क कई सालों से मरम्मत की राह देख रही है, लेकिन जिम्मेदारों की उदासीनता के चलते हालात दिन-ब-दिन बदतर होते जा रहे हैं।
ग्रामीणों का सवाल: जब यही रास्ता गांव की ज़रूरत है, तो वर्षों से इसकी सुध क्यों नहीं ली गई? क्या हर बारिश के साथ मल्लापुर को फिर कीचड़ में ही जीना होगा?
हल्की बारिश भी बन जाती है बड़ी मुसीबत
मल्लापुर गांव का यह मुख्य मार्ग बारिश के मौसम में सबसे ज्यादा परेशानी का कारण बनता है। ग्रामीणों के अनुसार, हल्की सी बारिश होते ही सड़क पर पानी भर जाता है और कीचड़ की मोटी परत जम जाती है। पैदल चलना तो दूर, दोपहिया और साइकिल सवारों के लिए भी इस रास्ते से गुजरना जोखिम भरा हो जाता है। कई बार लोग फिसलकर गिर चुके हैं, जिससे बच्चों और बुजुर्गों को विशेष खतरा बना रहता है।
दैनिक जीवन पर सीधा असर
मल्लापुर रास्ते पर गंदा पानी और कीचड़</b गांव के दैनिक जीवन को सीधे प्रभावित कर रहा है। बच्चे स्कूल जाने से कतराते हैं, बुजुर्गों का घर से निकलना मुश्किल हो जाता है और बीमार लोगों को अस्पताल ले जाने में भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार एंबुलेंस भी इस मार्ग से अंदर नहीं आ पाती, जिससे गंभीर स्थिति पैदा हो जाती है।
ग्रामीणों की शिकायतें, लेकिन समाधान नदारद
गांव के निवासी सफ़ील खां, बाबू खां, शालू शर्मा और जगदीश मौर्य सहित कई लोगों ने बताया कि वे इस समस्या को लेकर कई बार ग्राम प्रधान लल्लू राम से मिल चुके हैं। हर बार उन्हें आश्वासन तो मिलता है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं होता। ग्रामीणों का आरोप है कि समस्या वर्षों पुरानी होने के बावजूद अब तक किसी ठोस योजना पर अमल नहीं किया गया।
“खाते में पैसा नहीं” — टलता रहा मामला
ग्रामीणों के अनुसार, ग्राम प्रधान लल्लू राम अक्सर खाते में धनराशि न होने का हवाला देकर मरम्मत कार्य को टाल देते हैं। हालांकि, ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि यदि यह गांव का मुख्य मार्ग है, तो इसके लिए बजट की व्यवस्था क्यों नहीं की गई। क्या विकास योजनाएं केवल कागज़ों तक सीमित हैं? यही सवाल अब गांव की चौपालों में गूंजने लगा है।
जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर उठते सवाल
मल्लापुर के ग्रामीणों का कहना है कि केवल ग्राम प्रधान ही नहीं, बल्कि संबंधित विभागों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी इस समस्या की जानकारी है। इसके बावजूद वर्षों से कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। लोगों का मानना है कि यदि समय रहते सड़क की मरम्मत कर दी जाती, तो आज यह हालत नहीं होती।
स्वच्छता और स्वास्थ्य पर भी खतरा
सड़क पर जमा गंदा पानी केवल आवागमन की समस्या नहीं है, बल्कि यह स्वास्थ्य के लिए भी खतरा बन चुका है। कीचड़ और गंदे पानी में मच्छरों का पनपना आम हो गया है, जिससे डेंगू, मलेरिया और अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में बच्चों में बुखार और संक्रमण की शिकायतें बढ़ जाती हैं।
ग्रामीणों में बढ़ता आक्रोश
मल्लापुर रास्ते पर गंदा पानी और कीचड़</b को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश लगातार बढ़ रहा है। लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही मरम्मत कार्य शुरू नहीं हुआ, तो वे उच्च अधिकारियों से शिकायत करने के साथ-साथ सामूहिक आंदोलन का रास्ता भी अपना सकते हैं। गांव के युवाओं में इस बात को लेकर खास नाराजगी है कि विकास के दावे तो किए जाते हैं, लेकिन बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी होती है।
समाधान की उम्मीद अब भी बाकी
हालांकि, ग्रामीण अब भी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि प्रशासन उनकी समस्या को गंभीरता से लेगा। लोगों की मांग है कि इस मार्ग का तत्काल सर्वे कराकर पक्की सड़क का निर्माण कराया जाए, ताकि आने वाले वर्षों में उन्हें इस परेशानी से न जूझना पड़े। ग्रामीणों का कहना है कि विकास का असली अर्थ तभी है, जब गांव की बुनियादी जरूरतें पूरी हों।






