अतीक अहमद की मौत: अंत नहीं, बल्कि शुरुआत
15 अप्रैल 2023 की रात, जब प्रयागराज में अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या हुई, तब प्रशासन ने इसे “अपराध का अंत” बताने की कोशिश की। मगर वास्तविकता यह थी कि यह एक ऐसे नेटवर्क का सिरा था, जिसकी जड़ें बहुत गहरी थीं।
अतीक की मौत के साथ ही उसकी आर्थिक, आपराधिक और राजनीतिक विरासत का सवाल खड़ा हुआ। कौन संभालेगा उसकी संपत्तियां? कौन बचाएगा पुराने राज़? और सबसे अहम—कौन रहेगा कानून की पहुंच से बाहर?
इसी बिंदु से गुड्डू मुस्लिम और शाइस्ता परवीन की कहानी शुरू होती है।
गुड्डू मुस्लिम: बम और भरोसे का आदमी
गुड्डू मुस्लिम, जिसका असली नाम पुलिस रिकॉर्ड में अलग-अलग बताया गया, अतीक अहमद के सबसे भरोसेमंद गुर्गों में गिना जाता था। उमेश पाल हत्याकांड में दिनदहाड़े बम फेंकते हुए उसका वीडियो वायरल हुआ। यह वही क्षण था, जिसने उसे देश के सबसे चर्चित फरार अपराधियों की सूची में ला खड़ा किया।
गुड्डू मुस्लिम की भूमिका
अतीक के लिए “एक्शन मैन”, बम और हथियारों का विशेषज्ञ, ज़मीनी नेटवर्क का संचालनकर्ता, फरारी और सुरक्षित ठिकानों की योजना बनाने वाला।
पुलिस का दावा था कि गुड्डू मुस्लिम के सिर पर लाखों का इनाम रखा गया, उसके खिलाफ एनएसए और गैंगस्टर एक्ट लगाए गए। फिर भी वह आज तक पकड़ में क्यों नहीं आया?
शाइस्ता परवीन: सत्ता, संपत्ति और साजिश
अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता परवीन को लंबे समय तक “घरेलू महिला” के रूप में पेश किया जाता रहा। लेकिन उमेश पाल हत्याकांड के बाद तस्वीर बदली।
आरोप क्या हैं?
हत्या की साजिश में शामिल होना, शूटरों को शरण देना, पैसों और संसाधनों की व्यवस्था करना, फरार आरोपियों की मदद करना।
पुलिस ने शाइस्ता परवीन पर भी इनाम घोषित किया, उसके पोस्टर लगाए गए, संपत्तियां कुर्क की गईं। लेकिन वह भी कानून की पकड़ से बाहर रही।
आखिर वे हैं कहां? संभावित ठिकानों की पड़ताल
(क) प्रयागराज और आसपास के जिले
सूत्रों के अनुसार, शुरुआती दौर में गुड्डू मुस्लिम और शाइस्ता परवीन प्रयागराज, कौशांबी और प्रतापगढ़ के ग्रामीण इलाकों में छिपे रहे। यहां अतीक का पुराना नेटवर्क मौजूद था।
(ख) नेपाल बॉर्डर और बिहार कनेक्शन
अपराध विशेषज्ञ मानते हैं कि नेपाल बॉर्डर लंबे समय से माफियाओं का सुरक्षित मार्ग रहा है। बिहार के सीमावर्ती जिलों में भी अतीक गिरोह की पकड़ बताई जाती है।
(ग) दक्षिण भारत और खाड़ी देश
कुछ खुफिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि गुड्डू मुस्लिम के दक्षिण भारत, खासकर कर्नाटक और केरल में संपर्क हैं। वहीं, शाइस्ता परवीन के विदेश भागने की आशंका भी जताई गई—हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि कभी नहीं हुई।
साधन संपन्न पुलिस, फिर भी नाकामी क्यों?
यह सबसे अहम सवाल है। उत्तर प्रदेश पुलिस के पास एसटीएफ, एटीएस, साइबर सेल, इंटर-स्टेट कोऑर्डिनेशन, सीसीटीएनएस और सर्विलांस सिस्टम—इन सबके बावजूद दो लोग वर्षों तक कैसे गायब रहे?
संभावित कारण
स्थानीय नेटवर्क की चुप्पी, राजनीतिक संरक्षण की छाया, सूचना लीक होना, सीमावर्ती इलाकों की जटिलता, और प्राथमिकता में बदलाव।
यह सिर्फ दो लोगों की कहानी नहीं
यह रिपोर्ट केवल गुड्डू मुस्लिम और शाइस्ता परवीन के गायब होने की कहानी नहीं है। यह उस तंत्र का आईना है, जहां अपराध, राजनीति और प्रशासन एक-दूसरे में इस तरह उलझे हैं कि सच्चाई अक्सर धुंधली हो जाती है।
जब तक सवाल पूछे जाते रहेंगे, तब तक उम्मीद ज़िंदा रहेगी। लेकिन जिस दिन समाज ने पूछना बंद कर दिया—उसी दिन यह रहस्य हमेशा के लिए दफन हो जाएगा।
और शायद यही सबसे बड़ा खतरा है।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
गुड्डू मुस्लिम अब तक क्यों नहीं पकड़ा गया?
इसके पीछे मजबूत ज़मीनी नेटवर्क, सूचना लीक और सीमावर्ती इलाकों की जटिलता को बड़ा कारण माना जाता है।
क्या शाइस्ता परवीन विदेश भाग चुकी है?
ऐसी आशंकाएं जताई गईं, लेकिन अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
क्या यह पुलिस की विफलता है?
यह केवल पुलिस की विफलता नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की जटिलता और संरक्षण की राजनीति का परिणाम है।







