अचानक बदले मौसम के चलते ठंड और गलन में आई तेज़ बढ़ोतरी ने आम जनजीवन के साथ-साथ स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता भी बढ़ा दी है। दिन में धूप और शाम ढलते ही तेज़ ठंड का यह उतार-चढ़ाव खासकर हृदय रोगियों, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और बुजुर्गों के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि इस मौसम में थोड़ी-सी लापरवाही हार्ट अटैक, लकवा और सांस से जुड़ी गंभीर समस्याओं को जन्म दे सकती है।
स्वास्थ्य चेतावनी : सुबह-शाम की गलन, बादलों की मौजूदगी और ठंडी हवा का मेल शरीर के रक्तचाप को असंतुलित कर सकता है, जिससे अचानक हार्ट अटैक या ब्रेन स्ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
मौसम के उतार-चढ़ाव ने बढ़ाई गलन और ठंड
पिछले कुछ दिनों से मौसम का मिज़ाज लगातार बदल रहा है। गुरुवार को दिनभर आसमान में बादल छाए रहे, जिससे सुबह से ही तेज़ गलन महसूस की गई। हालांकि बुधवार को दिन में धूप निकलने से लोगों को थोड़ी राहत मिली थी, लेकिन शाम होते-होते ठंड ने फिर से जोर पकड़ लिया। ठंडी हवाओं की रफ्तार बढ़ने से वातावरण में नमी और ठिठुरन दोनों ही बढ़ गईं।
मौसम विभाग के अनुसार गुरुवार को अधिकतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 11 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। आर्द्रता का स्तर 89 प्रतिशत तक पहुंच गया, जिससे ठंड का असर और तीखा महसूस हुआ। वहीं वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 124 दर्ज किया गया, जो संवेदनशील लोगों के लिए जोखिम भरा माना जाता है।
ठंडी हवा और नमी से बढ़ रहा बीमारियों का जोखिम
बढ़ती ठंड और गलन का सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर दिखाई देने लगा है। सुबह और शाम के समय ठंडी हवा के संपर्क में आने से बुजुर्ग, हृदय रोगी और पहले से बीमार लोग तेजी से प्रभावित हो रहे हैं। अस्पतालों और निजी क्लीनिकों में हार्ट से जुड़ी शिकायतों, लकवा और सांस फूलने के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ठंड के मौसम में शरीर की रक्त नलिकाएं सिकुड़ जाती हैं, जिससे रक्तचाप बढ़ जाता है। यही स्थिति हृदय पर अतिरिक्त दबाव डालती है और अचानक हार्ट अटैक की आशंका को जन्म देती है।
डॉक्टर की चेतावनी: ठंड में बढ़ जाता है हार्ट अटैक और लकवा का खतरा
जनपद के वरिष्ठ फिजिशियन एवं हार्ट स्पेशलिस्ट डॉ. बी. एस. उपाध्याय के अनुसार, इस समय मौसम बेहद संवेदनशील दौर में है। उन्होंने बताया कि अचानक बदले मौसम के कारण रक्तचाप में उतार-चढ़ाव की संभावना बढ़ जाती है, जो सीधे तौर पर ब्रेन स्ट्रोक यानी लकवा का कारण बन सकती है।
डॉ. उपाध्याय ने कहा कि ठंड के मौसम में हृदय को सामान्य से अधिक मेहनत करनी पड़ती है। जब शरीर को गर्म रखने के लिए दिल अधिक तेज़ी से काम करता है, तब हार्ट अटैक का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है, खासकर उन लोगों में जो पहले से शुगर, बीपी या दिल की बीमारी से जूझ रहे हैं।
कौन लोग हैं सबसे ज्यादा जोखिम में
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार 50 वर्ष से अधिक आयु के लोग, हृदय रोगी, उच्च रक्तचाप और मधुमेह के मरीज इस मौसम में सबसे अधिक जोखिम में हैं। इसके अलावा लंबे समय तक धूम्रपान करने वाले और मोटापे से ग्रस्त लोगों को भी अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।
सुबह के समय जब तापमान सबसे कम होता है, तब ठंडी हवा सीधे फेफड़ों और हृदय को प्रभावित करती है। ऐसे में हल्की-सी लापरवाही गंभीर परिणाम दे सकती है।
डॉक्टरों द्वारा सुझाए गए बचाव के उपाय
डॉ. उपाध्याय ने लोगों को ठंड से बचाव के लिए कुछ महत्वपूर्ण उपाय अपनाने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि इस मौसम में गुनगुने पानी का सेवन करना बेहद लाभकारी है। इससे शरीर का तापमान संतुलित रहता है और रक्त संचार बेहतर होता है।
नमक का अत्यधिक सेवन कम करने पर जोर देते हुए उन्होंने बताया कि ज्यादा नमक रक्तचाप को तेजी से बढ़ा सकता है। इसके साथ ही नियमित हल्का व्यायाम, योग और टहलना हृदय को स्वस्थ रखने में मदद करता है।
बुजुर्गों को सुबह बाहर निकलने से बचने की सलाह
डॉक्टरों ने विशेष रूप से बुजुर्गों और 50 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को सुबह की ठंड में अनावश्यक रूप से बाहर न निकलने की सलाह दी है। यदि अत्यंत आवश्यक हो, तो पूरे गर्म कपड़े पहनकर ही बाहर जाएं।
इसके अलावा हल्के गुनगुने पानी से स्नान करने और अचानक ठंडे पानी से नहाने से बचने को कहा गया है। यह सावधानियां हार्ट अटैक और लकवा के खतरे को काफी हद तक कम कर सकती हैं।
खान-पान में सावधानी भी है बेहद जरूरी
इस मौसम में खान-पान पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। डॉक्टरों का कहना है कि वसायुक्त भोजन, अत्यधिक तेल, मिर्च-मसालेदार सब्जियां और जंक फूड का सेवन कम करना चाहिए।
हरी सब्जियां, फल, हल्का सुपाच्य भोजन और पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ शरीर को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करते हैं। संतुलित आहार अपनाकर न केवल ठंड के प्रभाव से बचा जा सकता है, बल्कि हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा भी कम किया जा सकता है।
सतर्कता ही है सबसे बड़ा बचाव
विशेषज्ञों का मानना है कि अचानक बदले मौसम में सतर्कता और जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। समय पर सावधानी बरतकर और डॉक्टरों की सलाह का पालन करके गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है।
यदि सीने में दर्द, अचानक कमजोरी, शरीर के किसी हिस्से में सुन्नता या सांस लेने में तकलीफ महसूस हो, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना आवश्यक है। थोड़ी-सी देरी भी जानलेवा साबित हो सकती है।







