गणतंत्र दिवस समारोह के अवसर पर पीएम श्री सरकारी कंपोजिट विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया कि जब शिक्षा, संस्कार और सांस्कृतिक चेतना एक साथ मंच पर उतरती है, तब वह दृश्य केवल कार्यक्रम नहीं रहता बल्कि समाज के लिए संदेश बन जाता है। विद्यालय परिसर में बच्चों, शिक्षकों और ग्रामीणों की सामूहिक उपस्थिति ने इस आयोजन को एक जन-आंदोलन जैसा स्वरूप दे दिया, जहां राष्ट्र के प्रति सम्मान केवल शब्दों में नहीं बल्कि व्यवहार और भावनाओं में झलकता दिखाई दिया।
झंडारोहण से शुरू हुआ सम्मान और जिम्मेदारी का संदेश
समारोह की शुरुआत पूरे विधि-विधान के साथ झंडारोहण से हुई। जैसे ही तिरंगा फहराया गया, वातावरण राष्ट्रगान की गूंज से भर उठा। बच्चों और उपस्थित ग्रामीणों ने एक साथ खड़े होकर राष्ट्रगान प्रस्तुत किया, जिसने यह अनुभूति कराई कि गणतंत्र दिवस समारोह केवल एक तिथि नहीं, बल्कि संवैधानिक मूल्यों को आत्मसात करने का अवसर है।
बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन
झंडारोहण के बाद बच्चों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम इस आयोजन की आत्मा बन गए। नृत्य, नाटक, कविता और संस्कृत वंदना के माध्यम से बच्चों ने यह दिखाया कि शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं, बल्कि वह जीवन मूल्यों का विस्तार है। विशेष रूप से शिक्षा पर आधारित नाटकीय प्रस्तुति ने दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ दिया। यह प्रस्तुति इतनी प्रभावशाली थी कि वहां मौजूद हर व्यक्ति बच्चों की प्रतिभा से अभिभूत नजर आया।
शिक्षा-केंद्रित नाटक बना समारोह का केंद्र बिंदु
नाटकीय प्रस्तुति में शिक्षा के महत्व, अनुशासन, समान अवसर और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे विषयों को बेहद सरल लेकिन गहरे प्रभाव के साथ प्रस्तुत किया गया। बच्चों की संवाद शैली, भाव-भंगिमा और मंच पर आत्मविश्वास यह दर्शा रहा था कि विद्यालय में केवल पाठ्यक्रम ही नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण पर भी गंभीरता से कार्य हो रहा है।
खेल गतिविधियों से मिला शारीरिक और मानसिक विकास का संदेश
सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ-साथ बच्चों द्वारा खो-खो, कबड्डी, बैडमिंटन जैसी खेल गतिविधियों की प्रस्तुति भी की गई। इन खेलों के माध्यम से बच्चों ने यह संदेश दिया कि शिक्षा के साथ-साथ शारीरिक विकास भी उतना ही आवश्यक है। गणतंत्र दिवस समारोह में खेलों की यह झलक यह बताने के लिए पर्याप्त थी कि विद्यालय समग्र विकास की अवधारणा पर कार्य कर रहा है।
विद्यालय स्टाफ की सक्रिय भूमिका
इस सफल आयोजन के पीछे विद्यालय परिवार की समर्पित भूमिका रही। प्रधानाध्यापक चंद्रशेखर प्रसाद के मार्गदर्शन में सहायक अध्यापक लल्लन सिंह, संजय कुमार, बृजेश कुमार, शिक्षा मित्र शबनम, तकनीकी अनुदेशक रविकांत गुप्ता सहित अन्य शिक्षकों ने बच्चों को मंच तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। शिक्षकों का यह प्रयास साफ तौर पर दर्शाता है कि विद्यालय केवल पढ़ाने की जगह नहीं, बल्कि संस्कार देने का केंद्र है।
ग्रामीण सहभागिता ने बढ़ाया आयोजन का महत्व
समारोह में ग्रामीणों की उपस्थिति ने इस आयोजन को सामुदायिक स्वरूप प्रदान किया। बच्चों की प्रस्तुतियों पर ग्रामीणों द्वारा दिया गया उत्साह और पुरस्कार इस बात का संकेत था कि समाज विद्यालय की भूमिका को गंभीरता से समझता है। यह सहभागिता गणतंत्र दिवस समारोह को केवल स्कूल कार्यक्रम न रखकर सामाजिक उत्सव में बदल देती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
इस विद्यालय में गणतंत्र दिवस समारोह का मुख्य उद्देश्य क्या था?
समारोह का मुख्य उद्देश्य बच्चों में राष्ट्रभक्ति की भावना विकसित करना, संविधान के मूल्यों को समझाना और शिक्षा के साथ संस्कारों को व्यवहार में उतारना था।
बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को इतना सराहना क्यों मिली?
प्रस्तुतियों में शिक्षा, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे विषयों को सरल और प्रभावी ढंग से दिखाया गया, जिससे दर्शक भावनात्मक रूप से जुड़ गए।
क्या खेल गतिविधियां भी गणतंत्र दिवस समारोह का हिस्सा रहीं?
हां, समारोह में खो-खो, कबड्डी और बैडमिंटन जैसी खेल गतिविधियों के माध्यम से शारीरिक विकास और टीम भावना का संदेश भी दिया गया।
विद्यालय स्टाफ की भूमिका इस आयोजन में कैसी रही?
विद्यालय स्टाफ ने बच्चों को मार्गदर्शन देकर कार्यक्रम को सफल बनाया और यह सुनिश्चित किया कि आयोजन अनुशासित, प्रेरणादायक और उद्देश्यपूर्ण रहे।
ग्रामीणों की उपस्थिति ने समारोह को क्या महत्व दिया?
ग्रामीणों की सहभागिता से यह स्पष्ट हुआ कि विद्यालय और समाज मिलकर बच्चों के सर्वांगीण विकास में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।









