जब राष्ट्रपति के हाथों मिला सम्मान, तो झूम उठा पूरा जिला
नई दिल्ली में आयोजित भव्य समारोह में जब राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की उपस्थिति में बाराबंकी की बेटी पूजा पाल को प्रधानमंत्री बाल पुरस्कार से सम्मानित किया, तो यह केवल एक बाल वैज्ञानिक की उपलब्धि नहीं थी, बल्कि यह उस भारत की तस्वीर थी, जहां प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती। टीवी स्क्रीन से लेकर मोबाइल फोन तक, हर मंच पर पूजा पाल का नाम गूंज उठा। गांव, कस्बे और शहर—हर जगह गर्व और उत्साह की लहर दौड़ गई।
गरीबी, संघर्ष और उम्मीद के बीच पली सफलता की कहानी
सिरौलीगौसपुर विकासखंड के छोटे से गांव डलई का पुरवा की रहने वाली पूजा पाल, दिहाड़ी मजदूर पुत्ती लाल और प्राथमिक विद्यालय में रसोईयां के रूप में काम करने वाली सुनीला की पुत्री हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति सीमित थी, लेकिन सपनों की उड़ान असीम। न घर में आधुनिक सुविधाएं थीं, न मोबाइल फोन—फिर भी जिज्ञासा, मेहनत और सीखने की ललक ने पूजा को आगे बढ़ाया।

भूसा-धूल पृथक्करण यंत्र: विज्ञान से जुड़ा सामाजिक समाधान
तीन वर्ष पहले गांव के सरकारी विद्यालय में पढ़ाई के दौरान पूजा ने महसूस किया कि पशुपालकों और किसानों को भूसे और धूल को अलग करने में कठिनाई होती है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए उसने एक ऐसा यंत्र तैयार किया, जो कम लागत में भूसा और धूल को अलग कर सकता है। यह मॉडल न केवल वैज्ञानिक नवाचार था, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण जीवन से सीधे जुड़ा व्यावहारिक समाधान भी था।
शिक्षक का मार्गदर्शन बना सफलता की मजबूत नींव
विद्यालय के शिक्षक राजीव श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में पूजा ने अपने विचार को आकार दिया। शिक्षक का विश्वास, नियमित मार्गदर्शन और प्रयोग की स्वतंत्रता—इन तीनों ने मिलकर एक छात्रा को वैज्ञानिक बनने की दिशा दी। यही वजह रही कि पूजा का मॉडल पहले ब्लॉक, फिर जिला, राज्य और अंततः राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा।
इंस्पायर अवार्ड से राष्ट्रीय पहचान तक
पूजा का मॉडल इंस्पायर अवार्ड मानक योजना के अंतर्गत चयनित हुआ। राज्य स्तर पर उत्तर प्रदेश के चुनिंदा प्रतिभागियों में स्थान बनाना, फिर राष्ट्रीय विज्ञान मेले में देश के शीर्ष 100 नवाचारों में शामिल होना—यह क्रमिक यात्रा किसी चमत्कार से कम नहीं थी।
तीन साल में सात ऐतिहासिक छलांगें
- 2022-23: गांव के सरकारी स्कूल में मॉडल का निर्माण
- राज्य स्तरीय चयन: उत्तर प्रदेश के टॉप 10 नवाचारों में स्थान
- अक्टूबर 2023: राष्ट्रीय स्तर पर इंस्पायर अवार्ड चयन
- जनवरी 2024: राष्ट्रीय विज्ञान मेले में प्रस्तुति
- 14 जून 2025: भारत सरकार द्वारा जापान भ्रमण
- 18 सितंबर: प्रधानमंत्री की डॉक्यूमेंट्री में कहानी शामिल
- 26 दिसंबर: राष्ट्रपति के हाथों प्रधानमंत्री बाल पुरस्कार
प्रधानमंत्री बाल पुरस्कार: सिर्फ सम्मान नहीं, संदेश भी
प्रधानमंत्री बाल पुरस्कार विज्ञान, नवाचार और सामाजिक उपयोगिता के क्षेत्र में असाधारण प्रतिभा के लिए दिया जाता है। पूजा को यह सम्मान पर्यावरण संरक्षण आधारित नवाचार के लिए मिला, जो यह दर्शाता है कि आज का भारत केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं, बल्कि गांवों की मिट्टी में भी भविष्य गढ़ रहा है।
पूजा की जुबानी: सपने से भी बड़ी हकीकत
दूरभाष पर बातचीत में पूजा ने कहा कि उसने कभी कल्पना नहीं की थी कि गांव के सरकारी स्कूल में बनाया गया मॉडल उसे देश के मंच तक ले जाएगा। माता-पिता, शिक्षक और मीडिया का सहयोग उसकी ताकत बना। पूजा का संदेश साफ है—हालात चाहे जैसे हों, अगर हौसला मजबूत हो तो कोई भी मंज़िल दूर नहीं।
बाराबंकी की बेटियों के लिए नया अध्याय
पूजा पाल की सफलता ने जिले की बेटियों के लिए एक नया आत्मविश्वास पैदा किया है। यह कहानी साबित करती है कि शिक्षा, मार्गदर्शन और अवसर अगर मिल जाएं, तो ग्रामीण भारत की बेटियां भी वैश्विक पहचान बना सकती हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पूजा पाल को प्रधानमंत्री बाल पुरस्कार क्यों मिला?
पूजा पाल को पर्यावरण संरक्षण से जुड़े भूसा-धूल पृथक्करण यंत्र जैसे सामाजिक-उपयोगी वैज्ञानिक नवाचार के लिए यह सम्मान दिया गया।
पूजा पाल किस जिले से हैं?
पूजा पाल उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के सिरौलीगौसपुर ब्लॉक के एक छोटे से गांव से हैं।
पूजा के मॉडल की खासियत क्या है?
यह मॉडल कम लागत में भूसा और धूल को अलग करता है, जिससे किसानों और पशुपालकों को व्यावहारिक लाभ मिलता है।
यह कहानी बच्चों को क्या संदेश देती है?
यह कहानी बताती है कि संसाधनों की कमी कभी प्रतिभा की राह नहीं रोक सकती, अगर जिज्ञासा और मेहनत साथ हों।









