राजस्थान के डीग जनपद अंतर्गत पहाड़ी कस्बा बीते कई वर्षों से अतिक्रमण की समस्या से जूझ रहा था। सार्वजनिक रास्तों, सरकारी जमीनों और नगरपालिका की संपत्तियों पर धीरे-धीरे अवैध दुकानें, पक्की दीवारें और अस्थायी निर्माण खड़े कर दिए गए थे। प्रशासनिक नोटिस, चेतावनियाँ और मौखिक अपीलें लंबे समय तक असरहीन रहीं। आखिरकार शनिवार को नगरपालिका प्रशासन ने पुलिस के सहयोग से वह कदम उठाया, जिसकी चर्चा लंबे समय से आम जनता के बीच थी।
सुबह-सुबह चला बुल्डोजर, मच गया हड़कंप
शनिवार की सुबह जैसे ही नगरपालिका की टीम भारी मशीनरी और बुल्डोजर के साथ चिन्हित स्थानों पर पहुँची, पूरे कस्बे में हलचल मच गई। कई अतिक्रमणकारियों को इस त्वरित कार्रवाई की भनक तक नहीं थी। कुछ लोग अपनी दुकानों से सामान हटाने की कोशिश करते नजर आए, तो कुछ दूर खड़े होकर प्रशासनिक कार्रवाई को असहाय निगाहों से देखते रहे। देखते ही देखते सरकारी भूमि पर बने अवैध ढांचे मलबे में तब्दील होने लगे।
भारी पुलिस जाब्ते के बीच शांतिपूर्ण कार्रवाई
कार्रवाई के दौरान किसी भी प्रकार के विरोध, विवाद या अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया था। पुलिस और प्रशासन के बेहतर समन्वय का ही परिणाम रहा कि पूरा अभियान पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। किसी भी स्तर पर बल प्रयोग की नौबत नहीं आई और न ही किसी प्रकार की झड़प की सूचना सामने आई।
नगरपालिका ईओ ने संभाला मोर्चा
इस पूरे अभियान का नेतृत्व नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी ने किया। वे स्वयं मौके पर मौजूद रहे और हर स्तर पर निगरानी करते नजर आए। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि कार्रवाई पूरी तरह नियमों और कानूनी प्रक्रियाओं के अनुरूप की जा रही है। चिन्हित अतिक्रमणों की पहले से जांच-पड़ताल की जा चुकी थी और उन्हीं निर्माणों को हटाया गया, जो स्पष्ट रूप से सरकारी भूमि पर अवैध रूप से बने थे।
SDM के दिशा-निर्देशों में बनी रणनीति
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार उपखण्ड अधिकारी (SDM) मुकुल दीक्षित भले ही व्यक्तिगत रूप से मौके पर उपस्थित नहीं थे, लेकिन पूरे अभियान की रणनीति, समय-सारिणी और समन्वय उनके दिशा-निर्देशों के तहत ही तैयार किया गया था। यही कारण रहा कि कार्रवाई न केवल तेज रही, बल्कि पूरी तरह व्यवस्थित भी नजर आई।
“किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, कानून के पक्ष में कार्रवाई”
नगरपालिका प्रशासन की ओर से स्पष्ट शब्दों में कहा गया कि यह अभियान किसी व्यक्ति या वर्ग विशेष के खिलाफ नहीं है। यह पूरी तरह सार्वजनिक हित में और कानून व्यवस्था को बनाए रखने के उद्देश्य से चलाया गया है। अधिकारियों ने चेतावनी दी कि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और भविष्य में भी ऐसे अभियान जारी रहेंगे।
स्थानीय जनता ने की कार्रवाई की सराहना
कार्रवाई के बाद स्थानीय नागरिकों में प्रशासन के प्रति सकारात्मक माहौल देखने को मिला। कई लोगों ने खुलकर कहा कि वर्षों से अवैध अतिक्रमण के कारण रास्ते संकरे हो गए थे और सार्वजनिक सुविधाओं का उपयोग बाधित हो रहा था। इस कार्रवाई से न केवल सरकारी भूमि मुक्त हुई, बल्कि आम जनता को भी राहत मिली।
अतिक्रमणकारियों के लिए सख्त संदेश
इस अभियान ने यह साफ कर दिया है कि अब प्रशासन केवल नोटिस जारी कर औपचारिकता निभाने के मूड में नहीं है। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ जमीनी स्तर पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह संदेश न सिर्फ पहाड़ी कस्बे तक सीमित है, बल्कि पूरे जिले के लिए एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।
शासन-प्रशासन की छवि को मजबूती
अतिक्रमण हटाने की यह कार्रवाई शासन की उस नीति को भी मजबूत करती है, जिसमें सार्वजनिक संपत्तियों की रक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है। प्रशासनिक सख्ती से यह संकेत मिलता है कि कानून का राज स्थापित करने के लिए अब जमीन पर परिणाम दिखाने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं।
आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है अभियान
सूत्रों के अनुसार नगरपालिका क्षेत्र में अभी भी कुछ स्थान ऐसे हैं, जहाँ अवैध कब्जों की पहचान की जा रही है। प्रशासन संकेत दे चुका है कि आने वाले दिनों में अतिक्रमण हटाने का दायरा और व्यापक हो सकता है। इससे पहले ही अतिक्रमणकारियों में भय और असमंजस का माहौल देखा जा रहा है।
कानून का राज और सुशासन का दावा
कुल मिलाकर यह कार्रवाई केवल बुल्डोजर चलाने तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह एक संदेश थी—कि सरकारी जमीन किसी की निजी संपत्ति नहीं है। प्रशासन ने यह जता दिया है कि नियमों से ऊपर कोई नहीं और कानून का पालन सभी के लिए अनिवार्य है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
यह अतिक्रमण हटाओ कार्रवाई कब की गई?
यह कार्रवाई शनिवार को डीग जिले के पहाड़ी क्षेत्र में की गई, जब नगरपालिका प्रशासन ने पुलिस बल के साथ मिलकर अभियान चलाया।
क्या यह कार्रवाई किसी खास व्यक्ति के खिलाफ थी?
नहीं, प्रशासन के अनुसार यह कार्रवाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि सार्वजनिक हित और कानून व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से की गई।
क्या भविष्य में भी ऐसी कार्रवाई होगी?
प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों के खिलाफ आगे भी अभियान जारी रहेगा।
इस कार्रवाई का आम जनता को क्या लाभ होगा?
अतिक्रमण हटने से सार्वजनिक रास्ते, सरकारी भूमि और सुविधाएँ मुक्त होंगी, जिससे आम नागरिकों को सीधा लाभ मिलेगा।







