बिजली बिल राहत में ये कैसा घालमेल?

चित्रकूट में बिजली बिल राहत योजना, ग्रामीण उपभोक्ता बिजली बिल दिखाते हुए, अंधेरे में गांव, बिजली कटौती और उपभोक्ताओं की परेशानी

संजय सिंह राणा की रिपोर्ट
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82 हजार पात्र उपभोक्ताओं में सिर्फ 4150 को राहत—आख़िर क्यों?

बिजली बिल राहत योजना को उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत के तौर पर पेश किया गया था। दावा था कि ब्याज में शत-प्रतिशत छूट,मूल बकाया में रियायत और जुर्माने में कटौती से लाखों परिवारों को सुकून मिलेगा। लेकिन चित्रकूट में ज़मीनी तस्वीर इन दावों से उलट है—आंकड़े सवाल खड़े कर रहे हैं और व्यवस्था की कार्यशैली पर गंभीर बहस की मांग कर रहे हैं।

चित्रकूट जनपद में बिजली बिल राहत योजना को लागू हुए लगभग एक महीना बीत चुका है, लेकिन योजना की प्रगति प्रशासनिक प्रस्तुतियों और प्रेस विज्ञप्तियों से अलग नज़र आती है। जिले में कुल लगभग एक लाख सत्तर हजार बिजली कनेक्शन धारक हैं, जिनमें एक लाख पैंतालीस हजार घरेलू उपभोक्ता और करीब सोलह हजार निजी नलकूप कनेक्शन शामिल हैं। इन उपभोक्ताओं पर बकाया राशि का पहाड़ खड़ा है—लगभग 151 करोड़ रुपये का मूल बिल और करीब 126 करोड़ रुपये का ब्याज। कुल मिलाकर आंकड़ा पौने तीन सौ करोड़ के आसपास पहुंच जाता है।

पात्रता का बड़ा दायरा, लाभ का छोटा घेरा

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार बिजली बिल राहत योजना के लिए 82,764 उपभोक्ताओं को पात्र चिन्हित किया गया।
इनमें कर्वी डिवीजन के 35,593 और राजापुर डिवीजन के 47,171 उपभोक्ता शामिल हैं। काग़ज़ पर यह संख्या
बताती है कि योजना का दायरा व्यापक है। मगर ज़मीनी हकीकत यह है कि 27 दिन बीत जाने के बाद भी महज़ 4,150 उपभोक्ता ही योजना का लाभ लेने आगे आए। यानी पात्रों का सिर्फ़ लगभग पाँच प्रतिशत।

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आंकड़ों की सख़्त सच्चाई

कर्वी डिवीजन में जहां 2,390 उपभोक्ताओं ने करीब 1 करोड़ 40 लाख रुपये जमा किए, वहीं राजापुर डिवीजन
में 1,760 उपभोक्ताओं से लगभग 1 करोड़ रुपये की वसूली हुई। कुल जमा राशि ढाई करोड़ के आसपास है, जो कुल बकाया के मुकाबले नगण्य कही जाएगी। सवाल यह है कि जब ब्याज माफ़ है, मूल में छूट है, और किस्त या एकमुश्त भुगतान का विकल्प मौजूद है—तो फिर उपभोक्ता आगे क्यों नहीं आ रहे?

योजना की शर्तें: काग़ज़ पर आकर्षक

योजना की शुरुआत एक दिसंबर से हुई और इसे तीन चरणों में बांटा गया। पहले चरण में एकमुश्त भुगतान पर
मूल बकाया में 25 प्रतिशत तक की छूट, दूसरे चरण में 20 प्रतिशत और तीसरे चरण में 15 प्रतिशत छूट का प्रावधान किया गया। ब्याज पर 100 प्रतिशत छूट और बिजली चोरी से जुड़े जुर्माने पर 50 प्रतिशत तक की राहत भी घोषित की गई। योजना में शामिल होने के लिए दो हजार रुपये से पंजीकरण कराने की शर्त रखी गई।

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तो फिर अड़चन कहां है?

उपभोक्ताओं से बातचीत में कई कारण सामने आते हैं। पहला—जानकारी का अभाव। ग्रामीण इलाकों में योजना की शर्तें स्पष्ट रूप से नहीं पहुंचीं। दूसरा—भरोसे की कमी। पहले के अनुभवों के चलते लोग आशंकित हैं कि कहीं आज भुगतान करने के बाद कल कोई नई गणना न थमा दी जाए।
तीसरा—आर्थिक तंगी। दो हजार रुपये का पंजीकरण और एकमुश्त भुगतान, दोनों ही कई परिवारों के लिए तत्काल संभव नहीं।

प्रचार बनाम पहुँच

विभागीय स्तर पर प्रचार-प्रसार के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन प्रचार और पहुँच के बीच बड़ा फासला दिखता है। पोस्टर, बैनर और औपचारिक बैठकों से आगे बढ़कर यदि
घर-घर संपर्क, पंचायत स्तर पर शिविर और सरल भाषा में गणना-पत्र उपलब्ध कराए जाते, तो संभवतः तस्वीर कुछ और होती।

ग्राउंड से उठते सवाल

क्या पात्रता सूची में त्रुटियां हैं? क्या उपभोक्ताओं को सही बकाया बताया जा रहा है?
क्या स्मार्ट मीटर, पिछली रीडिंग और जुर्माने की उलझनों ने भरोसा तोड़ा है?
और सबसे अहम—क्या योजना का डिज़ाइन स्थानीय सामाजिक-आर्थिक हालात के अनुरूप है?

जिम्मेदारों का पक्ष

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि योजना के प्रचार के प्रयास किए जा रहे हैं और उपभोक्ताओं को लगातार प्रेरित किया जा रहा है। उनके मुताबिक 82,764 पात्रों में से अब तक 4,150 ने भुगतान किया है, शेष को भी आगे आने के लिए समझाया जा रहा है। लेकिन आंकड़े बताते हैं कि महज़ अपीलें पर्याप्त नहीं।

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समाधान क्या हो सकता है?

विशेषज्ञों के अनुसार समाधान बहुस्तरीय होना चाहिए—स्थानीय शिविर, पारदर्शी बकाया विवरण, किस्तों की लचीली व्यवस्था, और शिकायत निवारण का भरोसेमंद तंत्र। साथ ही, उपभोक्ताओं को यह भरोसा दिलाना होगा कि राहत वास्तविक है, अस्थायी नहीं।

बिजली बिल राहत योजना अपने उद्देश्य में तभी सफल होगी, जब पात्र उपभोक्ता निडर होकर आगे आएंगे। अभी की स्थिति में 82 हजार बनाम 4,150 का अंतर एक चेतावनी है—कि कहीं यह योजना काग़ज़ों की राहत बनकर न रह जाए।
जवाबदेही, पारदर्शिता और ज़मीनी संवाद के बिना राहत का दावा अधूरा ही रहेगा।

सवाल–जवाब

योजना का लाभ इतने कम लोग क्यों ले रहे हैं?

जानकारी की कमी, भरोसे का संकट, आर्थिक तंगी और प्रक्रिया की जटिलता
इसके प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं।

क्या ब्याज पूरी तरह माफ है?

योजना के तहत ब्याज पर 100 प्रतिशत छूट का प्रावधान है,
बशर्ते उपभोक्ता तय शर्तों के अनुसार भुगतान करें।

एकमुश्त भुगतान ज़रूरी है?

अधिकतम छूट के लिए एकमुश्त भुगतान लाभकारी है,
लेकिन चरणों के अनुसार विकल्प भी मौजूद हैं।

उपभोक्ता भरोसा कैसे बढ़ेगा?

पारदर्शी बकाया विवरण, स्थानीय शिविर और प्रभावी शिकायत निवारण
से भरोसा बहाल किया जा सकता है।

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