
खेत की नमी से उम्मीद भी जगी है और चिंता भी।
सीतापुर में अचानक हुई बेमौसम बारिश ने किसानों को दो हिस्सों में बाँट दिया है—
कहीं फसल नुकसान की आशंका है तो कहीं यही बारिश आने वाली पैदावार के लिए राहत बनकर सामने आई है।
सीतापुर में बेमौसम बारिश ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों की चिंता बढ़ा दी है। हरगांव ब्लॉक के मल्लापुर सहित आसपास के गांवों में मंगलवार 27 जनवरी की रात से शुरू हुई बारिश बुधवार सुबह तक रुक-रुक कर जारी रही। इस अचानक बदले मौसम ने खेतों में खड़ी फसलों को लेकर किसानों की धड़कनें तेज कर दी हैं। जहां एक ओर कुछ फसलों को भारी नुकसान की आशंका है, वहीं दूसरी ओर कुछ फसलें ऐसी भी हैं जिन्हें इस बारिश से राहत और लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
रातभर की बारिश ने बदला खेतों का मिज़ाज
मंगलवार देर रात शुरू हुई बारिश ने हरगांव क्षेत्र के मल्लापुर, आसपास के मजरे और खेतिहर इलाकों को पूरी तरह भिगो दिया। सुबह जब किसान खेतों की ओर पहुंचे तो कई जगहों पर पानी भरा मिला। बेमौसम बारिश का यह सिलसिला जनवरी के अंत में होना किसानों के लिए असमंजस की स्थिति पैदा कर गया है, क्योंकि इस समय रबी की अधिकांश फसलें अपने संवेदनशील चरण में होती हैं।
सरसों, आलू और मटर पर नुकसान की आशंका
स्थानीय किसानों के अनुसार, इस बेमौसम बारिश से सबसे अधिक खतरा सरसों, आलू और मटर जैसी फसलों को है। खासकर आलू की फसल को लेकर किसान काफी चिंतित हैं। आलू उत्पादक किसान उमेश जायसवाल का कहना है कि खेतों में अधिक पानी जमा होने से आलू के सड़ने का खतरा बढ़ गया है। यदि अगले कुछ दिनों तक मौसम साफ नहीं हुआ और धूप नहीं निकली, तो उत्पादन पर सीधा असर पड़ सकता है।
सरसों की फसल इस समय फूल और दाना बनने की अवस्था में है। अधिक नमी और ठंड के कारण फूल झड़ने और कीट प्रकोप बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। वहीं मटर की फसल में भी फली सड़ने और गुणवत्ता गिरने का डर किसानों को सता रहा है।
गेहूं, चना और मसूर को मिल सकती है राहत
हालांकि सीतापुर में बेमौसम बारिश को पूरी तरह नुकसानदेह कहना भी सही नहीं होगा। कुछ किसानों का मानना है कि यह बारिश कुछ फसलों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। किसान राम सिंह यादव के अनुसार, गेहूं, चना, मसूर और जौ जैसी फसलों को इस बारिश से नमी मिलने का लाभ मिलेगा।
इन फसलों को इस समय हल्की नमी की आवश्यकता होती है, जिससे उनकी बढ़वार बेहतर हो सकती है। खासकर जिन खेतों में सिंचाई की सुविधा सीमित है, वहां यह बारिश किसी वरदान से कम नहीं मानी जा रही है।
गन्ने की बुवाई के लिए बनी अनुकूल स्थिति
बारिश से खेतों में बनी नमी गन्ने की बुवाई के लिहाज से भी उपयोगी मानी जा रही है। कई किसान आने वाले दिनों में गन्ने की बुवाई की तैयारी में जुटे हैं। ऐसे में यह नमी खेत की जुताई और बुवाई के लिए अनुकूल मानी जा रही है। किसानों का कहना है कि यदि मौसम जल्द साफ हो जाता है तो गन्ने की बुवाई समय पर शुरू की जा सकती है।
ठंड और बारिश से जनजीवन भी प्रभावित
खेतों के साथ-साथ आम जनजीवन पर भी इस बारिश का असर साफ देखने को मिला। बारिश और बढ़ी ठंड के कारण सुबह के समय स्कूली बच्चों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई अभिभावकों ने बच्चों को ठंड और भीगने के डर से स्कूल भेजने में हिचकिचाहट दिखाई।
वहीं बुजुर्गों को भी दैनिक कार्यों और आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। ग्रामीण इलाकों में कच्चे रास्तों पर फिसलन बढ़ गई, जिससे आवाजाही और भी मुश्किल हो गई।
मौसम में बदलाव से बढ़ी किसानों की चिंता
किसानों का कहना है कि मौसम में इस तरह का अचानक बदलाव उनकी योजनाओं को बिगाड़ देता है। बेमौसम बारिश न सिर्फ फसल की गुणवत्ता पर असर डालती है, बल्कि लागत भी बढ़ा देती है। यदि नुकसान हुआ तो किसानों को दोबारा कर्ज और आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है।
कृषि विशेषज्ञों की सलाह
कृषि विशेषज्ञों का सुझाव है कि जिन खेतों में पानी जमा है, वहां शीघ्र निकासी की व्यवस्था की जाए। आलू और सब्जी उत्पादकों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। वहीं गेहूं और दलहन फसलों के किसानों को फिलहाल घबराने की आवश्यकता नहीं बताई जा रही है।
मिला-जुला असर, आगे मौसम पर टिकी निगाहें
कुल मिलाकर सीतापुर में बेमौसम बारिश का असर मिला-जुला देखने को मिला है। जहां कुछ किसानों के लिए यह चिंता का कारण बनी है, वहीं कुछ के लिए यह राहत लेकर आई है। अब किसानों की निगाहें आने वाले दिनों के मौसम पर टिकी हैं। यदि मौसम जल्द साफ हो जाता है तो नुकसान सीमित रह सकता है, लेकिन बारिश का सिलसिला बढ़ा तो मुश्किलें और गहराने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।






