मनरेगा बचाओ चौपाल के माध्यम से ग्रामीण भारत में रोजगार, सम्मान और सामाजिक सुरक्षा की आवाज एक बार फिर बुलंद होती दिखाई दी। भाटपाररानी विधानसभा क्षेत्र के रुस्तम बहियारी गांव में आयोजित इस जन चौपाल में कांग्रेस कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों और बड़ी संख्या में मनरेगा मजदूरों ने हिस्सा लेकर केंद्र और राज्य की नीतियों के खिलाफ खुलकर अपनी बात रखी। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार की नीतियां गरीब, मजदूर और ग्रामीण समाज के खिलाफ हैं तथा मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना को धीरे-धीरे कमजोर किया जा रहा है।
ग्रामीण चौपाल बना सवालों और सरोकारों का मंच
रुस्तम बहियारी में आयोजित मनरेगा बचाओ जन चौपाल केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि ग्रामीण मजदूरों के जीवन से जुड़े सवालों का साझा मंच बनकर उभरा। चौपाल में मौजूद मजदूरों ने मजदूरी भुगतान में देरी, काम के दिनों में कटौती, जॉब कार्ड से नाम हटाने और काम की उपलब्धता जैसी समस्याओं को सामने रखा। वक्ताओं ने कहा कि मनरेगा सिर्फ रोजगार योजना नहीं, बल्कि गांव की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, जिसे कमजोर करने का सीधा असर गरीब परिवारों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है।
केशवचन्द यादव का आरोप: भाजपा मजदूरों की दुश्मन
चौपाल को संबोधित करते हुए भाटपाररानी से कांग्रेस के पूर्व विधानसभा प्रत्याशी और युवा कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष केशवचन्द यादव ने कहा कि मौजूदा सरकार को गरीबों और मजदूरों के विकास से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की राजनीति बड़े पूंजीपतियों के इर्द-गिर्द घूमती है, जबकि मेहनतकश वर्ग की अनदेखी की जा रही है। यादव ने कहा कि मनरेगा जैसी योजना को कमजोर करना दरअसल ग्रामीण गरीबों को उनके हाल पर छोड़ने जैसा है। कांग्रेस इस अन्याय को बर्दाश्त नहीं करेगी और जरूरत पड़ी तो सड़क से संसद तक संघर्ष करेगी।
यूपीए सरकार की देन है मनरेगा: विजयशेखर मल्ल
कांग्रेस जिलाध्यक्ष विजयशेखर मल्ल रोशन ने कहा कि मनरेगा की शुरुआत यूपीए सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में की थी। इस योजना का उद्देश्य यह था कि किसी भी मजदूर को रोजगार की तलाश में अपना गांव और परिवार छोड़कर परदेश न जाना पड़े। उन्होंने कहा कि यह योजना ग्रामीण भारत के लिए सामाजिक सुरक्षा कवच की तरह थी, लेकिन वर्तमान सरकार इसे बोझ मानकर खत्म करने की दिशा में बढ़ रही है। यह मजदूरों के साथ सीधा अन्याय है।
गांव-गांव जागरूकता अभियान चला रही कांग्रेस
जिला उपाध्यक्ष डॉ. धर्मेन्द्र पांडेय ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने मनरेगा को बचाने के लिए जन जागरूकता अभियान की रणनीति बनाई है। इसी कड़ी में गांव-गांव चौपालों का आयोजन किया जा रहा है, ताकि मजदूरों को उनके अधिकारों की जानकारी दी जा सके। उन्होंने कहा कि जब तक मजदूरों को उनका हक नहीं मिलेगा, कांग्रेस कार्यकर्ता चुप नहीं बैठेंगे। यह लड़ाई केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय की लड़ाई है।
मनरेगा मजदूरों की पीड़ा और जमीनी सच्चाई
चौपाल में मौजूद मजदूरों ने बताया कि काम मांगने के बावजूद समय पर रोजगार नहीं मिलता, मजदूरी का भुगतान महीनों तक अटका रहता है और कई बार तकनीकी कारणों से नाम काट दिए जाते हैं। मनरेगा जिला कोऑर्डिनेटर सत्यप्रकाश मिश्र अंशु ने कहा कि अगर यह योजना सही तरीके से लागू हो तो गांव से शहर की मजबूरी भरी पलायन की तस्वीर बदल सकती है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस ही एकमात्र पार्टी है जो मजदूरों के हित को प्राथमिकता देती है।
सामूहिक आवाज, सामूहिक संकल्प
चौपाल को ब्लॉक अध्यक्ष सत्यपाल सिंह कुशवाहा, वरुण राय, विनोद दूबे, धुर्व प्रसाद आर्य, सलीम अली, सत्यम पांडेय, गौरीशंकर यादव, एडवोकेट शालिनी, छोटेलाल यादव, रामअवध यादव और रवींद्र मल्ल सहित कई नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने संबोधित किया। सभी वक्ताओं ने एक सुर में कहा कि मनरेगा को कमजोर करने का मतलब गांव की अर्थव्यवस्था को तोड़ना है।
राजनीति से आगे, आजीविका का सवाल
मनरेगा बचाओ चौपाल में उठी आवाजें इस बात की गवाही देती हैं कि यह मुद्दा सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं है। यह उन करोड़ों परिवारों की आजीविका से जुड़ा सवाल है, जिनके लिए मनरेगा सम्मानजनक जीवन की उम्मीद रहा है। चौपाल के अंत में कार्यकर्ताओं और मजदूरों ने संकल्प लिया कि वे इस योजना को बचाने के लिए संगठित रहेंगे और अपनी आवाज बुलंद करते रहेंगे।






