‘हठ छोड़ कर मठ जाएं स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद’ : शंकराचार्य विवाद में कूदे कुमार विश्वास, संतों ने खोल दिया मोर्चा

प्रयागराज जाते समय विमान के भीतर बैठे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, विवाद के बीच शांत मुद्रा में

कमलेश कुमार चौधरी की रिपोर्ट
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शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद विवाद अब केवल धार्मिक असहमति नहीं रह गया है।
कवि, संत, किसान नेता और राजनीतिक दल—सब इस मुद्दे पर आमने-सामने हैं।
गंगा स्नान से उपजा यह टकराव अब परंपरा, सत्ता और मर्यादा की परीक्षा बनता दिख रहा है।

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद विवाद लगातार गहराता जा रहा है। प्रयागराज में माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या के स्नान को लेकर शुरू हुआ यह मामला अब धार्मिक आस्था, संत परंपरा, प्रशासनिक निर्णय और राजनीतिक बयानबाज़ी के केंद्र में आ चुका है। एक ओर सरकार की ओर से संतुलित चुप्पी दिखाई दे रही है, वहीं दूसरी ओर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने अनशन और विरोध के रास्ते पर अडिग बने हुए हैं।

इसी बीच इस विवाद में नया मोड़ तब आया जब प्रसिद्ध कवि और वक्ता कुमार विश्वास ने सार्वजनिक टिप्पणी करते हुए कहा कि शंकराचार्य को हठ त्यागकर सब पर आशीर्वाद बरसाना चाहिए। उनकी यह टिप्पणी आते ही संत समाज के भीतर भी मतभेद खुलकर सामने आ गए।

शंकराचार्य विवाद पर क्या बोले कुमार विश्वास

कुमार विश्वास ने इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह स्वयं को इतना समर्थ नहीं मानते कि शंकराचार्य जैसी परंपरा के प्रतिनिधि पर कोई टिप्पणी कर सकें। उन्होंने कहा कि वह एक सामान्य आस्तिक हैं और उसी भाव से अपनी बात रख रहे हैं। उनके अनुसार, प्रशासन को संतों से संवाद करते समय अतिरिक्त संवेदनशीलता और मर्यादा का पालन करना चाहिए।

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कुमार विश्वास ने यह भी कहा कि जिस व्यक्ति के शरीर पर भगवा है, उससे बात करते समय भाषा और व्यवहार दोनों में जिम्मेदारी झलकनी चाहिए। उन्होंने शंकराचार्य से भी अपील की कि वे सात्विक क्रोध को त्यागकर समाज पर कृपा और आशीर्वाद बरसाएं, क्योंकि उनकी परंपरा ने ही धर्म का मान बढ़ाया है।

डिप्टी सीएम की अपील, लेकिन सियासी चुप्पी

इस विवाद के बीच उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से क्रोध त्यागकर स्नान करने की अपील की थी। हालांकि, सरकार की ओर से इसके बाद कोई ठोस या स्पष्ट बयान सामने नहीं आया, जिससे यह संदेश गया कि प्रशासन इस मुद्दे पर बेहद सतर्क और सीमित प्रतिक्रिया की नीति अपना रहा है।

सरकार की इस चुप्पी को विपक्ष और संत समाज दोनों अलग-अलग तरीके से देख रहे हैं। कुछ इसे संयम मान रहे हैं, तो कुछ इसे टालने की रणनीति बता रहे हैं।

महाराज बालक दास ने उठाए तीखे सवाल

महामंडलेश्वर महाराज बालक दास ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर सीधा सवाल खड़ा करते हुए पूछा कि क्या वे माघ मेले में धर्म के लिए गए थे या राजनीति करने। उन्होंने कहा कि संत परंपरा में टकराव और अनशन जैसी स्थितियां दुर्लभ होती हैं और इससे समाज में भ्रम की स्थिति पैदा होती है।

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मौनी अमावस्या के बाद उत्पन्न विवाद के बावजूद शंकराचार्य का अनशन जारी है। वह अब भी अपने शिविर के बाहर बैठे हुए हैं, जिससे स्थिति और अधिक संवेदनशील बनती जा रही है।

अखिलेश यादव ने दिया समर्थन, योगी सरकार पर निशाना

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक बार फिर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के पक्ष में बयान देते हुए योगी सरकार को घेरने की कोशिश की है। उनका कहना है कि संतों की भावनाओं को नजरअंदाज करना सामाजिक संतुलन के लिए घातक हो सकता है।

‘हठ छोड़कर मठ जाएं’ — आचार्य प्रमोद कृष्णम

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि शंकराचार्य को हठ छोड़कर मठ में लौट जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य हैं, शुक्राचार्य नहीं बनना चाहिए। ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहिए जिससे देश को तोड़ने वाली ताकतों को अप्रत्यक्ष लाभ मिले।

कांग्रेस ने संभाली सुरक्षा की जिम्मेदारी

कांग्रेस ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में उतरते हुए उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने का ऐलान किया है। कांग्रेस नेता दीपक सिंह ने फोन पर शंकराचार्य से बातचीत की और सुरक्षा के लिए अनुमति मांगी।

दीपक सिंह के नेतृत्व में 150 कांग्रेसी 8-8 घंटे की शिफ्ट में सुरक्षा करेंगे। 28 जनवरी से प्रयागराज पहुंचकर यह व्यवस्था लागू की जाएगी।

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राकेश टिकैत का बयान: संत और किसान नाराज हुए तो देश को पड़ेगा भारी

किसान नेता राकेश टिकैत ने प्रयागराज में चल रहे शंकराचार्य गंगा स्नान विवाद पर बयान देते हुए कहा कि शंकराचार्य को स्नान करवा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि संत और किसान दोनों नाराज हुए, तो इसका असर पूरे देश पर पड़ेगा।

उनका कहना था कि भारत कृषि और ऋषियों का देश है, और जब-जब इन दोनों के साथ छेड़छाड़ हुई है, तब-तब सामाजिक हलचल पैदा हुई है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद विवाद क्या है?

यह विवाद प्रयागराज में माघ मेले और मौनी अमावस्या के दौरान गंगा स्नान और प्रशासनिक निर्णयों को लेकर उत्पन्न हुआ है।

कुमार विश्वास ने इस विवाद पर क्या कहा?

उन्होंने शंकराचार्य से क्रोध त्यागकर आशीर्वाद देने की अपील की और प्रशासन से संवेदनशीलता बरतने की बात कही।

कांग्रेस क्यों उतरी समर्थन में?

कांग्रेस ने शंकराचार्य की सुरक्षा का जिम्मा उठाने का ऐलान किया और इसे संत सम्मान से जोड़ा।

यह विवाद इतना अहम क्यों बन गया?

क्योंकि यह मामला धर्म, राजनीति, प्रशासन और सामाजिक संतुलन—चारों को एक साथ प्रभावित करता है।

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माघ मेले में मंच पर बैठे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, संतों और मीडिया के बीच संबोधित करते हुए।
प्रयागराज माघ मेले में संगम स्नान विवाद के बीच मंच पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, जिनका संघर्षशील अतीत फिर चर्चा में है।

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