बृज भूषण शरण सिंह 2029 लोकसभा चुनाव फैजाबाद से लड़ने के संकेत, पिता-पुत्र राजनीति पर बढ़ी हलचल

2029 लोकसभा चुनाव को लेकर बृज भूषण शरण सिंह और सांसद करण भूषण सिंह की संयुक्त तस्वीर

इरफान अली लारी की रिपोर्ट
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बृज भूषण शरण सिंह 2029 लोकसभा चुनाव को लेकर दिए गए ताज़ा बयान ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई सरगर्मी पैदा कर दी है। जहां एक ओर फैजाबाद सीट पर भाजपा की रणनीति को लेकर सवाल उठने लगे हैं, वहीं दूसरी ओर पिता-पुत्र की संभावित चुनावी जोड़ी ने विपक्ष और संगठन — दोनों को असहज कर दिया है।

बृज भूषण शरण सिंह 2029 लोकसभा चुनाव को लेकर पूर्व भाजपा सांसद और कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह ने सोमवार को फैजाबाद (अयोध्या) से चुनाव लड़ने के संकेत देकर राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी। फैजाबाद के सिविल लाइंस एलआईसी चौराहे पर एक गारमेंट शोरूम के उद्घाटन के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय उचित समय पर लिया जाएगा, लेकिन 2029 की तैयारी को लेकर संकेत साफ हैं।

फैजाबाद सीट और भाजपा की जटिल राजनीतिक स्थिति

फैजाबाद लोकसभा सीट, जो अयोध्या जिले की एकमात्र संसदीय सीट है, 2024 के चुनावों में भाजपा के लिए अप्रत्याशित झटके का कारण बनी थी। समाजवादी पार्टी के अवधेश प्रसाद ने भाजपा प्रत्याशी लल्लू सिंह को 54 हजार से अधिक मतों से पराजित कर दिया था। यह हार केवल एक सीट की हार नहीं थी, बल्कि अयोध्या जैसे वैचारिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र में भाजपा की रणनीति पर सवाल भी थी।

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विनय कटियार को टिकट देने की वकालत

बृज भूषण शरण सिंह ने इसी क्रम में यह भी कहा कि फैजाबाद से पूर्व भाजपा सांसद विनय कटियार को पार्टी टिकट मिलना चाहिए। उनके अनुसार, विनय कटियार का टिकट मांगना पूरी तरह उनका अधिकार है और इसमें कोई असामान्य बात नहीं है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि कटियार इस सीट के लिए योग्य और अनुभवी नेता हैं।

पिता-पुत्र राजनीति का खुला संकेत

इस पूरे घटनाक्रम को उस पृष्ठभूमि में भी देखा जा रहा है, जहां बृज भूषण के बेटे और कैसरगंज से वर्तमान भाजपा सांसद करण भूषण सिंह पहले ही सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि 2029 के आम चुनावों में पिता-पुत्र की जोड़ी मैदान में उतरेगी। इस बयान के बाद भाजपा के भीतर वंशवादी राजनीति बनाम संगठनात्मक संतुलन की बहस भी तेज हुई है।

शक्ति प्रदर्शन और सोशल मीडिया समर्थन

हाल ही में अपने जन्मदिन पर आयोजित शक्ति प्रदर्शन के दौरान भी बृज भूषण शरण सिंह ने 2029 के आम चुनावों की तैयारी के स्पष्ट संकेत दिए थे। सोमवार को उन्होंने युवाओं और सोशल मीडिया से मिल रहे समर्थन के लिए जनता का आभार जताया और कहा कि जनता का स्नेह और विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत है।

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विवाद, आरोप और राजनीतिक दूरी

कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष के रूप में बृज भूषण शरण सिंह का कार्यकाल विवादों से घिरा रहा। 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा द्वारा उन्हें टिकट न दिए जाने का निर्णय कई महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद लिया गया था। इन आरोपों के विरोध में देश के शीर्ष पहलवान — जिनमें ओलंपियन विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पुनिया शामिल थे — ने जंतर मंतर पर लंबे समय तक आंदोलन किया।

अदालती फैसला और राजनीतिक प्रभाव

हालांकि, पिछले वर्ष दिल्ली की एक अदालत ने नाबालिग महिला पहलवान द्वारा दायर यौन उत्पीड़न के मामले में बृज भूषण शरण सिंह को बरी कर दिया। अदालत ने दिल्ली पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए मामले को समाप्त करने की सिफारिश को सही ठहराया। इस फैसले के बाद सिंह की राजनीतिक सक्रियता में स्पष्ट बढ़ोतरी देखी जा रही है।

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2029 की राह: संकेत, सवाल और संभावनाएं

बृज भूषण शरण सिंह 2029 लोकसभा चुनाव को लेकर दिए गए बयान केवल व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा नहीं माने जा रहे, बल्कि उत्तर प्रदेश की बदलती राजनीतिक जमीन, भाजपा की अंदरूनी रणनीति और विपक्ष की तैयारियों के संदर्भ में देखे जा रहे हैं। फैजाबाद सीट, पिता-पुत्र की जोड़ी और पुराने विवाद — ये सभी कारक 2029 के चुनावी गणित को और जटिल बनाते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

क्या बृज भूषण शरण सिंह 2029 का लोकसभा चुनाव लड़ेंगे?

उन्होंने फैजाबाद से चुनाव लड़ने के संकेत दिए हैं, हालांकि अंतिम निर्णय उचित समय पर लेने की बात कही है।

फैजाबाद सीट 2024 में भाजपा क्यों हार गई?

समाजवादी पार्टी के अवधेश प्रसाद ने भाजपा प्रत्याशी को 54 हजार से अधिक मतों से हराकर अप्रत्याशित जीत दर्ज की थी।

पिता-पुत्र की जोड़ी से भाजपा को क्या फायदा या नुकसान हो सकता है?

यह संगठनात्मक संतुलन, वंशवाद की बहस और क्षेत्रीय समर्थन — तीनों स्तरों पर असर डाल सकता है।

यौन उत्पीड़न मामले में अदालत का क्या फैसला रहा?

दिल्ली की अदालत ने नाबालिग पहलवान के मामले में बृज भूषण शरण सिंह को बरी कर दिया और क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार की।

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