पांच समानांतर पुलों वाला जनपद जौनपुर बनेगा पूर्वांचल का अनोखा यातायात मॉडल

गोमती नदी पर शास्त्री पुल के समानांतर नए दो लेन पुल के निर्माण के दौरान पिलर और मशीनरी का कार्य, जौनपुर

विकास पाठक की रिपोर्ट
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पांच समानांतर पुलों वाला जनपद जौनपुर अब उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश के उन चुनिंदा शहरों में शामिल होने जा रहा है, जहां महज डेढ़ किलोमीटर के दायरे में एक ही नदी पर पांच समानांतर पुल मौजूद होंगे। गोमती नदी पर पांचवें पुल का निर्माण शुरू होते ही जौनपुर की पहचान केवल ऐतिहासिक शहर के रूप में नहीं, बल्कि आधुनिक शहरी यातायात प्रबंधन के उदाहरण के रूप में भी स्थापित होने लगी है। यह परियोजना वर्षों से चली आ रही जाम की समस्या को कम करने के साथ-साथ प्रयागराज, गाजीपुर और गोरखपुर जैसे प्रमुख जिलों से कनेक्टिविटी को भी नई दिशा देगी।

गोमती नदी और जौनपुर का यातायात दबाव

जौनपुर शहर की भौगोलिक संरचना गोमती नदी के दोनों किनारों पर फैली हुई है। समय के साथ शहर का विस्तार हुआ, बाजार बढ़े और वाहनों की संख्या में कई गुना इजाफा हुआ। लेकिन पुलों की संख्या सीमित होने के कारण यातायात का सारा दबाव कुछ चुनिंदा मार्गों पर केंद्रित हो गया। खासकर शास्त्री पुल पर दिनभर भारी वाहनों और स्थानीय ट्रैफिक का भार बना रहता है, जिससे जाम अब सामान्य समस्या बन चुकी है।

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शाही पुल: इतिहास और स्थापत्य का संगम

जौनपुर का शाही पुल अपने अनूठे शिल्प और स्थापत्य के कारण देशभर में प्रसिद्ध है। 26 फीट चौड़ा यह पुल दोनों ओर मजबूत मुंडेरों से घिरा हुआ है। पुल के मध्य स्थित चतुर्भुजाकार चबूतरे पर सिंह और हाथी की विशाल प्रतिमा शक्ति और संरक्षण का प्रतीक मानी जाती है। अष्टकोणीय स्तंभों पर टिका यह पुल नदी के प्रवाह को बनाए रखने के लिए दस जलद्वारों से सुसज्जित है। यह पुल केवल यातायात का साधन नहीं, बल्कि जौनपुर की सांस्कृतिक पहचान भी है।

आधुनिक पुलों की श्रृंखला

शाही पुल के दोनों ओर आधुनिक पुलों का निर्माण जौनपुर के यातायात ढांचे को संतुलित कर रहा है। कलीचाबाद पुल जनवरी में चालू हो चुका है, जिससे स्थानीय आवाजाही में उल्लेखनीय सुधार हुआ। दूसरी ओर सद्भावना पुल ने शहर के एक बड़े हिस्से को वैकल्पिक मार्ग प्रदान किया है। इसके अतिरिक्त लगभग 500 मीटर की दूरी पर स्थित शास्त्री पुल पूर्वांचल के कई जिलों के आवागमन का प्रमुख माध्यम है।

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पांचवां पुल: जाम से राहत की उम्मीद

शास्त्री पुल पर बढ़ते दबाव को देखते हुए उसके समानांतर एक नए दो-लेन पुल के निर्माण को स्वीकृति दी गई। 23 जुलाई 2021 को सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा इस परियोजना को हरी झंडी मिली और लगभग 26.98 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई। नदी में अधिक जलस्तर के कारण निर्माण कार्य कुछ समय के लिए बाधित रहा, लेकिन अब फाउंडेशन पिलर का कार्य तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।

पूर्वांचल की कनेक्टिविटी को मिलेगा बल

पांच समानांतर पुलों वाला जनपद जौनपुर बनने से केवल शहर ही नहीं, बल्कि पूरा पूर्वांचल लाभान्वित होगा। प्रयागराज, गाजीपुर और गोरखपुर की ओर जाने वाले भारी और हल्के वाहनों का दबाव अलग-अलग मार्गों पर बंट जाएगा। इससे यात्रा समय कम होगा, ईंधन की बचत होगी और व्यापारिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।

शहरी नियोजन का नया उदाहरण

यह परियोजना दर्शाती है कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर यदि समय रहते वैकल्पिक ढांचे विकसित किए जाएं, तो शहरों को जाम जैसी समस्याओं से बचाया जा सकता है। समानांतर पुलों की यह अवधारणा आने वाले वर्षों में अन्य नदी-आधारित शहरों के लिए भी मॉडल बन सकती है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पांचवां पुल कब तक तैयार होने की उम्मीद है?

निर्माण की मौजूदा गति को देखते हुए इसे निर्धारित समयसीमा में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

क्या इससे शास्त्री पुल का दबाव कम होगा?

हां, नए पुल से ट्रैफिक का विभाजन होगा और शास्त्री पुल पर जाम की स्थिति में कमी आएगी।

क्या शाही पुल की ऐतिहासिक संरचना सुरक्षित रहेगी?

नए पुलों का निर्माण सुरक्षित दूरी पर किया जा रहा है, जिससे शाही पुल की विरासत प्रभावित नहीं होगी।

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