गणतंत्र दिवस पर झंडोत्तोलन का दृश्य उस समय विशेष बन गया, जब रोहतक के ग्रामीण क्षेत्र में स्थित खरकरा गोशाला में राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया। यह आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि ग्रामीण समाज, गौसेवा और संवैधानिक मूल्यों के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया। ठंड भरी सुबह में भी लोगों की उपस्थिति और उत्साह यह दर्शा रहा था कि गांवों में आज भी गणतंत्र दिवस की भावना पूरी जीवंतता के साथ सांस लेती है।
ग्रामीण परिवेश में सादगी के साथ मनाया गया गणतंत्र दिवस
खरकरा गोशाला परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में किसी भव्य मंच या दिखावे की बजाय सादगी और आत्मीयता प्रमुख रही। राष्ट्रीय ध्वज फहराने के बाद उपस्थित लोगों ने राष्ट्रगान का सामूहिक गायन किया। गोशाला परिसर देशभक्ति के नारों और भारत माता की जय के उद्घोष से गूंज उठा। यह दृश्य बताता है कि लोकतंत्र की जड़ें केवल शहरों में नहीं, बल्कि गांवों की मिट्टी में भी गहराई से समाई हुई हैं।
स्थानीय सहभागिता ने कार्यक्रम को बनाया खास
इस अवसर पर स्थानीय ग्रामीणों और गोशाला परिवार की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। कार्यक्रम में मुख्य रूप से मनदीप खरकरा, रोहतक (हरियाणा) के साथ जितेंद्र, भरत, आसू, रवि, सुभाष, सोनू और दीपक उपस्थित रहे। इनके अलावा लिम्बू, गंगाचंद, दीपांशु सोनी, यशवीर, अंकित, दिनेश, जगबीर, संजीत, मनजीत मलिक, विनोद और टोनी ने भी कार्यक्रम में सहभागिता दर्ज कराई। सभी की उपस्थिति यह दर्शाती है कि गांव के सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों में सामूहिकता आज भी मजबूत है।
गौसेवा और राष्ट्रसेवा का भाव
खरकरा गोशाला केवल पशुओं के संरक्षण का केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का भी प्रतीक बन चुकी है। गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर यहां झंडोत्तोलन का आयोजन यह संदेश देता है कि गौसेवा और राष्ट्रसेवा एक-दूसरे के पूरक हैं। ग्रामीण समाज में गोशालाएं केवल धार्मिक या परंपरागत संस्थान नहीं रहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सेवा के केंद्र के रूप में उभर रही हैं।
मनदीप खरकरा का संदेश
कार्यक्रम के दौरान मनदीप खरकरा ने कहा कि गणतंत्र दिवस हमें केवल अधिकारों की याद नहीं दिलाता, बल्कि हमारे कर्तव्यों को भी रेखांकित करता है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण समाज को संविधान की भावना को समझते हुए आपसी भाईचारे, सेवा और अनुशासन को जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। उनके अनुसार, गांव मजबूत होंगे तो देश स्वतः मजबूत होगा।
स्थानीय युवाओं की सोच
कार्यक्रम में उपस्थित जितेंद्र ने कहा कि गांवों में इस तरह के आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं। उन्होंने बताया कि जब बच्चे और युवा गोशाला जैसे स्थानों पर राष्ट्रीय पर्व मनाते हैं, तो उनके भीतर देश और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना स्वतः विकसित होती है।
वहीं दीपांशु सोनी ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में गणतंत्र दिवस मनाने का तरीका भले ही सरल हो, लेकिन भावनाएं अत्यंत गहरी होती हैं। उनके अनुसार, यह सादगी ही ग्रामीण भारत की सबसे बड़ी ताकत है, जो लोकतंत्र को जीवंत बनाए रखती है।
ग्रामीण समाज और लोकतंत्र का मजबूत रिश्ता
खरकरा गोशाला में आयोजित यह कार्यक्रम इस बात का प्रमाण है कि लोकतंत्र केवल सरकारी इमारतों या बड़े आयोजनों तक सीमित नहीं है। गांवों में जब लोग मिलकर राष्ट्रीय पर्व मनाते हैं, तो वह लोकतंत्र की वास्तविक आत्मा को प्रकट करता है। सामूहिक सहभागिता, आपसी सहयोग और सेवा भावना—ये सभी तत्व ग्रामीण लोकतंत्र को मजबूती प्रदान करते हैं।
संदेश जो आगे तक जाएगा
गणतंत्र दिवस पर झंडोत्तोलन का यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगा। यह संदेश देगा कि राष्ट्रभक्ति केवल भाषणों या नारों तक सीमित नहीं, बल्कि दैनिक जीवन में सेवा, अनुशासन और सामूहिक जिम्मेदारी निभाने से साकार होती है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, खरकरा गोशाला में आयोजित गणतंत्र दिवस पर झंडोत्तोलन कार्यक्रम ग्रामीण भारत की उस चेतना को दर्शाता है, जहां परंपरा, सेवा और राष्ट्रभक्ति एक साथ चलती हैं। यह आयोजन न केवल एक दिन का उत्सव रहा, बल्कि गांव और समाज को जोड़ने वाला एक मजबूत सूत्र बनकर उभरा।










