देवरिया, 27 फरवरी। जनपद में चर्चित कृष्ण मोहन सिंह आत्महत्या प्रकरण में शासन स्तर पर बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई हुई है। जिलाधिकारी दिव्या मित्तल द्वारा 23 फरवरी 2026 को शासन को भेजी गई संस्तुति के आधार पर उत्तर प्रदेश सरकार ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) शालिनी श्रीवास्तव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। साथ ही उनके विरुद्ध विभागीय अनुशासनिक कार्यवाही संस्थित करने के आदेश जारी किए गए हैं।
शासनादेश में क्या कहा गया?
उत्तर प्रदेश शासन के बेसिक शिक्षा अनुभाग-1 द्वारा जारी कार्यालय आदेश में उल्लेख किया गया है कि माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में शिथिलता बरती गई तथा लगभग एक वर्ष तक प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। प्रथम दृष्टया आरोपों के सत्य प्रतीत होने पर शासन ने इसे शासकीय दायित्वों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही और उदासीनता माना है। शासन ने स्पष्ट किया है कि इस प्रकार का आचरण कदाचार की श्रेणी में आता है, जो सेवा नियमों के विरुद्ध है।
नियमावली के तहत निलंबन
जारी आदेश के अनुसार, उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली-1999 के नियम-4 के अंतर्गत शालिनी श्रीवास्तव को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। वहीं नियम-7 के तहत उनके विरुद्ध विभागीय जांच संस्थित की गई है। शासन ने निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त शिक्षा निदेशक, गोरखपुर मंडल को जांच अधिकारी नामित किया है।
निलंबन अवधि की व्यवस्था
निलंबन अवधि के दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा। साथ ही उनका संबद्धीकरण शिक्षा निदेशक (बेसिक), उत्तर प्रदेश, लखनऊ कार्यालय से किया गया है। शासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि जांच प्रक्रिया के दौरान प्रशासनिक पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना प्राथमिकता होगी।
अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी का पद रिक्त होने के कारण शासन ने शैक्षिक एवं प्रशासनिक कार्यों में व्यवधान रोकने के लिए अंतरिम व्यवस्था की है। नियमित तैनाती होने तक प्राचार्य, डायट (देवरिया) को उनके वर्तमान पद के साथ-साथ बीएसए का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। इससे विद्यालयी कार्यों और विभागीय संचालन में निरंतरता बनी रहेगी।
प्रकरण की पृष्ठभूमि
उल्लेखनीय है कि कृष्ण मोहन सिंह आत्महत्या प्रकरण में परिजनों की तहरीर पर थाना गुलहरिया में पहले ही नामजद मुकदमा दर्ज किया जा चुका है। जिलाधिकारी के निर्देश पर गठित उच्चस्तरीय जांच समिति की आख्या के आधार पर संबंधित पटल सहायक को पूर्व में निलंबित किया गया था। इसी क्रम में अब शासन ने बीएसए के विरुद्ध भी कठोर कदम उठाया है।
प्रशासनिक जवाबदेही पर जोर
जिलाधिकारी दिव्या मित्तल ने स्पष्ट किया है कि जनपद में प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। शासन की इस कार्रवाई को प्रशासनिक उत्तरदायित्व के संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बीएसए शालिनी श्रीवास्तव को किस कारण निलंबित किया गया?
माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में शिथिलता और प्रभावी कार्रवाई न करने के आरोपों के आधार पर निलंबन किया गया है।
जांच अधिकारी कौन बनाए गए हैं?
संयुक्त शिक्षा निदेशक, गोरखपुर मंडल को जांच अधिकारी नामित किया गया है।
बीएसए का कार्यभार अब कौन संभालेंगे?
नियमित तैनाती तक प्राचार्य, डायट (देवरिया) को अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

