सिधौली गणतंत्र दिवस कार्यक्रम : अंकेश्वर महादेव मंदिर में भजन, राष्ट्रभक्ति और महाआरती के साथ मनाया गया 77वां गणतंत्र दिवस

सिधौली के अंकेश्वर महादेव मंदिर में गणतंत्र दिवस कार्यक्रम के दौरान बच्चों द्वारा देशभक्ति प्रस्तुति

रीतेश कुमार गुप्ता की रिपोर्ट
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सिधौली गणतंत्र दिवस कार्यक्रम केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि यह राष्ट्रभक्ति, सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक सहभागिता का ऐसा संगम बना, जहाँ मंदिर प्रांगण देशप्रेम की भावनाओं से गूंज उठा।

सिधौली गणतंत्र दिवस कार्यक्रम के तहत सीतापुर जनपद के सिधौली कस्बे के मोहल्ला सिद्धेश्वर नगर स्थित अंकेश्वर महादेव मंदिर में 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर एक विशेष सांस्कृतिक एवं राष्ट्रभक्ति कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सोमवार की शाम श्री मारुतिनंदन हनुमत सेवा संस्थान के सेवादारों के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में भजन संध्या, देशभक्ति गीत, बाल कलाकारों की प्रस्तुतियाँ और भव्य महाआरती ने श्रद्धालुओं एवं दर्शकों को भावविभोर कर दिया।

मंदिर परिसर में राष्ट्रभक्ति और भक्ति का अद्भुत संगम

गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व को केवल औपचारिकता तक सीमित न रखते हुए अंकेश्वर महादेव मंदिर परिसर में इसे सामाजिक चेतना से जोड़ने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत देशभक्ति से ओत-प्रोत भजनों से हुई, जिनमें भारत माता, संविधान और राष्ट्रीय एकता के भाव प्रमुख रहे। मंदिर परिसर में उपस्थित श्रद्धालुओं ने दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम की गरिमामयी शुरुआत की।

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बाल कलाकारों की प्रस्तुतियों ने मोहा मन

कार्यक्रम का सबसे आकर्षक पक्ष छोटे-छोटे बच्चों की देशभक्ति प्रस्तुतियाँ रहीं। खुशी सब्बरवाल के मार्गदर्शन में नैंसी, वैशाली, जानवी, नेहा, शिवांशी, माही, गौरी और शौर्या सहित कई बाल कलाकारों ने मंच से देशभक्ति गीतों पर मनमोहक प्रस्तुति दी। इन बच्चों की भाव-भंगिमा, आत्मविश्वास और मंचीय अनुशासन ने यह स्पष्ट कर दिया कि नई पीढ़ी में राष्ट्रप्रेम की जड़ें मजबूत हो रही हैं।

महिलाओं और स्थानीय कलाकारों की सहभागिता

कार्यक्रम में महिलाओं की भागीदारी ने आयोजन को और भी समृद्ध बनाया। महिलाओं द्वारा प्रस्तुत किए गए भजन और राष्ट्रगीतों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इसके साथ ही स्थानीय कलाकारों ने भी मधुर स्वर में देशभक्ति गीत प्रस्तुत कर कार्यक्रम को ऊँचाई प्रदान की। यह सहभागिता बताती है कि गणतंत्र दिवस जैसे पर्व केवल सरकारी मंचों तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग में जीवंत हैं।

भव्य महाआरती बनी आयोजन का केंद्रबिंदु

कार्यक्रम के समापन चरण में मंदिर प्रांगण में भव्य महाआरती का आयोजन किया गया। आरती के दौरान शंखनाद, घंटियों की ध्वनि और मंत्रोच्चार ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। श्रद्धालुओं ने हाथ जोड़कर राष्ट्र की सुख-समृद्धि और एकता की कामना की। यह दृश्य कार्यक्रम की आत्मा बनकर उभरा।

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गणमान्य नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति

इस अवसर पर आलोक शर्मा, विनीत श्रीवास्तव, ज्ञानू सिंह, सोनू मिश्रा, संजय शुक्ला, बूटा द्विवेदी, अर्चना द्विवेदी, सुशीला, सरिता, रीना गुप्ता, गीता, दीदा अवस्थी और पुष्पा विश्वकर्मा सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए इसे सामाजिक समरसता और राष्ट्रभक्ति को मजबूत करने वाला बताया।

धार्मिक स्थलों से निकलता राष्ट्रबोध

सिधौली गणतंत्र दिवस कार्यक्रम इस बात का उदाहरण बना कि धार्मिक स्थल केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं, बल्कि वे सामाजिक और राष्ट्रीय चेतना के भी केंद्र हो सकते हैं। मंदिर जैसे स्थानों से जब संविधान, देश और एकता का संदेश निकलता है, तो उसका प्रभाव समाज के व्यापक वर्ग तक पहुँचता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सिधौली गणतंत्र दिवस कार्यक्रम का उद्देश्य क्या था?

इस कार्यक्रम का उद्देश्य धार्मिक वातावरण के माध्यम से राष्ट्रभक्ति, संविधान के प्रति सम्मान और सामाजिक एकता की भावना को मजबूत करना था।

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कार्यक्रम में बच्चों की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण रही?

बच्चों की प्रस्तुतियों के माध्यम से राष्ट्रप्रेम का संदेश नई पीढ़ी तक प्रभावी रूप से पहुँचा, जिससे कार्यक्रम भावनात्मक रूप से अधिक प्रभावशाली बना।

क्या ऐसे आयोजन सामाजिक चेतना को प्रभावित करते हैं?

हाँ, ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक संवाद, सांस्कृतिक जुड़ाव और राष्ट्रीय मूल्यों के प्रति जागरूकता पैदा करते हैं।

क्या धार्मिक स्थलों पर राष्ट्रीय पर्व मनाना उचित है?

जब धार्मिक स्थल सामाजिक और राष्ट्रीय चेतना का माध्यम बनते हैं, तब ऐसे आयोजन समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं।

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