फाल्गुन के इस मौसम में जब वातावरण स्वयं उल्लास से भरा रहता है, उसी बीच एक ऐसा दृश्य उपस्थित हुआ जहाँ शहनाई की मधुर ध्वनि और निकाह की सादगीपूर्ण क़बूलियत एक ही मंच पर सुनाई दी। समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के अंतर्गत राजकीय आईटीआई/केंद्रीय विद्यालय परिसर में भव्य सामूहिक विवाह समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें कुल 161 जोड़ों का विवाह सम्पन्न कराया गया।
इनमें 154 हिंदू जोड़ों का वैदिक रीति-रिवाज से सात फेरे संपन्न हुए, वहीं 07 मुस्लिम जोड़ों का निकाह विधिवत सम्पन्न कराया गया। एक ही परिसर में दो अलग-अलग धार्मिक परंपराओं का यह संयोजन सामाजिक समरसता का दृश्य प्रस्तुत कर रहा था।
योजना का उद्देश्य और स्वरूप
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना समाज के सभी वर्गों के लिए संचालित है। इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सम्मानपूर्वक विवाह संपन्न कराने में सहयोग देना है। जिला समाज कल्याण अधिकारी के अनुसार योजना के तहत प्रत्येक जोड़े पर कुल ₹1,00,000 व्यय किए जाने का प्रावधान है।
इस राशि में ₹60,000 सीधे विवाहिता कन्या के बैंक खाते में अंतरित किए जाते हैं। ₹25,000 की उपहार सामग्री प्रदान की जाती है तथा ₹15,000 कार्यक्रम आयोजन पर व्यय किया जाता है। यह व्यवस्था न केवल आर्थिक सहयोग देती है, बल्कि पारदर्शिता का भी संकेत देती है।
जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की उपस्थिति
समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में विधायक शलभ मणि त्रिपाठी उपस्थित रहे। उनके साथ मुख्य विकास अधिकारी, जिला विकास अधिकारी, उपजिलाधिकारी सदर, राजू मणि (एमएलसी प्रतिनिधि), अवधेश सिंह (एमएलसी प्रतिनिधि), पवन कुमार गुप्ता (प्रमुख), सरिता प्रकाश (चेयरमैन), जिला समाज कल्याण अधिकारी तथा खंड विकास अधिकारी सहित अन्य अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
दिनेश त्रिपाठी (जिलाध्यक्ष, माध्यमिक शिक्षक संघ) तथा राजेश सिंह श्रीनेत (जिलाध्यक्ष, अखिल भारतीय क्षेत्रीय महासंघ) सहित अनेक गणमान्य नागरिकों ने नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद दिया।
एक मंच, अनेक संस्कार
कार्यक्रम का वातावरण केवल औपचारिक नहीं था। मंच पर वैदिक मंत्रोच्चार की ध्वनि गूँज रही थी तो दूसरी ओर निकाह की सादगीपूर्ण प्रक्रिया सम्पन्न हो रही थी। परिवारजन, रिश्तेदार और स्थानीय नागरिक इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने।
सामूहिक विवाह केवल आर्थिक सहायता का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक एकता का प्रतीक बनकर उभरा। जब 161 जोड़ों ने एक साथ वैवाहिक जीवन की शुरुआत की, तो वह दृश्य केवल आयोजन नहीं, सामूहिक संकल्प का प्रतीक था।
सामाजिक महत्व
सामूहिक विवाह योजनाएँ समाज में व्याप्त दहेज, अनावश्यक खर्च और दिखावे की प्रवृत्ति को कम करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम मानी जाती हैं। इस आयोजन ने यह संदेश भी दिया कि विवाह संस्कार की गरिमा सादगी में भी सुरक्षित रह सकती है।
विवाहिता कन्याओं के खातों में सीधे धनराशि अंतरित किए जाने से उनके आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में भी पहल दिखाई देती है। योजना का यह आयाम दीर्घकालिक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न कर सकता है।
भविष्य की उम्मीद
कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने योजना की निरंतरता और पारदर्शिता पर बल दिया। नवविवाहित जोड़ों ने भी संतोष व्यक्त किया कि उन्हें सम्मानपूर्वक विवाह संपन्न करने का अवसर मिला।
एक ही दिन में 161 नए जीवनों की शुरुआत ने यह संकेत दिया कि सामाजिक योजनाएँ जब सामूहिक सहभागिता के साथ लागू होती हैं, तो उनका प्रभाव केवल आँकड़ों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि समाज के मनोभाव में भी दिखाई देता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत कितनी सहायता दी जाती है?
प्रत्येक जोड़े पर कुल ₹1,00,000 व्यय का प्रावधान है।
₹1,00,000 की राशि का वितरण कैसे होता है?
₹60,000 सीधे विवाहिता के बैंक खाते में, ₹25,000 उपहार सामग्री और ₹15,000 आयोजन पर व्यय किए जाते हैं।
क्या यह योजना सभी वर्गों के लिए है?
हाँ, योजना समाज के सभी वर्गों के लिए संचालित है।

